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  • मुख्यमंत्री ने ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को शैक्षणिक भ्रमण पर किया रवाना
  • मुख्यमंत्री ने ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को शैक्षणिक भ्रमण पर किया रवाना
  • एचपीएसइबीएल में डिजिटल सुधारों से राज्य को 16.83 करोड़ रुपये की बचत: मुख्यमंत्री
  • उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी द्वारा शिमला से 6 जनवरी, 2026 को जारी प्रेस वक्तव्य
  • मुख्यमंत्री ने राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक का कैलेंडर जारी किया
  • चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए सीनियर रेजिडेंटशिप पॉलिसी बनाई जाएगी: मुख्यमंत्री
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  • चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए सीनियर रेजिडेंटशिप पॉलिसी बनाई जाएगी: मुख्यमंत्री
    चिकित्सा महाविद्यालयों में एमडी-एमएस के नए विषय होंगे शुरू
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां स्वास्थ्य शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए सीनियर रेजिडेंटशिप पॉलिसी बनाई जाएगी। इस पॉलिसी के तहत सीनियर रेजिडेंट के पदों का युक्तिकरण किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सीनियर रेजिडेंटशिप में जीडीओ का कोटा 66 प्रतिशत किया जाएगा। अभी इसका अनुपात जीडीओ व सीधी भर्ती द्वारा पचास-पचास प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय चम्बा, नाहन, हमीरपुर व नेरचौक में नए विषयों में एमडी व एमएस करवाई जाएगी। इससे 
    स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत संरचना और सुदृढ़ होगी।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जो डीएम और एमसीएच सुपरस्पेशलिस्ट फील्ड में हैं उन्हें चिकित्सा महाविद्यालय में नियुक्ति प्रदान की जाएगी। सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में उच्च तकनीकयुक्त स्टेट-ऑफ-द-आर्ट आईसीयू स्थापित किये जाएंगे।
    उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में 1000 रोगी मित्र नियुक्त किये जाएंगे, जिसमें से 500 चिकित्सा महाविद्यालयों और 500 अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात किये जाएंगे। इसके लिए प्रथम चरण में पायलट प्रोजेक्ट हमीरपुर जिला से शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रोगी मित्र की कार्यप्रणाली के लिए विभाग द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रथम चरण में रोगी मित्र प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में तैनात किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि चमियाणा अस्पताल, चिकित्सा महाविद्यालय टांडा व आईजीएमसी शिमला में भी पायलट आधार पर 70 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों की मदद के लिए रोगी मित्र तैनात किये जाएंगे। इन संस्थानों में रोगी मित्र कांऊटर भी स्थापित किये जाएंगे।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय की विभिन्न ओपीडी में मरीजों से सम्बन्धित विभिन्न डेटा दर्ज करने के लिए डाटा एंट्री ऑपरेटर भी तैनात किये जाएंगे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य शिक्षा को सशक्त करने के लिए नवोन्मेषी उपायों के साथ-साथ दीर्घकालिक योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं ताकि इस क्षेत्र में प्रदेश, देश का अग्रणी राज्य बने।
    बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकर (नवीनीकरण, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस) गोकुल बुटेल, सचिव स्वास्थ्य प्रियंका बासु इंगटी, विशेष सचिव स्वास्थ्य अश्वनी शर्मा एवं जितेन्द्र सांजटा, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य गोपाल बेरी और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 
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  • मुख्यमंत्री ने राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक का कैलेंडर जारी किया
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक का वार्षिक कैलेंडर-2026 जारी किया।
    इस अवसर पर बैंक के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को बैंक की विभिन्न गतिविधियों और योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष में सरकार के निर्देशों के अनुसार पात्र लोगों को ऋण मुहैया करवाया गया।
    इस अवसर पर बैंक के प्रबन्ध निदेशक हरीश गज्जू और महाप्रबन्धक आर.एम. झमाल्टा उपस्थित थे।
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  • एचपीएसइबीएल में डिजिटल सुधारों से राज्य को 16.83 करोड़ रुपये की बचत: मुख्यमंत्री
    बिलिंग एवं ईआरपी सेवाओं पर खर्च में 46 प्रतिशत कमी, 29 लाख उपभोक्ता होंगे डिजिटल सेवाओं से लाभान्वित
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा राज्य विद्युत् बोर्ड लिमेटिड (एचपीएसइबीएल) में कई डिजिटल और प्रशासनिक सुधार किए गए हैं जो राज्य सरकार की व्यवस्था परिवर्तन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रदेश सरकार पारदर्शी ख़रीद प्रक्रिया, तकनीकी आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देकर न केवल उपभोक्ता सेवाओं में सुधार कर रही है बल्कि वित्तीय अनुशासन की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। 
    उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार का उद्देश्य न केवल पुरानी व्यवस्थाओं में सुधार, बल्कि इन्हें और अधिक प्रभावशाली बनाना है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी ख़रीद प्रक्रिया अपनाने और मंहगी आउटसोर्सिंग पर निर्भरता कम करने से एचपीएसइबीएल के बिजली बिलिंग और एंटरप्राइज रिर्सोस प्लानिंग (इआरपी) सहायता सेवाओं पर होने वाला खर्च 46 प्रतिशत तक कम हुआ है। इन सेवाओं पर वार्षिक खर्च 12.29 करोड़ रुपये से घटकर 6.68 करोड़ रुपये रह गया है।
    इन सुधारों से प्रतिवर्ष लगभग 5.61 करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी, जिससे तीन वर्षों में कुल 16.83 करोड़ रुपये का लाभ होगा। इस राशि का उपयोग जन कल्याणकारी कार्यों और आवश्यक सेवाओं को सुदृढ़ करने में किया जाएगा। 
    इज़ ऑफ लिविंग पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एचपीएसइबीएल का डिजिटलीकरण राज्य के लगभग 29 लाख घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने कहा कि नए बिजली कनैक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन, स्मार्ट बिलिंग, प्रीपेड सेवाएं, ऑनलाइन बिल भुगतान और डिजिटल शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं से प्रक्रियागत देरी कम हुई है और उपभोक्ताओं को पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उपभोक्ता सेवाओं को सशक्त बनाने और कार्य क्षमता को बढ़ाने के लिए एचपीएसइबीएल में एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार एग्रीगेट टेक्नीकल और कमर्शियल (एटीएंडसी) हानि को कम करने, स्मार्ट और प्रीपेड मीट्रिंग के माध्यम से समय पर बिलिंग और राजस्व वसूली सुनिश्चित करने, राजस्व घाटा कम करने तथा परिचालन व्यय के युक्तिकरण पर विशेष बल दे रही है। 
    उन्होंने कहा कि बेहतर बिजली ख़रीद योजना, डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया और बिज़नेस इंटेलीजेंस (बीआई) जैसे आधुनिक तकनीकी प्लेटफोर्म के एकीकरण से बोर्ड की वित्तीय स्थिरता और अधिक मजबूत होगी तथा प्रदेश में निर्बाध और गणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन का उद्देश्य संस्थानों को आत्मनिर्भर, जवाबदेही और तकनीक आधारित बनाना है ताकि वर्ष 2027 तक एक आधुनिक और आत्मनिर्भर हिमाचल की मजबूत नींव रखी जा सके।
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  • मुख्यमंत्री ने ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को शैक्षणिक भ्रमण पर किया रवाना
    बच्चे प्रमुख शहरों, ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक स्थलों का करेंगे दौरा
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज सुबह हिमाचल प्रदेश सचिवालय से मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत राज्य के चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस (सीसीआई), सराहन, टूटीकंडी और मशोबरा में रहने वाले ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को एक विशेष शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण पर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी बच्चों से संवाद किया और उनसे भ्रमण का भरपूर आनंद लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान उन्हें ज्ञान अर्जन और विभिन्न विषयों को जानने व समझने के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे।
    इस भ्रमण में प्रदेश के इन तीन बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे कुल 52 बच्चे भाग ले रहे हैं। यह भ्रमण कार्यक्रम 15 जनवरी, 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसके दौरान बच्चे देश के विभिन्न प्रमुख शहरों और ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक स्थलों का भ्रमण करेंगे।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत राज्य सरकार इन बच्चों को केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक अवसर भी प्रदान कर रही है। इस यात्रा का उद्देश्य बच्चों को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक संस्थानों से परिचित करवाना है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
     यात्रा कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चे चंडीगढ़-दिल्ली-आगरा-गोवा-चंडीगढ़ का भ्रमण करेंगे। इस दौरान बच्चों को विभिन्न आधुनिक परिवहन साधनों का अनुभव भी करवाया जाएगा, जिनमें वोल्वो बस, वंदे भारत एक्सप्रेस रेलगाड़ी, मेट्रो रेल सेवा, हवाई यात्रा, क्रूज यात्रा तथा हॉप-ऑन हॉप-ऑफ पर्यटन बस शामिल हैं।
    दिल्ली भ्रमण के दौरान बच्चे लाल क़िला, कु़तुब मीनार, इंडिया गेट, राजघाट, शक्ति स्थल, वीर भूमि, हुमायूं का मक़बरा, राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स, त्रिवेणी कला संगम तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय का भ्रमण करेंगे। इसके अलावा वे आगरा में ताजमहल का भ्रमण किया जाएगा।
    गोवा प्रवास के दौरान बच्चे उत्तर गोवा के कलंगुट, फोर्ट अगुआड़ा, अंजुना बीच, डोना पाउला, भारतीय समुद्र विज्ञान संस्थान एवं क्रूज यात्रा, जबकि दक्षिण गोवा में चर्च, मंगेशी मंदिर, वार्का बीच, पणजी शहर और स्पाइस गार्डन का भ्रमण करेंगे।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण बच्चों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा, देश के प्रति समझ और सामाजिक चेतना विकसित करने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा, सुविधा और देखभाल में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए।
    मुख्यमंत्री पद की शपथ के उपरान्त ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला स्थित टूटीकडी स्थित बालिका आश्रम में जाकर राज्य के निराश्रित बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सम्पूर्ण ज़िम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया। इन वर्गों के लिए क़ानून बनाने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बना। 28 फरवरी 2023 से ‘मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना’ के तहत 4000 अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया गया है। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, जेब खर्च, करियर काउंसलिंग, देश-विदेश भ्रमण जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। स्टार्ट-अप आरम्भ करने के लिए 2 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा.(कर्नल) धनी राम शांडिल विधायक मोहन लाल ब्राक्टा, महापौर शिमला नगर निगम सुरेन्द्र चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्याम भगत नेगी, उपायुक्त अनुपम कश्यप, निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग डॉ. पंकज ललित, पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी और गणमान्य इस अवसर पर उपस्थित थे।
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  • मुख्यमंत्री ने ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को शैक्षणिक भ्रमण पर किया रवाना
    बच्चे प्रमुख शहरों, ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक स्थलों का करेंगे दौरा
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज सुबह हिमाचल प्रदेश सचिवालय से मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत राज्य के चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस (सीसीआई), सराहन, टूटीकंडी और मशोबरा में रहने वाले ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को एक विशेष शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण पर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी बच्चों से संवाद किया और उनसे भ्रमण का भरपूर आनंद लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान उन्हें ज्ञान अर्जन और विभिन्न विषयों को जानने व समझने के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे।
    इस भ्रमण में प्रदेश के इन तीन बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे कुल 52 बच्चे भाग ले रहे हैं। यह भ्रमण कार्यक्रम 15 जनवरी, 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसके दौरान बच्चे देश के विभिन्न प्रमुख शहरों और ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक स्थलों का भ्रमण करेंगे।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत राज्य सरकार इन बच्चों को केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक अवसर भी प्रदान कर रही है। इस यात्रा का उद्देश्य बच्चों को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक संस्थानों से परिचित करवाना है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
     यात्रा कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चे चंडीगढ़-दिल्ली-आगरा-गोवा-चंडीगढ़ का भ्रमण करेंगे। इस दौरान बच्चों को विभिन्न आधुनिक परिवहन साधनों का अनुभव भी करवाया जाएगा, जिनमें वोल्वो बस, वंदे भारत एक्सप्रेस रेलगाड़ी, मेट्रो रेल सेवा, हवाई यात्रा, क्रूज यात्रा तथा हॉप-ऑन हॉप-ऑफ पर्यटन बस शामिल हैं।
    दिल्ली भ्रमण के दौरान बच्चे लाल क़िला, कु़तुब मीनार, इंडिया गेट, राजघाट, शक्ति स्थल, वीर भूमि, हुमायूं का मक़बरा, राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स, त्रिवेणी कला संगम तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय का भ्रमण करेंगे। इसके अलावा वे आगरा में ताजमहल का भ्रमण किया जाएगा।
    गोवा प्रवास के दौरान बच्चे उत्तर गोवा के कलंगुट, फोर्ट अगुआड़ा, अंजुना बीच, डोना पाउला, भारतीय समुद्र विज्ञान संस्थान एवं क्रूज यात्रा, जबकि दक्षिण गोवा में चर्च, मंगेशी मंदिर, वार्का बीच, पणजी शहर और स्पाइस गार्डन का भ्रमण करेंगे।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण बच्चों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा, देश के प्रति समझ और सामाजिक चेतना विकसित करने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा, सुविधा और देखभाल में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए।
    मुख्यमंत्री पद की शपथ के उपरान्त ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला स्थित टूटीकडी स्थित बालिका आश्रम में जाकर राज्य के निराश्रित बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सम्पूर्ण ज़िम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया। इन वर्गों के लिए क़ानून बनाने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बना। 28 फरवरी 2023 से ‘मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना’ के तहत 4000 अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया गया है। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, जेब खर्च, करियर काउंसलिंग, देश-विदेश भ्रमण जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। स्टार्ट-अप आरम्भ करने के लिए 2 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा.(कर्नल) धनी राम शांडिल विधायक मोहन लाल ब्राक्टा, महापौर शिमला नगर निगम सुरेन्द्र चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्याम भगत नेगी, उपायुक्त अनुपम कश्यप, निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग डॉ. पंकज ललित, पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी और गणमान्य इस अवसर पर उपस्थित थे।
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  • हिम परिवार पोर्टल हो रहा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से एकीकृत: मुख्यमंत्री
    जन सेवाओं को प्रभावी एवं सुलभ बनाने और सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने में हिमाचल बना देश का नंबर वन राज्य: मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जन सेवाओं को सुलभ, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग में हिमाचल प्रदेश देश का नंबर वन राज्य बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूर-दराज एवं जनजातीय क्षेत्रों में अधिकांश सरकारी सेवाएं आज कंप्यूटर माउस की एक क्लिक पर आम नागरिकों को उपलब्ध करवाई जा रही है, जो सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
    मुख्यमंत्री सोमवार गत सायं सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ आईटी एंड ई-गवर्नेंस इन हिमाचल प्रदेश की सामान्य सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभाग द्वारा विकसित विभिन्न सूचना प्रौद्योगिकी आधारित एप्लीकेशन्स और सॉफ्टवेयर की विस्तार से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इन्हें और अधिक नागरिक-हितैषी, सुरक्षित एवं प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
    मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विकसित ‘हिम उपस्थिति’ एप्लीकेशन की गहन समीक्षा की तथा इसे और अधिक दक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए।
    उन्होंने कहा कि ‘हिम एक्सेस पोर्टल’ में प्रदेश सरकार के सभी कर्मचारियों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा तथा सभी सरकारी कर्मचारियों को एक माह के भीतर इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करना होगा।
    मुख्यमंत्री ने एसेट मैपिंग एप्लीकेशन का शुभारंभ करते हुए कहा कि इस एप्लीकेशन के माध्यम से नागरिकों की संपत्ति से संबंधित संपूर्ण एवं नीवनतम विवरण उपलब्ध होगा, जिससे आधारभूत संरचना के विकास, प्रभावी नीति निर्माण और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलेगी।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिम सेवा पोर्टल में राजस्व सेवाओं की बेहतर और त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित करने के उददेश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित दस्तावेज़ सत्यापन एवं प्रमाणीकरण प्रणाली को एकीकृत किया जा रहा है। यह प्रणाली राजस्व सेवाओं में प्रथम स्तर की जांच के रूप में कार्य करेगी, जिससे न केवल राजस्व अधिकारियों को सशक्त बनाया जा सकेगा बल्कि नागरिकों को भी अधिक सुगम और पारदर्शी सेवाएं प्राप्त होंगी। वर्तमान में राजस्व सेवाओं से जुड़ी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में आवेदनों का मैनुअल सत्यापन करना पड़ता है, जिससे अधिकारियों पर अत्यधिक कार्यभार बढ़ जाता है। दस्तावेज़ों में मामूली त्रुटियां, जैसे धुंधली फोटो या गलत प्रारूप, आवेदन निरस्त होने का कारण बनती हैं। इसके चलते अधिकारी अपना बहुमूल्य समय केवल प्रारंभिक जांच में व्यय करते हैं और नागरिकों को भी बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
    एआई आधारित यह प्रणाली दस्तावेज अपलोड के समय ही उनका स्वतः स्कैन कर लेगी और तुरंत पहचान कर लेगी कि दस्तावेज स्पष्ट हैं या नहीं, सही है या नहीं तथा कहीं कोई आवश्यक हस्ताक्षर या विवरण तो अनुपस्थित नहीं। इसके साथ ही आवेदन पत्र में भरी गई व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, जन्म तिथि और आधार संख्या को अपलोड किए गए दस्तावेज़ों में उपलब्ध विवरण से मिलान कर किसी भी प्रकार की विसंगति को चिन्हित किया जाएगा। यदि कोई कमी पाई जाती है तो आवेदक को आवेदन जमा करने से पहले ही तत्काल सूचना मिल जाएगी, जिससे वह उसी समय त्रुटि को सुधार सकेगा।
    इस पहल से नागरिकों को आवेदन प्रक्रिया के दौरान बेहतर अनुभव मिलेगा और अनावश्यक अस्वीकृति की आशंका समाप्त होगी। वहीं, राजस्व अधिकारियों को भी प्रशासनिक जांच की ज़िम्मेदारी से राहत मिलेगी और वे पात्रता तथा तथ्यों के वास्तविक सत्यापन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। इससे आवेदनों का निस्तारण तेज़ होगा और अधिकारियों के पास पहुंचने वाले आवेदन लगभग स्वीकृति के लिए तैयार होंगे। 
    उन्होंने हिम परिवार पोर्टल में पंचायत स्तर तक संपूर्ण मैपिंग सुनिश्चित करने, विभिन्न सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों के समावेश तथा इसे प्रदेश सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पोर्टल में भूमि से संबंधित डाटा को भी सम्मिलित किया जाएगा, जिससे लक्षित लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जा सकेगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ब्लॉकचेन तकनीक को ई-गवर्नेंस में चरणबद्ध रूप से शामिल कर रही है। उन्होंने कहा कि एआई आधारित प्रणालियों से सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, निर्णय प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाने और शिकायत निवारण को तेज करने में मदद मिलेगी, जबकि ब्लॉकचेन तकनीक से डाटा सुरक्षा, पारदर्शिता और रिकॉर्ड प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
    उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य एक स्मार्ट, डिजिटल और भविष्य-उन्मुख हिमाचल प्रदेश का निर्माण करना है, जहां शासन व्यवस्था अधिक जवाबदेह, कुशल और नागरिक-केंद्रित हो।
    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में लोक मित्र केंद्रों की संख्या बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि ये केंद्र ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में जन सेवाओं की रीढ़ हैं। उन्होंने लोक मित्र केंद्र धारकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने पर भी बल दिया, ताकि आम लोगों को बेहतर और निर्बाध सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें।
    मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (डीटीजी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल ने कहा कि डेलाइट के प्रमुख सरकारी सम्मेलन ‘आरोहण-2025’ में हिमाचल प्रदेश को अपनी दूरदर्शी डिजिटल शासन पहल ‘हिम परिवार परियोजना’ के लिए विशेष मान्यता प्रदान की गई है।
    उन्होंने कहा कि राज्य ने रणनीतिक रूप से डिजिटल तकनीक का उपयोग करते हुए एक भविष्य-उन्मुख, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था का निर्माण किया है।
    बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (डीटीजी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, अतिरिक्त मुख्य सचिव के के पंत और श्याम भगत नेगी विभिन्न विभागों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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