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  • वैज्ञानिकों का समर्पण व प्रयास हिमाचल को बनाएंगे जैविक राज्य- राज्यपाल
  • विधान सभा चुनावों की तैयारी के दृष्टिगत विभिन्न राजनीतिक दलों की बैठक आयोजित
  • सिंचाई नैटवर्क के विस्तार से होगी प्रदेश की आर्थिकी सुदृढ़
  • प्रदेश में शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुआ अभूतपूर्व विकासः मुख्यमंत्री
  • महिला एवं बाल विकास निदेशालय ने खोले चार शिशु पालना केन्द्र
  • चुनाव प्रक्र्रिया में लोगों को प्रेरित करने के लिए सैलिब्रेटियों से आमंत्रित किए जाएंगे सन्देश
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  • प्रदेश में शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुआ अभूतपूर्व विकासः मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने आज शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत चलाहल के दाड़गी में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोई भी समाज शिक्षा के बिना प्रगति व समृद्धि का लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता। इसी उददेश्य से मुख्यमंत्री ने स्वयं इन व्यापक क्षेत्रों को विशेष ध्यान दिया है।
    उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों विशेषकर लड़कियों को उनके घरद्वार के निकट उच्च शिक्षा सुनिश्चित बनाने के लिए प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में 16 हजार से अधिक पाठशालाएं तथा 136 राजकीय महाविद्यालय खोले हैं इससे प्रदेश की साक्षरता दर में बढ़ौतरी में सहायता मिली है तथा हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में अग्रीणी आंका गया है।
    उन्होंने कहा कि इसी प्रकार लोगों को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार ने अपने वर्तमान कार्यकाल के दौरान 230 स्वास्थ्य संस्थान खोले व स्तरोन्नत किए हैं। उन्होंने कहा कि यहीं नही चम्याणा में 290 करोड़ रूपये की लागत से सुपर स्पेशलिटी खण्ड खोला जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करना चाहते हैं तथा वर्तमान सरकार लोगों को उनके घरद्वार के निकट बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए वचनबद्ध है।
    मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य की सभी ग्राम पंचायतों को सड़क सुविधा उपलब्ध करवाने के प्रति वचनबद्ध है ताकि प्रदेश के सभी क्षेत्रों का तीव्र एवं समग्र विकास सुनिश्चित बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल के लगभग पांच वर्षों के दौरान राज्य में 2500 किलो मीटर नई सड़कें तथा लगभग 220 पुलों का निर्माण किया गया।
    शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में हुए विकास कार्यो की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधानसभा क्षेत्र में अभूपूतर्वक विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि लोगों की विकासात्मक जरूरतों व आशाओं के अनुसार गांव को सड़क सुविधा से जोड़ा गया और पेयजल सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ क्षेत्र में नए स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व व अन्य संस्थान खोले गए हैं।
    उन्होंने नगर (दाड़गी) में महाशीर हैचरी एवं कारप प्रजन्न इकाई की आधारशिला रखी। यह इकाई सैंज खड्ड पर 2.97 करोड़ रूपये की लागत से स्थापित की जाएगी। इस इकाई से तैयार किए गए बीज का संग्रहण कोल बांध में किया जाएगा। इससे प्रदेश के विभिन्न भागों से आने वाले मछुआरों के बीज की मांग को पूरा किया जा सकेगा।
    मुख्यमंत्री ने 2.44 करोड़ रूपये की लागत से आयोग गांव के लिए बनने वाले सम्पर्क सड़क की आधारशिला रखी। उन्होंने 2.50 करोड़ रूपये की लागत से वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दाड़गी के भवन व 1.80 करोड़ रू. की लागत से निर्मित पाठशाला के विज्ञान खण्ड का भी लोकार्पण किया। उन्होंने दाड़गी में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा नगर गांव से कलोह गांव को जोड़ने वाले पैदल पुल की भी आधारशिला रखी।
    मुख्यमंत्री ने नैहरा में 1.50 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का लोकार्पण तथा 2 करोड़ रूपये की लागत से मण्ढोड़घाट स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमि पाठशाला के भवन की आधारशिला तथा मण्ढोड़घाट में ही 1.43 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित होने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की आधारशिला रखी।
    मुख्यमंत्री ने सुन्नी में 3.50 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने 1.50 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित होने वाले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के भवन व खण्ड प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय की भी आधारशिला रखी।
    मुख्यमंत्री ने मुंगणा गांव के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत निर्मित सम्पर्क सड़क तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खैरा के भवन का भी लोकार्पण किया। इस भवन के निर्माण पर 1.20 करोड़ रूपये व्यय किए गए है। उन्होंने जैशी भराड़ा के लिए 80.95 लाख रूपये की लागत से निर्मित उठाऊ सिंचाई योजना का भी लोकार्पण किया।
    हिमाचल प्रदेश आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी संघ ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 59 हजार रूपये का चैक मुख्यमंत्री को भेंट किया।
    मुख्यमंत्री ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दाड़गी के विद्यार्थियों को सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 25 हजार रूपये प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने नेहरा तथा मण्ढोड़घाट में जनसभाओं को भी सम्बोधित किया व विभिन्न स्थानों पर लोगों की समस्याओं को भी सुना।
    राज्य युवा कांग्रेस के अध्यक्ष श्री विक्रमादित्य सिंह, जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती धर्मिला हरनोट, बीडीसी अध्यक्ष श्री प्रदीप वर्मा, खण्ड कांग्रेस अध्यक्ष श्री चन्द्रशेखर शर्मा, प्रधान ग्राम पंचायत दाड़गी श्री चीरंजी लाल व अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।  
     
     
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  • वैज्ञानिकों का समर्पण व प्रयास हिमाचल को बनाएंगे जैविक राज्य- राज्यपाल
    राज्यपाल आर्चाय देवव्रत ने हिमाचल प्रदेश को देश का शून्य बजट प्राकृतिक खेती राज्य बनाने के लिए प्रयास करने को कहा। उन्होंने कहा कि राज्य इन उत्पादों के लिए अपनी मण्डी विकसित करेगा ताकि किसानों को इन मण्डियों में उनके उत्पादों का लाभकारी मूल्य प्राप्त हो सके।
    राज्यपाल आज राष्ट्रीय पारिस्थितिकीय सोसायटी के हिमाचल चैप्टर द्वारा डॉक्टर वाई.एस परमार उद्यानिकी एवं वाणिकी विश्वविद्यालय नौणी सोलन के सहयोग से विश्वविद्यालय सभागृह में आयोजित किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैकल्पिक कृषि प्रणाली पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के अवसर पर बोल रहे थे।
    उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण के लिए स्वस्थ एवं उपयोगी है। उन्होंने कहा कि यह अति आवश्यक है कि रासायनिक खेती को प्राकृतिक खेती में बदला जाए ताकि भूमि की उर्वरकता में आ रही कमी व कृषि फसलों में रासायनिक खादों की भारी मात्रा के उपयोग से स्वास्थ्य समस्याओं को कम किया जा सके।
    उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने में वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है । उन्हांने कृषि वैज्ञानिकों से समर्पण की भावना से कार्य करने का आग्रह किया तथा कहा कि कृषि देश के लोगों की आर्थिकी की रीढ़ है।
    राज्यपाल ने कहा कि यदि वैज्ञानिक प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में कार्य करने के लिए समर्पित हों तो कोई भी प्रदेश को सिक्कम की तरह जैविक राज्य बनने से नहीं रोक सकता इससे रासायनिक खाद और कीटनाशक बेचने वाली कम्पनियों के एकाधिकारी पर भी रोक लग सकेगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती राष्ट्र को कृषि क्षेत्र में आत्म निर्भर बनाने के लिए बेहतर विकल्प है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पाद न केवल स्वस्थ जीवन में सहायता करते है अपितु पर्यावरण समृद्धि में भी सहायक है।
    राज्यपाल ने कहा कि पदम श्री डॉक्टर सुभाष पालेकर ने देश के किसानों का मार्गदर्शन कर उन्हें शून्य बजट प्राकृतिक खेती की अवधारणा दी जिसे देश के 40 लाख से अधिक किसानों ने अपनाया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक लोगों को लम्बे समय तक लाभान्वित करेगी और इस तकनीक को अपनाने वाले किसान अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त कर रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि एक स्थनीय गाय 30 एकड़ भूमि पर कृषि के लिए सहायक होगी और इससे भूमि की उर्वरकता बढ़ेगी और कम पानी के उपयोग से अधिकतम उपज प्राप्त होगी और किसान अपने उत्पादों का लाभदायक मूल्य प्राप्त कर सकेगे। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने निजी हितों से उपर उठकर कार्य करना चाहिए और अपने अनुसंधानों के दायरे को बदलना चाहिए और प्राकृतिक खेती पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए जिससे देश के किसानों की आय को दुगुना करने में सहायता मिलेगी।
    राज्यपाल ने डॉक्टर करतार सिंह को कृषि तथा बागवनी क्षेत्र में योगदान देने के लिए लाईफ टाईम अचीवमेंट पुरस्कार से भी सम्मानित किया।
    इसके उपरान्त राज्यपाल कार्यशाला के सत्र में भी शामिल हुए।
    पदम श्री डॉक्टर सुभाष पालेकर ने कृषि वैज्ञानिकों को कार्यशाला आयोजित करने को बधाई दी तथा कहा कि यह आज नितान्त आवश्यकता है कि विज्ञानिक किसानों को वैकल्पिक खेती उपलब्ध करवाएं, जिससे उनकी आय दुगुनी हो सके। उन्होंने कहा कि समाज के समक्ष खाद्य सुरक्षा, वैश्विक उष्मीकरण गांव से प्लायन तथा एकल परिवार के बढ़ने की चुनौती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अपनाएं जा रहे कृषि के ढंग वैश्विक उष्मीकरण के लिए जिम्मेवार है और सभी चुनौतियों को शून्य बजट प्राकृतिक खेती से सुलझाया जा सकता है और वैज्ञानिकों को इससे निपटने के लिए समाधान देने चाहिए।
    उन्होंने कहा कि हरित क्रान्ति व जैविक खेती उस समय की बेहतर विकल्प थी परन्तु आज प्राकृतिक खेती को अपना कर समाज को बचाया जा सकता है। उन्हांने कहा कि किसानों को महंगी रासायनिक खादों के उपयोग के बावजूद भी उनके उत्पादों के लाभदायिक मूल्य प्राप्त नहीं हो रहे है इसलिए वे आत्महत्या कर रहे है और आम लोग भी सब्जियों व खाद्य उत्पादों में इन घातक तत्वों का सेवन कर रहे है। उन्होंने प्रत्येक चुनौती का समाधान प्राकृतिक खेती को दिया।  
    बागवानी एवं वाणिकी विश्वविद्यालय नौणी सोलन के कुलपति डा0 एचसी शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा कहा कि फसलों की ऐसी नई प्रजातियां विकसित की जाएंगी, जिनके लिए कम पानी की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि हमें पौषक तत्वों से भरपूर जैविक स्त्रोंतो व केवल जैव-कीटनाशकों का उपयोग करना होगा।
    उन्होंने उच्च घन्तव पौधरोपण पर भी बल दिया और किसानों व बागवानों से फसल विविधिकरण अपनाने का आग्रह किया तथा कहा कि इससे बागवानों की आय दुगुनी होगी और वे उच्च उत्पाद तैयार करने के लक्षयों को प्राप्त करने में सफल होंगे और भूमि की उर्वरकता भी बढ़ेगी।
    अनुसंधान निदेशक व आयोजक समिति के अध्यक्ष डॉक्टर करतार सिंह वर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा कार्यशाला के दौरान आयोजित होने वाली गतिविधियों की जानकारी दी।
    भारतीय पारिस्थितिकीय सोसायटी के अध्यक्ष डा. अशोक धवन ने राज्यपाल का स्वागत किया और मिट्टी के स्वास्थ्य व कृषि क्षेत्र में जल संरक्षण के सुधार पर बल दिया।
    संयुक्त निदेशक अनुसंधान व आयोजिन समिति के सचिव डा0 राजेश्वर चन्देल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
                   
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  • पंचायत जन प्रतिनिधि तथा सरकारी कर्मचारी जमीनी स्तर तक पहुंचकर सरकार के कार्यक्रमों के प्रति लोगों को करें जागरूकः- मुख्यमंत्री
     
    पंचायत जन प्रतिनिधि व सरकारी कर्मचारी लोगों के बीच पहुंचकर सरकार द्वारा जन कल्याण के लिए कार्यान्वित की जा रही नीतियों व कार्यक्रमों के बारे जागरूक करें ताकि वर्तमान प्रदेश सरकार के शासनकाल के दौरान लोगों के कल्याण के लिए आरम्भ किए गए कार्यक्रमों व योजनाओं से लोग लाभान्वित हो सके।
    मुख्यमंत्री आज सोलन जिला के कुमारहट्टी में एक जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने 6 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित ग्राम पंचायत चेवा के कुमारहट्टी में बहुउद्ेशीय हॉल तथा खेल मैदान का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री के नाम पर बनाए गए इस परिसर का निर्माण विकास में जन सहयोग योजना के अन्तर्गत किया गया है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य के लोगों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करना होता है। उन्होंने कहा कि मुझे यह देखकर गर्व होता है कि हिमाचल प्रदेश बड़े राज्य की श्रेणी में उच्च शिक्षा क्षेत्र में श्रेष्ठ राज्य आंका गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं विशेषकर लड़कियों को उनके घरद्वार के निकट गुणात्मक शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार वचनबद्ध है तथा सरकार ने ‘बेटी है अनमोल’ येजना के अन्तर्गत गरीबी रेखा से नीचे जीवनयाप्न कर रहे परिवारों की लड़कियों को स्नातक स्तर व इसके समकक्ष पाठयक्रमों जिनमें इंजीनियरिगं स्नातक, बीटैक, एमबीबीएस, बीएड व एलएलबी कोर्स शामिल है को 5 हजार रूपये की वार्षिक छात्रवृति देने का निर्णय लिया गया है।
        उन्होंने कहा कि अनुबन्ध कर्मचारियों के ग्रेड-पे को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया गया है और दैनिक भोगियों की दिहाड़ी को भी 150 रूपये से बढ़ाकर 210 रूपये किया गया है इसके अतिरिक्त कर्मचारियों व पैंशनभोगियों को लाभान्वित करने के लिए कई निर्णय लिए गए है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पैंशन को 450 रू. से बढ़ाकर 700 रूपये किया गया है जिसका 3 लाख 90 हजार पात्र व्यक्ति लाभ लें रहे है।
    उन्होंने कहा कि आज सिरमौर जिला के धोलाकुंआ, मण्डी जिला के कमान्द में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान तथा ऊना जिला में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान     क्रियाशील बनाया गया है।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार बेरोज़गार युवाओं को बेरोज़गार भत्ता प्रदान कर रही है। बेरोजगार युवाओं की दक्षता तथा रोजगार उन्मुख अवसर बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा 500 करोड़ रूपये की कौशल विकास योजना आरम्भ की गई है।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य अधोसरंचना को सुदृढ़ करने के प्रति वचनबद्ध है तथा इसी उदेश्य से राज्य में तीन नए मैडिकल कॉलेज खोलने के अतिरिक्त मण्डी ईएसआईसी कॉलेज खोला गया है। प्रदेश सकरार ने बिलासपुर में एम्स के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध करवाई है तथा अब इसमें देरी केन्द्र सरकार की ओर से है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामले को शीघ्र सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि प्रदेश में और विशेषकर प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य उपकेन्द्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र जैसे अधिक स्वास्थ्य संस्थान खोले जाएं। उन्होंने कहा कि जब लोग स्वस्थ होंगे तो प्रदेश और अधिक उन्नित करेगा।
    श्री वीरभद्र सिंह ने 4 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित होने वाले कुष्ठ रोग अस्पताल लोहांजी के नए भवन की आधारशिला रखी। यह भवन प्री-फैबरीकेटिड ढांचे के रूप में बनाया जाएगा।
    उन्होंने धर्मपुर में 3.86 करोड़ रू. की लागत से निर्मित होने वाले खण्ड विकास अधिकारी कार्यालय भवन तथा 34 लाख रूपये की लागत से सुलतानपुर मड़ीघाट डिलमन पर कांगर पुल की भी आधारशिला रखी ।
    मुख्यमंत्री ने 1.47 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित क्यिरूवा-जनदोरी उठाऊ पेयजल योजना तथा गांधीग्राम में 5 करोड़ रूपये की लागत से स्थापित 33 केवी विद्युत उप केन्द्र का भी लोकार्पण किया।
    उन्होंने प्राथमिक पाठशाला दभोग को माध्यमिक पाठशाला में स्रोन्नत करने की भी घोषणा की।
    राज्य युवा कॉग्रेस के अध्यक्ष श्री विक्रमादित्य सिंह ने जनसभा को सम्बोधित करते हुए पंचायत सदस्यों को एक वर्ष के भीतर बहुउदे्शीय परिसर का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में खेल अधोसंरचना सुदृढ़ करने के प्रति वचनबद्ध है और प्रदेश सरकार राज्य का नाम रोशन कर रहे है खिलाड़ियों को सहायता प्रदान कर रही है। पिछले दिनों अर्न्तराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी सुषमा वर्मा तथा नालागढ़ के दीपक ठाकुर को पुलिस विभाग में पुलिस उप-अधीक्षक की नियुक्ति दी गई है। उन्होंने सरकारी क्षेत्र में राष्ट्रीय तथा अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे है अन्य खिलाड़ियों को रोजगार देने का भी आश्वासन दिया।
     
     
     
    खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश चौहान ने मुख्यमंत्री का उनके गृह पंचायत चेवा में पधारने पर स्वागत किया। उन्होंने मुख्यमंत्री का ‘विकास में जन सहयोग’ के अन्तर्गत निर्मित बहुउद्ेशीय आंतरिक परिसर का लोकर्पण करने के लिए आभार व्यक्त किया।
     राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष गंगू राम मुसाफिर, जिला कांग्रेस समिति सोलन के अध्यक्ष राहुल ठाकुर, हि.प्र कांग्रेस समिति के महासचिव विनोद सुल्तानपुरी सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हरदीप बावा, जिला परिषद के अध्यक्ष श्री धर्मपाल चौहान, हि.प्र. पर्यटन विकास निगम के निदेशक मण्डल के सदस्य सुरेन्द्र सेठी, एपीएमसी के अध्यक्ष रमेश ठाकुर, जोगेन्द्रा बैंक के अध्यक्ष मोहन मैहता, ग्राम पंचायत चेवा की प्रधान चित्रलेख के अलावा अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।
     
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  • मुख्यमंत्री ने परवाणु में झुग्गी-झोंपड़ी निवासियों को सौंपी फ्लैटों की चाबियां
    मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने आज सोलन जिला के परवाणु में इंटीग्रेटेड हाउसिंग एवं झुग्गी विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों के लिए निर्मित किए गए फ्लैटों की चाबियां वितरित की। फ्लैटों के निर्माण पर 15 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि झुग्गी निवासियों के स्थाई जीवन के लिए उनका पुनर्वास करना आवश्यक है। जैसा की परवाणु, हिमाचल के लिए प्रवेश द्वार है, इसलिये शहर को आंगतुकों के लिये एक स्वच्छ छवि देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आजकल झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि शहरी क्षेत्रों में बेहतर सम्भावनाएं तलाशने के लिए प्रवासियों ने आमतौर पर अपने गांवों का त्याग कर दिया है। उन्होंने कहा कि इन बस्तियों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है और इन लोगों का भूमि अथवा संपति पर कोई दावा नहीं है।
    भारतीय शहरों के विस्तार से मलिन बस्तियों को खाली करना तथा इनके विध्वंस में वृद्धि हुई है और समार्ट शहर मिशन कार्यक्रमों के अन्तर्गत इनके संवारने का कार्य किया जा रहा है, जिसका लक्ष्य जीवन स्तर में सुधार के लिये केन्द्रों का सृजन करना है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करने के लिए झोंपड़ी-विसयों के लिए आवास की सुवधिओं के सृजन की पहल एक सराहनीय कदम है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक सड़कों के लिए एक करोड़ रुपये की राशि जल्द ही हस्तांतरित की जाएगी।
    उन्हांंने फहड़ी वालों (स्ट्रीट वेन्डर्ज) के लिए 200 बूथों (कियोस्क) की भी आधारशिला रखी जिसके निर्माण पर 6.30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने 88 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले हिमुडा के दो वाणिज्यिक परिसरों की भी आधारशिला रखी।
     
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  • मुख्यमंत्री ने नौतोड़ मामलों को तत्काल निपटाने के दिए निर्देश
    मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने ‘नौतोड़’ के मामलों को बिना किसी विलम्ब के निपटाने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समय की कमी के कारण अधिकारियों को मौके पर जाकर दी गई समय सीमा के भीतर ‘नौतोड़’ की स्वीकृतियां निपटानी चाहिए तथा इस सम्बन्ध में किसी भी तरह की कोताही बर्दाशत नहीं की जाएगी।
    मुख्यमंत्री आज यहां जनजातीय सलाहकार परिषद की 46वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
    उन्होंने कहा कि नौतोड़ में रियायत वन संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत एक सीमित अवधि के लिए प्रदान की गई थी तथा सभी उपायुक्तों को बिना किसी विलम्ब से नौतोड़ प्रदान करने की प्रक्रिया को सुनिश्चित बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को उपदान पर ईमारती लकड़ी उपलब्ध करवा रही है, जिसमें ईमारती लकड़ी की वास्तविक मूल्य पर 76.26 प्रतिशत के अनुदान के अतिरिक्त 80 प्रतिशत परिवहन उपदान भी शामिल है।
    बैठक में लंगछा पंचायत के कॉमिक गौम्पा में ईमारती लकड़ी का डिपों खोलने का निर्णय भी लिया गया।
    मुख्यमंत्री ने रूकटी पॉवर हाउस की अक्रियशीलता का संज्ञान लेते हुए कहा कि इस परियोजना के जीर्णोद्वार तथा मशीनरी व उपकरणों पर काफी धनराशि खर्च की जा चुकी है तथा उन्होंने निर्देश दिए कि इसे बिना किसी देरी से कार्यशील बनाया जाए।
    बैठक में किन्नौर के लोगों को द्वि-मासिक विद्युत बिल प्रदान करने का भी निर्णय लिया गया है तथा जिला किन्नौर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों को पक्का करने के कार्य में तेजी लोने के भी निर्देश दिए।
    बैठक में जिला लाहौल स्पिति के उदयपुर मण्डल के अन्तर्गत चनाब घाटी में लोक निर्माण विभाग को अतिरिक्त मशीनरी उपलब्ध करवाने का भी आश्वासन दिया गया।
    बैठक में सदस्यों द्वारा काजा के लोगों की मांग रखने पर निर्णय लिया गया कि काजा के अतिरिक्त उपायुक्त को आपदा प्रबन्धन के लिए उपायुक्त लाहौल स्पिति के माध्यम से प्रदान करने के बजाए सीधे तौर पर बजट उपलब्ध करवाया जाए।
    बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आईटीआई उदयपुर के प्रधानाचार्य का कार्यभार उपमण्डलाधिकारी उदयपुर को सौंपा जाए, क्योंकि वर्तमान में यह कार्यभार जिला कुल्लू के आईटीआई शमशी के प्रधानाचार्य के पास है।
    बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि क्षेत्रीय अस्पताल रिकॉगपियो तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र काजा को रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध करवाया जाए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में विकास के अनेक कार्य को अमलीजामा पहनाया गया है। उन्होंने कहा कि प्लान हैड के अन्तर्गत 1770 करोड़ रू. तथा गैर योजना घटक के अन्तर्गत 2048 करोड़ रू. खर्च किए गए है इसके अतिरिक्त वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान सड़कों व पुलों की मुरम्मत के लिए 658 लाख रू. की राशि जारी की गई है।
    भरमौर विधानसभा क्षेत्र से प्रतिनिधित्व कर रहे वन मंत्री की मांग पर निर्णय लिया गया कि पांगी तथा भरमौर क्षेत्र के नौ रूटों पर मिनी बसें चलाई जाए।
    बैठक में यह भी बताया गया कि केलॉग स्थित हिमाचल पथ परिवहन निगम के डिपू को 14 बसें आबंटित की गई है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि लगातार भू-स्खलन से प्रभावित काजा के माना गांव के नालों के तटीकरण के लिए धनराशि उपलब्ध करवाई जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि भूगर्भीय सर्वेक्षण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है और उसकी सिफारिशों के अनुसार जानमाल की हानि से बचने के लिए रोकने के लिए आवश्यक पग उठाए जाएंगे।       
    बैठक में बताया गया कि डीएफओ लाहौलघाटी विशेषकर मयाद तथा तिंगरिट क्षेत्र में ईको पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्थान का चयन कर कार्य योजना बनाए। बैठक में लाहौल में चिन्हित स्थल पर विपणन मण्डी का निर्माण कार्य तत्काल आरम्भ करने के भी निर्देश दिए।
    बैठक में काजा-ग्राम्फु सड़क जो दयनीय स्थिति में है की मुरम्मत के बारे भी चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त लाहौल के यांगला पुल के कार्य पर भी चर्चा की गई।
    बैठक में बताया गया कि मुध-भावा सड़क के लिए वन्य जीव प्राधिकरण से वन स्वीकृति प्राप्त कर दी गई है तथा एफसीए के समक्ष इस मामले में तेजी लाई जा रही है।   
    मुख्य सचिव श्री वी.सी. फारका ने कार्यवाही का संचालन किया।
    वन मंत्री श्री ठाकुर सिंह भरमौरी, विधानसभा के उपाध्यक्ष श्री जगत सिंह नेगी, लाहौल स्पिति के विधायक रवि ठाकुर तथा जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य व अन्य बैठक में उपस्थित थे।
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  • प्राथमिक पाठशालाओं में छोटे बच्चों के लिए प्री-नर्सरी कक्षाएंः-मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने प्राथमिक पाठशालाओं के सुदृढ़ीकरण तथा  छोटे बच्चों के लिए प्राथमिक पाठशालाओं में प्री-नर्सरी कक्षाओं को आरम्भ करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री आज यहां सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) तथा राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) की चौथी शासकीय परिषद बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
    उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग सभी जिला मुख्यालयों तथा उप मण्डल स्तर पर ऐसी प्राथमिक पाठशालाओं को चिन्हित करें जहां प्री-नर्सरी कक्षाएं आरम्भ की जा सके। प्रारम्भिक चरण में कुछ चयनित पाठशालाओं में यह कक्षाएं आरम्भ की जाएंगी। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा प्रणाली के मूल्यांकन की आज नितान्त आवश्यकता है तथा सरकार इन प्राथमिक पाठशालाओं में विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर सभी कक्षाओं के लिए एक शिक्षक नियुक्त करने का विचार कर रही है। इससे बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान होगी तथा शिक्षकों को कक्षा में अध्यापन के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राथमिक पाठशालाएं केवल आवश्यकता के आधार पर ही खोली जाएंगी तथा प्रदेश में वर्तमान में पर्याप्त पाठशालाएं खोली गई है और अब इनके सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता है।
    श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि अध्यापन केवल पेशा ही नहीं बल्कि एक मिशन है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को प्राथमिक पाठशालाओं में पढ़ने वाले बच्चों के लिए अधिक समय प्रदान करना चाहिए ।
    मुख्यमंत्री ने शिक्षा में सीखने के स्तर तथा शिक्षा की गुणवत्ता में बढ़ौतरी लाने के लिए सुनियोजित सुधारों के लिए ‘प्रेरणा’ तथा ‘प्रयास’ योजनाओं की सराहना की।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रदेश के सभी छात्र को उनके घरद्वार के समीप गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए बचनबद्ध है तथा वर्तमान सरकार के कार्यकाल के लगभग 5 सालों में 54 कॉलेज खोले गए हैं जिससे प्रदेश में अधिसूचित कॉलेजों की संख्या 132 हो गई है तथा दो अन्य कॉलेजों की अधिसूचना भी शीघ्र जारी की जाएगी।
    इस अवसर पर उपमण्डलाधिकारी नालागढ़ श्री आशुतोश गर्ग ने प्रस्तुती दी। उन्होंने कहा कि नालागढ़ उपमण्डल की राजकीय पाठशालाओं में से 11वीं तथा 12वीं कक्षा के 62 चयनित विद्यार्थियों को ‘इन्डैग रबड़ लिमिटेड’ के द्वारा प्रायोजित इंजीनियरिंग तथा मैडिकल प्रवेश परीक्षाओं की वीकैन्ड कोचिंग प्रदान की गई। ये विद्यार्थी इस तरह की कोचिंग पाने में आर्थिक रूप से असमर्थ थे।
    मुख्यमंत्री ने 34 पाठशालाओं को उनके संस्थानों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए ‘स्वच्छता पुरस्कार’ भी प्रदान किए।
    हिमाचल प्रदेश राज्य शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष श्री बलवीर टेगटा, प्रधान सचिव शिक्षा श्री संजय गुप्ता, उच्च शिक्षा निदेशक श्री बी.एल.बिन्टा, एसएसए तथा आरएमएसए के राज्य परियोजना निदेशक श्री घनश्याम, प्रारम्भिक शिक्षा के निदेशक श्री मनमहोन शर्मा तथा शासकीय परिषद के सदस्य भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
     
     
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