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  • राज्य सरकार करेगी शिक्षकों की जायज मांगों पर विचार : मुख्यमंत्री
     
    प्रदेश भर से आए 3406 प्राथमिक सहायक शिक्षकों ने पीटरहॉफ होटल में आयोजित ‘धन्यवाद’ कार्यक्रम में शिक्षकों का मानदेय 13000 रुपये से बढ़ाकर 21,000 रुपये करने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह का धन्यवाद किया। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार सदैव न्याय में विश्वास रखती है और सरकार ने शिक्षकों की मानदेय बढ़ाने की मांग को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षक समुदाय के कल्याण को सदा सुनिश्चित करती आ रही है तथा विशेषकर सीमित आय वाले शिक्षकों का पूरा ध्यान रखा जाता है। राज्य सरकार ने पीएटी, पैरा अथवा पीटीए शिक्षकों की उचित मांगों के प्रति उदार रवैया रहा है तथा इनमें से ज्यादातर को पूरा भी किया है।
    उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने सभी वर्गो से सदा न्याय किया है, जबकि इसके विपरीत भाजपा जाति, क्षेत्र तथा धर्म की राजनीति करती आ रही है।
    मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की अन्य मांगों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का आश्वासन दिया।
    इससे पूर्व पीएटी के राज्य अध्यक्ष श्री नारायण हिमराल ने मुख्यमंत्री तथा अन्य गणमान्यों का इस अवसर पर स्वागत किया।
    राज्य युवा कांग्रेस के अध्यक्ष श्री विक्रमादित्य सिंह, ग्रामीण शिमला खण्ड कांग्रेस समिति के अध्यक्ष श्री चन्द्रशेखर, शिक्षा के संयुक्त निदेशक श्री के.आर. सैजल भी उपस्थित थे।
     
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  • मुख्यमंत्री ने ‘मेस्मराजिंग मंडी’ सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारम्भ किया
    मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने आज शिमला के रिज मैदान पर मंडी जिला की संस्कृति को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आयोजित ‘मेस्मराजिंग मंडी’  उत्सव का पारम्परिक ‘जलेब’ से उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन कला, भाषा एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन मंडी के संयुक्त तत्वावधान में मंडी जिला की संस्कृति, रीति-रिवाजों, खान-पान और परम्पराओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए किया गया। 
    इस अवसर पर  अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि वह हमेशा अपनी प्राचीन परम्पराओं भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण पर बल देते रहे हैं, क्योंकि हमारी पहचान हमारे रीति-रिवाजों और परम्पराओं से ही है। जो सभ्यताएं अपनी विरासत को बनाए रखने में नाकाम रही हैं, वे समय के साथ विलीन हो जाती हैं। 
    इस अवसर पर सरकारी विभागों, गैर सरकारी संगठनों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शकों को मंडी जिला की संस्कृति के दर्शन होंगे, जिसमें विभिन्न स्टालों में परम्परागत बर्तन व पुरातन काल के वाद्य यंत्र प्रदर्शित किए गए तथा मंडी जिला के खान-पान से जुड़े स्टाल भी लगाए गए हैं। 
    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस तरह का आयोजन प्रत्येक जिला की संस्कृति के प्रोत्साहन के लिए चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जाएगा ताकि सभी जिलों के इतिहास परम्पराओं, रीति-रिवाजों से आम आदमी के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटक भी परिचित हो सके। इन आयोजनों में सम्बन्धित जिलों के इतिहास, संस्कृति, लोक परम्पराओं को प्रदर्शित किया जाएगा। 
    इससे पूर्व उन्होंने देव माहुनाग और बाला कामेश्वर देवता को भी शीश नवाया, जिन्हें ‘छोटी काशी’ कहलाने वाले मंडी से विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया था।
     इस अवसर पर मंडी के मांडव कला मंच के कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृति प्रस्तुति भी दी।
    स्वास्थ्य मंत्री श्री कौल सिंह, पंचायती राज मंत्री श्री अनिल शर्मा, राज्य युवा कांग्रेस अध्यक्ष श्री विक्रमादित्य सिंह, भाषा, कला एवं संस्कृति की प्रधान सचिव श्रीमती अनुराधा ठाकुर, मंडी के उपायुक्त श्री संदीप कदम एवं भाषा, कला एवं संस्कृति की निदेशक श्रीमती शशि ठाकुर तथा शिमला व मंडी के  अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
     
     

     

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  • शैक्षणिक माहौल खराब करने वाले विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री ने चेताया
    मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में कुल्लू छात्र कल्याण संघ के वार्षिक समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है कि छात्र संगठन के कुछ छात्रों ने सेवानिवृत्त कुलपति के खिलाफ दुष्प्रचारक पोस्टर लगाए। यह व्यवहार शिक्षित युवाओं को बिल्कुल भी शोभा नहीं देता। उन्होंने दोषियों का पता लगाने तथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। 
    ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी का अपमान करना व अपशब्द का उपयोग करना नहीं है। ऐसी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों को स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ को जानना चाहिए। हालांकि ऐसे शरारती तत्व संख्या में कम होते हैं, परन्तु वे शैक्षणिक वातावरण को दूषित करते हैं।’ उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम ऐसे व्यक्तियों को समझाना चाहिए और यदि आवश्यकता पड़े तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्यों से संस्थान की बदनामी होती है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी ऐसी कुछ घटनाएं देखी गई हैं, जिनमें शिक्षकों से दुर्व्यवहार तथा छात्रों में आपसी झड़प के मामले शामिल हैं, जो विश्वविद्यालय तथा प्रदेश के हित में नहीं हैं।
    उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शैक्षणिक संस्थान खोलने का आए दिन विपक्ष द्वारा विरोध किया जाता है, लेकिन विपक्ष का ऐसा करना बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है। इसका प्रमाण हाल ही में एक सर्वेक्षण द्वारा प्रदेश को बड़े राज्यों की श्रेणी में शिक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया जाना है, जो सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रयासों का ही फल है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा नेता प्रदेश के लोगों विशेषकर युवाओं को शिक्षित और जागरूक होते हुए नहीं देख सकते हैं, क्योंकि शिक्षित होने के उपरांत वे भाजपा की बांटने की नीति को समझ जाएंगे। 
    दूरदराज के क्षेत्रों के स्कूलों में रिक्त पदों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हालांकि शिक्षकों के कई पद भर दिए गए हैं, लेकिन इन क्षेत्रों से अभी भी इस सम्बन्ध में शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने शिक्षकों को चेताया कि वे अपने पसंदीदा स्थान पर नियुक्ति करवाने में व्यस्त रहने की बजाय प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करें। 
    उन्होंने कुल्लू छात्र कल्याण संघ को सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 50 हजार रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की।
    कुल्लू छात्र कल्याण संघ के अध्यक्ष श्री धमेन्द्र ठाकुर ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। 
    मण्डी समिति कुल्लू के अध्यक्ष उपेन्द्र कांत मिश्र ने संघ को 21 हजार रुपये भी प्रदान किए। 
    इस अवसर पर विधायक श्री खूब राम तथा कार्यकारी कुलपति आर.एस. चौहान भी उपस्थित थे।
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  • मुख्यमंत्री से कैलाश फेडरेशन के नव निवार्चित अध्यक्ष ने की भेंट
    मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह से आज यहां कैलाश फेडरेशन के नव निर्वाचित अध्यक्ष श्री आई.डी. मेक्टा ने भेंट की।
    मुख्यमंत्री ने श्री मेक्टा को नई नियुक्ति के लिए बधाई दी। 
    श्री आई.डी. मेक्टा कोटखाई तहसील के कलबोग से सम्बन्धित हैं। इससे पूर्व वे कैलाश फेडरेशन के उपाध्यक्ष थे।
    मुख्य संसदीय सचिव श्री रोहित ठाकुर भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
     
     
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  • बांग्लादेश के उच्चायुक्त की मुख्यमंत्री से भेंट
     
    बांग्लादेश के उच्चायुक्त श्री सैयद मुआजाम अली ने आज यहां मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह से भेंट की।
    श्री वीरभद्र सिंह और श्री सैयद मुआजाम ने इस अवसर पर एक-दूसरे को पुस्तकें भेंट की।
    मुख्यमंत्री ने श्री अली को शॉल और हिमाचली टोपी से  सम्मानित किया। 
     
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  • मुख्यमंत्री ने स्वां नदी के तटीकरण कार्य में हो रहे बिलम्ब पर चिंता व्यक्त की
    शीघ्र धनराशि जारी करने का मामला प्रधानमंत्री से उठाया जाएगा
    मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने आज यहां स्वां नदी तटीकरण प्राधिकरण की शासकीय निकाय की बैठक की अध्यक्षता करते हुए ऊना जिले की स्वां नदी तटीकरण परियोजना के लिए केन्द्रीय सहायता में देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। 
    उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रलाय द्वारा स्वं नदी की सभी सहायक नदियों के तटीकरण के लिए 922.485 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी थी। परियोजना का वित्त पोषण 70ः30 के तहत होना था और समझौते के अनुसार केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा परियोजना का 70 प्रतिशत, जबकि प्रदेश सरकार द्वारा 30 प्रतिशत धनराशि वहन करनी थी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि धनराशि न मिलने के कारण स्वां नदी पर यदि तटबंध न किया गया, तो पहले पूर्ण किए गए कार्यों को बाढ़ से नुकसान होगा। उन्होंने अधिकारियों को प्रधानमंत्री को सभी जानकारी और समझौते के तहत जारी केन्द्रीय भागीदारी के संदर्भ सहित पत्र लिखने के निर्देश दिए। 
    प्रथम वर्ष में परियोजना की लागत 330 करोड़ रुपये थी, जिसमें से प्रदेश सरकार द्वारा 99 करोड़ रुपये का योगदान देना था, जबकि शेष 231 करोड़ रुपये केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा दिए जाने थे। वर्ष 2013-14 में 5.551 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता जारी की गई। वर्ष 2014-15 में केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रलाय द्वारा परियोजना के लिए 107 करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि वर्ष 2015-16 तथा 2016-17 में केन्द्र सरकार द्वारा क्रमशः 26 तथा 50 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। इस प्रकार परियोजना के कार्यान्वयन के लिए केन्द्रीय मंत्रालय द्वारा कुल 189.351 रुपये जारी किए गए हैं।
    प्रदेश सरकार ने मार्च, 2017 तक नाबार्ड से ऋण लेकर तथा अपने संसाधनों से 276 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अब जब स्वां नदी की 24 सहायक नदियों का कार्य जारी है, जिसको पूरा करने के लिए 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस परियोजना में 30 प्रतिशत से अधिक का योगदान दे चुकी है और केन्द्र सरकार से केन्द्र का हिस्सा जारी करने के लिए अगस्त 2015 से 11 बार पत्राचार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय को इस बारे तीन बार लिखा। इसके अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य सचिव स्तर पर आठ बार पत्राचार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार समझौते से पीछे हट रही है और तर्क दे रही है बाढ़ नियंत्रण के तहत 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार प्रदेश सरकार को अपने संसाधनों से प्रबन्ध करना होगा।
    हालांकि तटबंध की कुल लम्बाई लगभग 387.6 किलोमीटर है और 7164 हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ से बचाया जाना है। अभी तक केवल 162.36 किलोमीटर तटबंधों का निर्माण व 2884 हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ से बचाया गया है।
    मुख्यमंत्री ने कांगड़ा जिला की छोंछ नदी पर खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए, ताकि बाढ़ के दौरान अवैध खनन से क्षेत्र में जानमाल को कोई खतरा पैदा न हो।
    सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती विद्या स्टोक्स, अतिरिक्त मुख्य सचिव, श्री तरूण श्रीधर और श्री अरविन्द मेहता, प्रधान सचिव सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य श्रीमती अनुराधा ठाकुर, व सम्बन्धित विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
     
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