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  • राज्यपाल ने भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा सेवा के परिविक्षाधीन अधिकारियों से किया संवाद
  • मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री से की भेंट
  • राजस्व मंत्री ने एफआरए के मामलों में तेजी लाने के दिए निर्देश
  • केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात रही सकारात्मक: मुख्यमंत्री
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  • भारत भ्रमण से लौटे ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ ने मुख्यमंत्री से की भेंट, कहा थैंक्यू सर
    यात्रा के अनुभव मुख्यमंत्री से किये साझा
    परिवार की तरह किया जा रहा है ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का पालन पोषण: मुख्यमंत्री
     
    भारत भ्रमण से लौटे ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ ने आज ओक ओवर, शिमला में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भेंट की और स्नेह के साथ अपनी यात्रा के अनुभव उनसे साझा किये। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि यह यादगार अनुभव उन्हें आजीवन याद रहेगा।
    मुख्यमंत्री ने बच्चों से पूछा कि वे गोवा में कितने दिन रहे, क्या क्रूज की सैर की और समन्दर के किनारे जाने पर कैसा प्रतीत हुआ? उन्होंने पूछा कि हवाई जहाज का अनुभव कैसा रहा और हवाई जहाज में जाने से पहले बोर्डिंग पास कैसे बनता है? आगरा घूमकर उन्हें कैसा लगा और इस यात्रा के दौरान उन्होंने क्या-क्या नई चीजें सीखीं?
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ से कहा कि यात्रा के अनुभव से मनोरंजन के साथ ज्ञानार्जन भी होता है। उन्होंने बच्चों से अपने अनुभवों को जीवन के लिए प्ररेणास्रोत के रूप में अपनाने का आग्रह किया।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना केवल सरकारी योजना ही नहीं है बल्कि ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के सपनों को साकार करने की पहल है। उन्होंने बच्चों को बताया कि बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें सरकार द्वारा उच्च अध्ययन के लिए कोचिंग भी करवाई जाएगी तथा उच्च शिक्षा प्राप्त करने का खर्चा भी सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन बच्चों के माता-पिता नहीं हैं, सरकार ही उनकी माता-पिता है। इनका पालन पोषण परिवार की तरह किया जा रहा है। इन्हें विभिन्न प्रकार के अनुभव प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत राज्य सरकार इन बच्चों को केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक अवसर भी प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की सम्पदा पर इन बच्चों का भी अधिकार है। प्रदेश सरकार राज्य की सम्पदा को वंचित वर्ग के कल्याण के लिए इस्तेमाल कर रही है। इस यात्रा का उद्देश्य बच्चों को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक संस्थानों से परिचित करवाना है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण बच्चों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा, देश की विविधता के प्रति समझ और सामाजिक चेतना विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बच्चों की यात्रा पर आधारित ‘सपनों की उड़ान’ पुस्तिका का विमोचन भी किया।  
    बच्चों के भारत भ्रमण पर आधारित लघु वृत्तचित्र भी इस अवसर पर प्रस्तुत किया गया।
    उन्होंने मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत सराहन, टूटीकंडी और मशोबरा स्थित बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को एक विशेष शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भारत भ्रमण पर 6 जनवरी, 2026 को शिमला से रवाना किया था।
    इस भ्रमण में कुल 52 बच्चों ने भाग लिया, जिसके दौरान बच्चों ने देश के विभिन्न प्रमुख शहरों और ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक स्थलों का भ्रमण किया।
    यात्रा कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों ने चंडीगढ़दृदिल्लीदृआगरादृगोवादृचंडीगढ़ का भ्रमण किया। इस दौरान बच्चों ने विभिन्न आधुनिक परिवहन साधनों का अनुभव भी प्राप्त किया, जिनमें वोल्वो बस, वंदे भारत एक्सप्रेस रेलगाड़ी, मेट्रो रेल सेवा, हवाई यात्रा, क्रूज यात्रा तथा हॉप-ऑन हॉप-ऑफ पर्यटन बस शामिल हैं।
    दिल्ली में बच्चों ने लाल क़िला, कु़तुब मीनार, इंडिया गेट, राजघाट, शक्ति स्थल, वीर भूमि, हुमायूं का मक़बरा, राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स, त्रिवेणी कला संगम तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय का भ्रमण किया। इसके अलावा, उन्होंने आगरा में ताजमहल भी देखा।
    गोवा प्रवास के दौरान बच्चों ने उत्तर गोवा के कलंगुट, फोर्ट अगुआड़ा, अंजुना बीच, डोना पाउला, भारतीय समुद्र विज्ञान संस्थान एवं क्रूज यात्रा की, जबकि दक्षिण गोवा में चर्च, मंगेशी मंदिर, वार्का बीच, पणजी शहर और स्पाइस गार्डन का आनंद भी लिया।
    महाधिवक्ता अनूप रतन, विधायक विवेक शर्मा, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी और अन्य गणमान्य इस अवसर पर उपस्थित थे।
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  • मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री से की भेंट
    पीक सीज़न के दौरान सेब आयात पर प्रतिबंध लगाने का किया आग्रह 
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार सायं नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से भेंट की और सेब उत्पादन के पीक सीज़न (जुलाई से नवंबर) के दौरान सेब आयात पर प्रतिबंध लगाने का पुरजोर आग्रह किया। उन्होंने सेब पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का भी आग्रह किया ताकि विदेशी सेब के आयात से राज्य के बागवानों को हानि न हो।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 2.5 लाख किसान सेब उत्पादन से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के कुल फल उत्पादन में सेब का योगदान लगभग 80 प्रतिशत है। सेब उत्पादन से सालाना लगभग 4500 करोड़ रुपये की आय होती है। उन्होंने प्रदेश के बागवानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप का आग्रह किया।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले सप्ताह प्रदेश के बागवानों ने उनके समक्ष अपनी  समस्याएं रखी थी जिन्हें उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंनं इस मामले को कंेद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष भी रखा और बागवानों के हित में शीघ्र उचित कार्यवाही का आग्रह किया।
    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को सेब पर आयात शुल्क कम किए जाने से बागवानों को हो रही हानि के बारे में भी अवगत करवाया। उन्होंने कहा की पिछले दस वर्षों में सेब आयात में लगभग ढाई गुणा वृद्धि हुई है और मुक्त व्यापार समझौतों के कारण इसमें और वृद्धि हो सकती है। 
    उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड से सेब आयात अधिकतम अप्रैल से अगस्त के दौरान होता हैै और इस समय आयात शुल्क 25 प्रतिशत तय किया गया है, जबकि अन्य महीनों में पूर्व की तरह 50 प्रतिशत शुल्क लागू रहता है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों से न केवल सेब सीज़न के दौरान बागवान प्रभावित होगें, बल्कि राज्य में कोल्ड स्टोरेज में रखे सेबों की कीमतों और ऑफ-सीज़न कारोबार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
    मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी बैठक में उपस्थित थे।
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  • राज्यपाल ने भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा सेवा के परिविक्षाधीन अधिकारियों से किया संवाद
    राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज लोक भवन में भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा (आईए एंड एएएस) 2025 बैच के परिविक्षाधीन अधिकारियों के साथ संवाद किया। 
    संवाद के दौरान राज्यपाल ने लोक सेवा, जवाबदेही तथा शासन में सत्यनिष्ठा के महत्त्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने युवा अधिकारियों को कर्त्तव्यों के निर्वहन में दक्षता, पारदर्शिता और नैतिक आचरण को धारण करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने और सार्वजनिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने में लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।
    इस अवसर पर परिविक्षाधीन अधिकारियों ने भी राज्यपाल के साथ अपने अनुभव साझा किए।
    इससे पूर्व, उन्होंने लोकभवन का भ्रमण कर इसके ऐतिहासिक महत्त्व, वास्तुकला धरोहर और कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त की। 
    इस अवसर पर लेडी गवर्नर जानकी शुक्ला भी उपस्थित थीं। 
    इससे पूर्व, राष्ट्रीय लेखा परीक्षा एवं लेखा अकादमी के महानिदेशक एस. आलोक ने राज्यपाल को सम्मानित किया। 
    इस अवसर पर प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) सुशील कुमार ठाकुर, राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा तथा निदेशक पुष्पलता भी उपस्थित थे। 
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  • मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से भेंट की
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से भेंट की। 
    मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से हिमाचल प्रदेश से जुड़ी परियोजनाओं से संबंधित मुद्दों को केन्द्र सरकार के समक्ष रखने तथा प्रदेश के विकास में सहयोग का आग्रह किया। 
    मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के दृष्टिगत केन्द्रीय मंत्री से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास से जुड़ी परियोजनाओं सहित आयुष्मान भारत योजना में केन्द्रीय सहयोग का आग्रह किया। 
    जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। 
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  • मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से भेंट कर हिमाचल के लिए वित्तीय सहायता का किया अनुरोध
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से शिष्टाचार भेंट की।
    बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ राज्य की वित्तीय स्थिति पर चर्चा की और हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार से उदार सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री को 16वें वित्त आयोग को प्रस्तुत किए गए ज्ञापन एवं अतिरिक्त ज्ञापन की जानकारी दी। उन्होंने राजस्व घाटा अनुदान को न्यूनतम 10,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित किए जाने का आग्रह किया। उन्होंने 16वें वित्त आयोग के अवार्ड पीरियड के दौरान राज्यों के राजस्व एवं व्यय अनुमानों के यथार्थवादी आकलन पर बल दिया।
    मुख्यमंत्री ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग से एक ‘ग्रीन फंड’ के गठन की पैरवी करते हुए कहा कि इसमें प्रतिवर्ष 50,000 करोड़ रुपये का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य देश की ‘ग्रीन फ्रंटियर्स’ हैं और उनकी पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने होरिजेंटल डिवेल्यूवेशन के लिए राज्य द्वारा प्रस्तावित संशोधित फार्मूले की जानकारी भी दी, इसमें वन एवं वनों पर आधारित पारिस्थितिकी के मानदंड का विशेष ध्यान रखने की मांग की गई है। उन्होंने आग्रह किया कि हिमाच्छादित एवं शीत मरुस्थलीय क्षेत्रों को भी अधिक सघन एवं मध्यम सघन वनों के साथ शामिल किया जाए, क्योंकि सह अस्तित्व को प्रदर्शित करते हैं। 
    मुख्यमंत्री ने 15वें वित्त आयोग द्वारा विकसित आपदा जोखिम सूचकांक को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की तुलना देश के अन्य क्षेत्रों से नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के बावजूद राज्य को आपदा राहत के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने विशिष्ट संकेतकों को ध्यान में रखते हुए पहाड़ी राज्यों के लिए अलग डीआरआई तथा पृथक आवंटन की मांग की।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से राज्य को अतिरिक्त सहयोग देने का अनुरोध किया और राजस्व घाटा अनुदान में पिछले कुछ वर्षों में आई भारी कमी के कारण राज्य की वित्तीय क्षमता पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव का उल्लेख करते हुए जीएसडीपी का अतिरिक्त दो प्रतिशत उधार लेने की अनुमति देने की मांग की।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर तथा प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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  • पूर्व सैनिकों का अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सेवाभाव समाज के लिए आदर्श: राज्यपाल
    राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि पूर्व सैनिक अपने सेवा काल के उपरांत भी राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दे रहे हैं। उनका अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सेवाभाव युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
    राज्यपाल ने आज हमीरपुर जिला के सुजानपुर में पूर्व सैनिक लीग सुजानपुर और सर्व कल्याणकारी ट्रस्ट द्वारा आयोजित सेना दिवस एवं वार्षिक समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया।
    सेना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि 15 जनवरी भारतीय सेना के अदम्य साहस, अनुशासन और देशभक्ति की याद दिलाता है। देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाले वीरों और परिजनों को कृतज्ञ राष्ट्र नमन करता है। भारतीय सेना केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की प्रहरी है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विषम हालात में देश सेवा करते हुए सैनिक राष्ट्रीय गौरव को बनाए रखते हैं और उनका बलिदान व समर्पण पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
    राज्यपाल ने पूर्व सैनिक लीग जैसे संगठनों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के संगठन सैनिकों के मूल्यों और अनुभवों को समाज से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। सर्व कल्याणकारी ट्रस्ट की निरंतर समाज सेवा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ट्रस्ट द्वारा गरीबों व जरूरतमंदों के कल्याण के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर, दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं, महिला सशक्तिकरण, वंचित परिवारों को सहायता तथा आपदा की स्थिति में निःस्वार्थ सेवा जैसे सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेना दिवस पर हर वर्ष भारतीय सेना, पूर्व सैनिकों, शहीदों के परिवारों और वीर नारियों को सम्मानित करने वाले कार्यक्रम राष्ट्र के कृतज्ञ भाव को सुदृढ़ करते हैं। 
    सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने वन रैंक वन पेंशन लागू करने, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के निर्माण, रक्षा पेंशन प्रणाली के सरलीकरण, पूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा वीर नारियों और आश्रितों के लिए कल्याणकारी योजनाओं जैसे कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत सेना ही सुरक्षित भारत की नींव है।
    आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में बढ़ते स्वदेशीकरण से सशस्त्र बल सशक्त हो रहे हैं और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य अभियानों ने सशस्त्र बलों के प्रति जनविश्वास को और मजबूत किया है तथा शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुरक्षा और गरिमा से समझौता किए बिना दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने युवाओं से सैनिकों के अनुशासित जीवन और सपर्मण भाव से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। 
    पूर्व सैनिकों द्वारा प्रभावशाली मार्च-पास्ट की राज्यपाल ने सलामी ली। जिले से पूर्व सैनिकों की आठ टुकड़ियों ने परेड में भाग लिया। इस अवसर पर राजस्थान से आए कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।
    राज्यपाल ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले व्यक्तियों को ‘शाने हिमाचल’ पुरस्कार से सम्मानित किया तथा ‘शाने हिंद’ पुरस्कार भी प्रदान किए।
    इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह तथा लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) बी.एस. जसवाल ने भी संबोधित किया।
    ट्रस्ट के अध्यक्ष अभिषेक राणा ने राज्यपाल का स्वागत किया और संगठन की गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
    इस अवसर पर विधायकगण, राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा, पूर्व विधायकगण तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। 
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