News Flash: समाचार फ़्लैश:
  • ‘व्यवस्था परिवर्तन’ से राज्य में नीली क्रान्ति का हो रहा आगाज
  • सरकारी कैलेंडर-2026 को लेकर प्रसारित फर्जी पोस्ट दुर्भाग्यपूर्ण
  • मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के भवनों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए दिए निर्देश
  • मुख्यमंत्री ने पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत दिए दिशा-निर्देश
  • मुख्यमंत्री से नादौन विधानसभा क्षेत्र के बड़ा और फस्टे ग्राम पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट
  • एचपीएसईबीएल ने बिजली बिक्री से अर्जित किया 300 करोड़ रुपये का राजस्वः मुख्यमंत्री
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  • मुख्यमंत्री से नादौन विधानसभा क्षेत्र के बड़ा और फस्टे ग्राम पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट
    मुख्यमंत्री ने किया प्राकृतिक खेती पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से आज यहां नादौन विधानसभा क्षेत्र की बड़ा और फस्टे ग्राम पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। 
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नादौन विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों के बारे में चर्चा की तथा फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि बड़ा पंचायत में स्थापित होने वाले स्पाइस पार्क का शिलान्यास शीघ्र ही किया जाएगा। 
    मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को प्राकृतिक खेती पद्धति अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि नादौन क्षेत्र मंे प्राकृतिक खेती से हल्दी उगाने की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती से उगाई गई गेहूं के दाम 60 रुपये प्रतिकिलो,  निर्धारित किए हैं और 15 अप्रैल, 2025 को पांगी उपमंडल को पूर्णतः प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया गया है। प्रदेश सरकार द्वारा कच्ची हल्दी पर 90 रुपये और पांगी घाटी में उगाए गए जौ पर 60 रुपये प्रतिकिलो का समर्थन मूल्य प्रदान किया जा रहा है।
    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश भारत का पहला राज्य है जिसने प्राकृतिक खेती द्वारा उगाए गए उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। 
    मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने और उन्हें जागरूक करने का आग्रह किया ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकंे। 
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  • मुख्यमंत्री ने पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत दिए दिशा-निर्देश
    कहा खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए नियमों की सख्ती से अनुपालना की जाए 
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नगर निगम शिमला को शहर में पर्यटकों की सुविधा और स्वच्छता व्यवस्था के दृष्टिगत विभिन्न निर्देश जारी किए हैं। शनिवार देर सायं मालरोड़ शिमला और अन्य स्थलों का दौरा करने के उपरांत मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि विभिन्न वेंडर खाद्य पदार्थों और अन्य वस्तुओं के निर्धारित मूल्यों से अधिक दाम न वसूले।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवता, सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन निदेशालय और खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मापदंडों की सख्ती से अनुपालना की जाए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कचरे का सुरक्षित और उचित तरीके से निपटान करने के लिए नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में स्वच्छता की स्थिति से भी उसकी छवि का आकलन किया जाता है। शिमला आने वाले पर्यटकों को यात्रा का बेहतरीन अनुभव प्राप्त होना चाहिए, साथ ही स्थानीय निवासियों की सुविधा का ध्यान रखना भी नितांत आवश्यक है। 
    उन्होंने  कहा कि प्रदेश सरकार शहरी क्षेत्रों में जन सेवाओं में और सुधार के साथ-साथ उन्हें सुलभ भी बना रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा ‘स्वच्छ शहर, समृद्ध शहर’ के तहत सिटीजन कनेक्ट प्रोग्राम के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया गया है। बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और नागरिकों की उभरती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार शहरी विकास की नई समावेशी और टिकाऊ दिशा निर्धारित कर रही है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने छोटे दुकानदारों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ऐसे दुकानदारों, जिन पर एक लाख रुपये तक का ऋण बक़ाया है और जिन्हें बैंकों द्वारा गै़र-निष्पादित परिसंपत्ति घोषित किया गया है, उन्हें एक लाख रुपये तक की एकमुश्त भुगतान सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार जिन दुकानदारों पर एक लाख से दो लाख रुपये तक का बकाया ऋण है उन्हें भी एक लाख रुपये तक की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाएगी।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि नागरिक सेवा मंच के माध्यम से शहरी जन सेवाओं को और सुलभ बनाया गया है। पहले चरण में नौ ऑनलाइन सेवाएं प्रारंभ की गई, जिनमें 2.5 लाख से अधिक नागरिकों ने पंजीकरण किया है। दूसरे चरण में भी नौ नई सेवाओं को शामिल किया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकार तथा जनता के बीच दूरी कम होगी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल डोर प्लेट के माध्यम से प्रत्येक शहरी घर को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान की जा रही है, जो शहरी शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही का नया अध्याय सिद्ध होगी। 
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  • मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के भवनों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए दिए निर्देश
    ऊर्जा खपत का 90 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से दोहन का लक्ष्य
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग के तहत विभिन्न स्वास्थ्य संस्थान भवनों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी भवनों में चरणबद्ध तरीके से रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने से हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और धन की बचत भी होगी।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने राज्य को हरित ऊर्जा राज्य के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कारगर कदम उठाए जा रहे हैं। 
    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की प्रतिवर्ष ऊर्जा खपत लगभग 13 हजार मिलियन यूनिट है। राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि इस ऊर्जा खपत का 90 प्रतिशत से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के दोहन से पूरा किया जाए।
    राज्य सरकार द्वारा दो वर्षों के भीतर प्रदेश में 500 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 32 मेगावाट की पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना, पांच मेगावाट की भंजाल सौर ऊर्जा परियोजना और 10 मेगावाट की अघलौर सौर ऊर्जा परियोजना विद्युत उत्पादन कर रही हैं। राज्य सरकार सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, कम्प्रैस्ड बायोगैस और अन्य क्षेत्रों में वैकल्पिक ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने की दिशा में विशेष रूप से प्रयास कर रही है। 
    राज्य सरकार द्वारा हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के दृष्टिगत ग्राम पंचायतों को केन्द्रीय भूमिका में रखा गया है। ग्रीन पंचायत कार्यक्रम आरम्भ किया गया है, जिसके तहत सभी पंचायतों में 500 किलोवाट की ग्राउंड माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। 
    योजना के पहले चरण में 24 ग्राम पंचायतों में 500 किलोवाट क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित करने को स्वीकृति मिल चुकी है और 16 पंचायतों में इसका कार्य आरम्भ हो चुका है। कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 150 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है। इस कार्यक्रम के तहत परियोजनाओं द्वारा उत्पादित बिजली से अर्जित 20 प्रतिशत राजस्व राज्य सरकार द्वारा संबंधित ग्राम पंचायत के अनाथ बच्चों एवं विधवाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए उपयोग किया जाएगा। 
    ऊना जिला स्थित पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना का वाणिज्यिक संचालन 15 अप्रैल, 2024 से शुरू हो गया है और अब तक 79.03 मिलियन यूनिट का शुद्ध विद्युत उत्पादन और 22.91 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। 
    ऊना स्थित भंजाल सौर ऊर्जा परियोजना का वाणिज्यिक संचालन 30 नवम्बर, 2024 से शुरू हो गया है। इस परियोजना के माध्यम से अब तक 8.57 मिलियन यूनिट का शुद्ध विद्युत उत्पादन और 3.10 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। ऊना जिला में स्थित अघलौर सौर ऊर्जा परियोजना में विद्युत उत्पादन 21 मई, 2025 से आरंभ हो गया है। इस परियोजना के माध्यम से अब तक 5.89 मिलियन यूनिट का शुद्ध विद्युत उत्पादन किया गया है।
    31 मेगावाट की तीन सौर ऊर्जा परियोजनाएं निष्पादन चरण में हैं, 41 मेगावाट की चार सौर ऊर्जा परियोजनाएं निविदा चरण में हैं। कांगड़ा जिला के डमटाल क्षेत्र में बंजर भूमि पर 200 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जाएगा।
    ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर 250 किलोवाट से पांच मेगावाट तक की सौर ऊर्जा योजनाएं आवंटित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं द्वारा उत्पादित बिजली को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड द्वारा खरीदा जाएगा। 
    इसके तहत अब तक 547 निवेशकों को 595.97 मेगावाट क्षमता की आवंटित ग्राउंड माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाओं में से 403.09 मेगावाट क्षमता के विद्युत खरीद समझौतों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। 
    हिमऊर्जा द्वारा 728.4 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड को आवंटित की जा चुकी हैं, जिनमें से 150.13 मेगावाट क्षमता की 120 माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं आरम्भ की जा चुकी हैं। 
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  • 27,715 अतिनिर्धन परिवारों को सरकार उपलब्ध करवायेगी पक्का मकान: मुख्यमंत्री
    बीस साल से आईआरडीपी में होने के बावजूद नहीं मिला पक्का मकान
     
    कोई भी पात्र परिवार आईआरडीपी से नहीं रहेगा बाहर: मुख्यमंत्री
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां पंचायती राज विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के उन पात्र ग़रीब परिवारों को पक्के मकान की सुविधा उपलब्ध करवाएगी, जो अभी भी कच्चे मकानों में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित आवास केवल एक बुनियादी आवश्यकता ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामाजिक अधिकार है और सरकार इसे सुनिश्चित करने के लिए ठोस क़दम उठा रही है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिनिर्धन परिवारों (पूअरेस्ट ऑफ द पूअर) के चयन के लिए किए गए सर्वेक्षण के प्रथम चरण में 27,715 परिवारों को शामिल किया गया है। ये वह परिवार हैं जो पिछले 20 वर्षों से आईआरडीपी में शामिल थे, परन्तु उन्हें अभी तक पक्का मकान नहीं मिला है। प्रथम चरण के सर्वेक्षण में आय सीमा 50 हज़ार रुपये निर्धारित की गई थी। इसमें उन लोगों को शामिल नहीं किया गया था जिनके पास पक्का घर उपलब्ध है। सर्वे के द्वितीय चरण में उन परिवारों को भी शामिल किया गया है जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं। इस सर्वे के बाद 35,355 अतिरिक्त परिवार अतिनिर्धन श्रेणी में जोड़े गए हैं और अब इन परिवारों की कुल संख्या 63,070 हो गई है।
     उन्होंने कहा कि तीसरे चरण में निर्धन परिवारों की श्रेणी में अनाथ, दिव्यांग और विधवाओं को भी शामिल किया जाएगा, जिससे इन परिवारों की संख्या में और बढ़ोतरी होगी। यह सर्वेक्षण चौथे और पांचवें चरण में भी किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक पात्र परिवारों को इस सूची में शामिल किया जा सके। चयन प्रक्रिया का हर चरण में उदारीकरण कर मापदण्डों में छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र परिवार आईआरडीपी से बाहर नहीं रहेगा।  
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार पंचायती राज विभाग को सुदृढ़ करने के लिए रिक्त पदों प्राथमिकता के आधार पर भरेगी। पंचायतों में कनिष्ठ अभियन्ताओं के पद भी भरे जाएंगे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार सामाजिक अधिकारिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। समाज के वंचित, उपेक्षित और कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से कार्यान्वित की जा रही हैं।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल मकान निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग़रीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन स्तर उपलब्ध करवाना है। मूलभूत सुविधाओं, स्वच्छता, पेयजल और आजीविका के अवसरों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि सरकार की प्राथमिकता जनहित है और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना ही ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की मूल भावना है।
    इस अवसर पर पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (नवीनीकरण, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस) गोकुल बुटेल, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव पंचायती राज सी. पालरासु, निदेशक पंचायती राज राघव शर्मा और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  
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  • मुख्यमंत्री ने दिए जननी सुरक्षा ड्रॉप बैक एम्बुलेंस को बदलने के निर्देश
    वृद्धजनों की घर पर स्वास्थ्य जांच के लिए चलाया जाएगा विशेष कार्यक्रम
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
    इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में जननी सुरक्षा ड्रॉप बैक एम्बुलेंस को बदलने के निर्र्देश दिए। इसके तहत 125 एम्बुलेंस को बदलने पर लगभग 10.68 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नागरिकों को सुलभ, स्तरीय और गुणात्मक सेवाएं सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस दृष्टि से स्वास्थ्य विभाग के तहत विभिन्न जन सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धजनों की देखभाल और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए एल्डरली एंड पैलिएटिव केयर कार्यक्रम के तहत लगभग 20 करोड़ रुपये व्यय किये जाएंगे। इसके तहत बैडरिडन (शय्याग्रस्त) मरीजों को उनके घर पर जांच और उपचार की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसके लिए विशेष रूप से टीमें गठित की जाएंगी, जिनमें चिकित्सक, पैरा-मेडिकल सहित अन्य स्टाफ उपलब्ध होगा। इन टीमों को 70 आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों से लिंक किया जाएगा। स्वास्थ्य देखभाल के दृष्टिगत यह कार्यक्रम अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है और सरकार की प्रतिबद्धता को इंगित करता है।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए भी विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। टाइप-1 डायबिटीज़ से ग्रसित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क इन्सुलिन पम्प उपलब्ध करवाये जाएंगे। इस पर लगभग 2.25 करोड़ रुपये व्यय किये जाएंगे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के चंगुल में फंसे युवाओं का पुनर्वास सुनिश्चित करना अत्यन्त आवश्यक है। इस दिशा में पुनर्वास केन्द्रों को सशक्त किया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में वृहद योजना तथा कारगर क़दम उठाने के निर्देश दिए।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (नवीनीकरण, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस) गोकुल बुटेल, सचिव स्वास्थ्य प्रियंका बासु इंगटी, निदेशक डीडीटीजी डॉ. निपुण जिंदल, मिशन निदेशक एनएचएम प्रदीप कुमार ठाकुर, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं गोपाल बेरी और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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  • मुख्यमंत्री ने छात्र संसद में नामी संस्थानों के छात्रों से किया संवाद
    हिमाचल प्रदेश देश का ‘हैप्पीएस्ट स्टेट’: मुख्यमंत्री
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां छात्र संसद कार्यक्रम के तहत शिमला आए छात्रों से प्रदेश सचिवालय में संवाद किया। देश के प्रतिष्ठित आईआईटी, आईआईएम और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय सहित नामी शैक्षणिक संस्थानों के छात्र इस अवसर पर उपस्थित थे।
    मुख्यमंत्री ने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जानकारी साझा करते हुए विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रदेश के विकासात्मक मानकों को इंगित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का ‘हैप्पीएस्ट स्टेट’ है। उन्होंने छात्रों के एक सवाल के जवाब में कहा कि सफलता के लिए समर्पण, नैतिकता, पारदर्शिता सहित नेतृत्व गुणों का समावेश किसी भी व्यक्तित्व के लिए नितान्त आवश्यक है।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र प्राचीन काल से ही विद्यमान है। यहां की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और मानवीय सरोकारों की देश विदेश में अलग पहचान है।
    उन्होंने गुड गवर्नमेंट के लिए गुड गवर्नेंस की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए गए बदलावों और सुधारों से भी छात्रों को अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हरित हिमाचल के ध्येय के साथ अनेक नवोन्मेषी पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर और वर्ष 2032 तक देश का समृद्धतम राज्य बनेगा।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हिमाचल सरकार पैट्रो ईंधन आधारित वाहनों को चरणबद्ध तरीक़े से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदल रही है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने पर प्रदेश सरकार विशेष ध्यान दे रही है। इस संदर्भ में उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना, इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना, राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूल, डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना सहित विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी दस वर्षों में प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव आयेगा। छात्रों को भविष्य की ज़रूरतों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के आधार पर गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए अभिनव प्रयास किए गए हैं।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए निरन्तर प्रयासरत है। विभिन्न स्तरों पर युक्तिकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नैसर्गिक सौंदर्य और अलौकिक प्राकृतिक सुन्दरता की दृष्टि से भी राज्य की अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लड़कियां हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
    छात्रों ने मुख्यमंत्री से विभिन्न विषयों पर सवाल भी पूछे।
    छात्र संसद एक ऐसा कार्यक्रम है, जो विद्यार्थियों को सिर्फ़ किताबी ज्ञान नहीं बल्कि संसद, विधानसभा और प्रशासन के कामकाज का सीधा अनुभव देकर उन्हें देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए तैयार करता है।
    इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (नवीनीकरण, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस) गोकुल बुटेल, छात्र संसद के अध्यक्ष आदित्य बेगड़ा, छात्र संसद के पदाधिकारी शशांक शेखर पांडेय, मानस तिवारी, और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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