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  • चिकित्सकों के लिए लाई जाएगी ‘इनसेंटिव स्कीम’: मुख्यमंत्री
  • मुख्यमंत्री ने ईद-उल-जुहा की शुभकामनाएं दी
  • प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज पर दे रही ऋण सुविधा: मुख्यमंत्री
  • कुराश कप में कांस्य पदक विजेता सौरव सुमन ने मुख्यमंत्री से की भेंट
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  • बेहतर शिक्षा जिम्मेदार नागरिक और राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है: राज्यपाल
    युवाओं में शोध, नवाचार और स्टार्ट-अप संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर दिया बल
    राज्यपाल ने श्री साईं ग्रुप ऑफ इंस्टीटयूट्स के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की
     
    राज्यपाल काविन्द्र गुप्ता ने कहा है कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने या रोजगार हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य जिम्मेदार नागरिक और समर्पित राष्ट्र निर्माता तैयार करना है, जो समाज और देश के विकास में सकारात्मक योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान युवाओं में चरित्र, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सेवा भावना विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।
    राज्यपाल शुक्रवार को पंजाब के पठानकोट स्थित श्री साईं ग्रुप ऑफ इंस्टीटयूूट्स के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर फर्स्ट लेडी बिंदु गुप्ता भी उपस्थित थीं।
    कविन्द्र गुप्ता ने स्नातक विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं तथा संस्थान की 30 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया।
    विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कविन्द्र गुप्ता ने दीक्षांत समारोह को प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन का महत्त्वपूर्ण पड़ाव बताया, जो शिक्षा के एक अध्याय के पूर्ण होने के उपरान्त वास्तविक जीवन की चुनौतियों एवं अवसरों से भरी नई यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।
    उन्होंने कहा कि विद्यार्थी इस संस्थान से केवल डिग्रियां नहीं बल्कि ज्ञान, संस्कार, आत्मविश्वास और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी साथ लेकर जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण बनाए रखने का अह्वान किया।
    राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय विकास की आधारशिला है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है जब ज्ञान का उपयोग समाज और मानवता के कल्याण के लिए किया जाए।
    श्री साईं ग्रुप ऑफ इंस्टीटयूूट्स की प्रगति की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि एक छोटे शैक्षणिक प्रयास के रूप में शुरू हुआ यह संस्थान आज अनेक महाविद्यालयों और एक विश्वविद्यालयों तक विस्तारित हो चुका है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
     
    राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल तकनीक, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा ने कार्य और पेशेवर अवसरों की प्रकृति को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना अब पर्याप्त नहीं है, बल्कि तेजी से बदलती दुनिया में प्रासंगिक और सफल बने रहने के लिए निरंतर सीखना, नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक संवेदनशीलता का होना आवश्यक है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि युवाओं में शोध, नवाचार और स्टार्ट-अप संस्कृति को बढ़ावा देना तथा उन्हें कुशल कार्यबल के रूप में विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। भारत सरकार ने युवाओं को सशक्त बनाने, कौशल विकास को मजबूत करने और रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए कई परिवर्तनकारी योजनाएं और पहल शुरू की हैं।
    राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देश ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के साथ निरंतर प्रगति कर रहा है और इस परिवर्तनकारी यात्रा में युवा सबसे महत्त्वपूर्ण भागीदार हैं।
    उन्होंने कहा कि युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होती है। बड़े सपने देखिए, कड़ी मेहनत कीजिए, जीवन में ईमानदारी और अनुशासन बनाए रखिए तथा हमेशा सकारात्मकता और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़िए।
    कविन्द्र गुप्ता ने पर्यावरण प्रदूषण, नशा, बेरोजगारी और नैतिक मूल्यों में आ रही गिरावट जैसी सामाजिक चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शिक्षित युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी है कि वे जागरूकता, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से इन समस्याओं के समाधान में योगदान दें और समाज को सही दिशा दिखाएं।
    इस अवसर पर साईं संस्था के अध्यक्ष एवं श्री साईं यूनिवर्सिटी, पालमपुर के कुलपति एस.के. पुंज ने भी अपने विचार साझा किए और शिक्षा के क्षेत्र में संस्थान की यात्रा एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
    इससे पूर्व साईं ग्रुप के मुख्य प्रबंध निदेशक कंवर तुषार पुंज ने राज्यपाल का स्वागत किया। इंजीनियरिंग महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. नवदीप सेनवाल ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा संस्थान की उपाध्यक्ष रिया पुंज ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।
     
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  • कुराश कप में कांस्य पदक विजेता सौरव सुमन ने मुख्यमंत्री से की भेंट
    एशियन कुराश कप (सीनियर वर्ग) के कांस्य पदक विजेता सौरव सुमन ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भेंट की। यह प्रतियोगिता 22 मई से 25 मई, 2026 तक उज्बेकिस्तान के नुकुस में आयोजित की गई थी।
    सौरव सुमन जल शक्ति विभाग में कनिष्ठ अभियन्ता के पद पर कार्यरत हैं तथा वर्तमान में शिमला जिले के मतियाना में अपनी सेवाएं दे रहे हैैं। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने हिमाचल प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है।
    मुख्यमंत्री ने सौरव सुमन को उनकी लगन और कड़ी मेहनत के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं को खेलों और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी। मुख्यमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।
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  • प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज पर दे रही ऋण सुविधा: मुख्यमंत्री
    पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से लाभान्वित अनुसूचित जनजातीय क्षेत्र के 21 विद्यार्थियों ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिह सुक्खू से भेंट की और अपने शैक्षणिक अनुभव साझा किए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योेजना  के अंतर्गत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 20 लाख रुपये तक का ऋण एक प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध करवा रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस सुविधा का भरपूर लाभ उठाकर जीवन में अपने लक्ष्य हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में विभिन्न सुधार किए हैं ताकि विद्यार्थियों को उनके घरों के निकट गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।
    श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के 156 से अधिक स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू किया है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को कला, विज्ञान और वाणिज्य संकायों में शिक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के व्यावहारिक प्रयासों के परिणामस्वरूप शिक्षा क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है और हाल ही में किए गए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में हिमाचल प्रदेश 13वें स्थान से बढ़कर 6वें स्थान पर पहुंच गया है।
    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बेटियों की विवाह योग्य आयु को भी लड़कों के समान 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में अनुसूचित जनजाति समुदाय की शिक्षा में भूमिका से लोगों को अवगत करवाने के लिए 10 मई से 9 जून, 2026 तक अनुसूचित जनजाति गरीमा उत्सव मनाया जा रहा है।
    इस अवसर पर शिक्षा सचिव राकेश कंवर, उच्च शिक्षा निदेशक हरीश कुमार तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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  • चिकित्सकों के लिए लाई जाएगी ‘इनसेंटिव स्कीम’: मुख्यमंत्री
    ऐस्सिटेंट प्रोफेसर के 110 और पैरा मेडिकल स्टाफ के 120 पद भरे जाएंगे
    चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में की जा रही परिवर्तनकारी पहल
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार चिकित्सकों के लिए ‘इनसेंटिव स्कीम’ लेकर आयेगी। इस योजना के तहत चिकित्सकों को 20 प्रतिशत इनसेंटिव प्रदान किया जाएगा। इस योजना में चिकित्सा महाविद्यालयों के प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और ऐस्सिटेंट प्रोफेसर भी शामिल होंगे।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार चिकित्सा महाविद्यालयों में ऐस्सिटेंट प्रोफेसर के 110 पद और पैरा मेडिकल स्टाफ के 120 पद भी भरेगी। इससे चिकित्सा शिक्षा और सुदृढ़ होगी और मरीजों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में भी मदद मिलेगी।
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आईजीएमसी शिमला में नए मातृ एवं शिशु अस्पताल के निर्माण के लिए संभावनाएं तलाश करने और जमीन चिन्हित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के चिकित्सा संस्थानों में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य जांच उपकरण और आधारभूत ढांचे का सृजन कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटंे बढ़ाई जा रही हैं। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा में 57, श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय मंडी में 29, डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय नाहन में 32, पंडित जवाहर लाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय चंबा में 33, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में 67 और इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में 96 पीजी सीटें बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सीटों के बढ़ने के बाद इन मेडिकल कॉलेजों के कामकाज में तेजी आएगी और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध हो पाएगा।
    उन्होंने कहा कि इस वर्ष सभी मेडिकल कॉलेजों में नर्सों के खाली पदों को भर दिया जाएगा और तकनीकी स्टाफ भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होगा। राज्य सरकार 3000 करोड़ रुपये व्यय कर प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आधुनिक मशीनें और उपकरण खरीद रही है। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की कमी को भी दूर किया जा रहा है।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी मेडिकल कॉलेजों का संचालन बेहतर ढंग से करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस कार्य में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार होगा और प्रदेश में हैल्थ टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। .0.
     
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  • उत्तराखंड और पूर्वाेत्तर राज्यों में बादल फटने की घटनाएं बढ़ने की संभावनाः मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री ने टिकेंद्र पंवर की पुस्तक का विमोचन किया
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार सायं शिमला के गेयटी थियेटर में नगर निगम शिमला के पूर्व उप-महापौर टिकेंद्र पंवर द्वारा संपादित पुस्तक ‘सिटी लिमिट्स-द क्राइसिज़ ऑफ अर्बनाइजेशन’ का विमोचन किया।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति ने हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ आबोहवा और पानी का उपहार दिया है और इन संसाधनों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य की राजधानी और सबसे बड़े शहर के रूप में शिमला ने पिछले कुछ वर्षों में अनेक बदलाव देखें है। उन्होंने कहा कि वह बचपन से लेकर अब तक शिमला शहर में हो रहे बदलावों को देख रहे हैं। जहां पहले जंगल हुआ करते थे, वहां अब इमारतें बन गई हैं। हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां सुनियोजित निर्माण आवश्यक है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला शहर को तारों के जाल से निजात दिलवाने के लिए 145 करोड़ रुपये की लागत से भूमिगत डक्ट परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। वर्तमान में सब्जी मंडी क्षेत्र में 600 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक परिसर विकसित किया जा रहा है। लिफ्ट के पास भी एक अंडरपास प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि शिमला शहर में 24 घंटे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 800 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना क्रियान्वित की जा रही है। इसके अलावा, सर्कुलर रोड को चौड़ा करने के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य जारी है और शहर की सुंदरता बनाए रखने के लिए अधिसूचित हरित क्षेत्रों को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
    प्रदेश सरकार के सतत विकास को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संतुलन को केंद्र में रख कर शिमला शहर के सौंदर्यीकरण के लिए कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हिम-चंडीगढ़, हिम-पंचकूला और कांगड़ा में एयरो सिटी जैसी नई शहरीकरण की परियोजनाएं तैयार की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त पर्यटन से संबंधित अधोसंरचना को भी मजबूत किया जा रहा है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश ने दो बड़ी प्राकृतिक आपदाओं को झेला है, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ था। उन्होंने कहा कि अब बादल फटने की घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है, क्योंकि ऐसी घटनाएं अब केवल ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहीं बल्कि निचले क्षेत्रों में भी घटित हो रही हैं। उन्होंने सिराज विधानसभा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में हुई घटनाओं का भी उल्लेख किया। 
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि गृह मंत्री के साथ आयोजित बैठक के दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया था कि भविष्य में बादल फटने की घटनाएं केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं रहेंगी। ऐसी घटनाएं उत्तराखंड और पूर्वाेत्तर राज्यों में भी बढ़ सकती हैं। पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
    इस अवसर पर झारखण्ड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि लोगों को अपने आचरण में सुधार करने की आवश्यकता है। पर्यटन से संबंधित चिंताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए जारी दिशा निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के साथ-साथ लोगों को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई लोग पार्किंग सुविधा न होने के बावजूद कई वाहन खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल के समय में ट्रैफिक जाम का मुख्य कारण पर्यटकों के वाहन नहीं बल्कि मुख्य रूप से हिमाचल में पंजीकृत वाहन होते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को आत्म अवलोकन करने की आवश्यकता है।
    उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्ण संस्थागत जवाबदेही की आवश्यकता है। शहरीकरण केवल डैमोग्राफिक बदलाव नहीं बल्कि समाज के पुनर्गठन की प्रक्रिया है। लाखों लोग साझा संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं और शहरी निकायों तथा योजना व्यवस्था पर निर्भर हैं। लेकिन हमारी संस्थाएं इस बदलाव के साथ कदमताल नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि संस्थागत क्षेत्रों में रहने वाली कमी से कमजोर लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। 
    इस अवसर पर शिमला के महापौर सुरेन्द्र चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, शिक्षा सचिव राकेश कंवर, डीजी होमगार्ड्स सतवंत अटवाल, ट्रिब्यून ब्यूरो प्रमुख प्रतिभा चौहान और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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  • देव भूमि हिमाचल में धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता: राज्यपाल
    मां ज्वाला देवी जी के दर्शन कर राज्यपाल ने प्रदेश व देश की खुशहाली की कामना की
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज ‘देव भूमि’ हिमाचल प्रदेश में एक समर्पित धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस सर्किट के माध्यम से प्रदेश के प्रसिद्ध मंदिरों, शक्तिपीठों, मठों और धार्मिक स्थलों को बेहतर सड़क, आधुनिक सुविधाओं और मजबूत संपर्क व्यवस्था से जोड़ा जाना चाहिए। इससे न केवल प्रदेश की धार्मिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का संरक्षण भी होगा।
    राज्यपाल ने यह बात आज कांगड़ा जिले स्थित मां ज्वाला देवी जी मंदिर में शीश नवाने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कही। इस अवसर पर लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उनके साथ उपस्थित रहीं।
    राज्यपाल ने मां ज्वाला देवी जी से प्रदेश और देशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मां ज्वाला देवी जी, मां ब्रिजेश्वरी देवी जी, मां चिंतपूर्णी जी, मां नैना देवी जी, मां चामुंडा देवी जी सहित अनेक प्राचीन मंदिर और मठ स्थित हैं, जो विश्वभर में श्रद्धा के केंद्र हैं। इन सभी धार्मिक स्थलों को एक व्यापक धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
    उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन हिमाचल की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार बन सकता है। राज्यपाल ने प्रदेश सरकार, पर्यटन और अन्य संबंधित विभागों से मिलकर श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने का आह्वान किया, साथ ही धार्मिक स्थलों की पवित्रता और आध्यात्मिक वातावरण को बनाए रखने पर भी बल दिया।
    राज्यपाल ने मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की सराहना भी की।
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