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  • मुख्यमंत्री ने चंबा सड़क हादसे पर किया शोक व्यक्त
  • पूर्व सैनिकों का अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सेवाभाव समाज के लिए आदर्श: राज्यपाल
  • मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से भेंट कर हिमाचल के लिए वित्तीय सहायता का किया अनुरोध
  • मुख्यमंत्री ने सेब उत्पादकों के हितों की वकालत की
  • मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से भेंट की
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  • मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से भेंट की
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से भेंट की। 
    मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से हिमाचल प्रदेश से जुड़ी परियोजनाओं से संबंधित मुद्दों को केन्द्र सरकार के समक्ष रखने तथा प्रदेश के विकास में सहयोग का आग्रह किया। 
    मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के दृष्टिगत केन्द्रीय मंत्री से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास से जुड़ी परियोजनाओं सहित आयुष्मान भारत योजना में केन्द्रीय सहयोग का आग्रह किया। 
    जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। 
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  • मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से भेंट कर हिमाचल के लिए वित्तीय सहायता का किया अनुरोध
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से शिष्टाचार भेंट की।
    बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ राज्य की वित्तीय स्थिति पर चर्चा की और हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार से उदार सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री को 16वें वित्त आयोग को प्रस्तुत किए गए ज्ञापन एवं अतिरिक्त ज्ञापन की जानकारी दी। उन्होंने राजस्व घाटा अनुदान को न्यूनतम 10,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित किए जाने का आग्रह किया। उन्होंने 16वें वित्त आयोग के अवार्ड पीरियड के दौरान राज्यों के राजस्व एवं व्यय अनुमानों के यथार्थवादी आकलन पर बल दिया।
    मुख्यमंत्री ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग से एक ‘ग्रीन फंड’ के गठन की पैरवी करते हुए कहा कि इसमें प्रतिवर्ष 50,000 करोड़ रुपये का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य देश की ‘ग्रीन फ्रंटियर्स’ हैं और उनकी पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने होरिजेंटल डिवेल्यूवेशन के लिए राज्य द्वारा प्रस्तावित संशोधित फार्मूले की जानकारी भी दी, इसमें वन एवं वनों पर आधारित पारिस्थितिकी के मानदंड का विशेष ध्यान रखने की मांग की गई है। उन्होंने आग्रह किया कि हिमाच्छादित एवं शीत मरुस्थलीय क्षेत्रों को भी अधिक सघन एवं मध्यम सघन वनों के साथ शामिल किया जाए, क्योंकि सह अस्तित्व को प्रदर्शित करते हैं। 
    मुख्यमंत्री ने 15वें वित्त आयोग द्वारा विकसित आपदा जोखिम सूचकांक को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की तुलना देश के अन्य क्षेत्रों से नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के बावजूद राज्य को आपदा राहत के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने विशिष्ट संकेतकों को ध्यान में रखते हुए पहाड़ी राज्यों के लिए अलग डीआरआई तथा पृथक आवंटन की मांग की।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से राज्य को अतिरिक्त सहयोग देने का अनुरोध किया और राजस्व घाटा अनुदान में पिछले कुछ वर्षों में आई भारी कमी के कारण राज्य की वित्तीय क्षमता पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव का उल्लेख करते हुए जीएसडीपी का अतिरिक्त दो प्रतिशत उधार लेने की अनुमति देने की मांग की।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर तथा प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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  • पूर्व सैनिकों का अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सेवाभाव समाज के लिए आदर्श: राज्यपाल
    राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि पूर्व सैनिक अपने सेवा काल के उपरांत भी राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दे रहे हैं। उनका अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सेवाभाव युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
    राज्यपाल ने आज हमीरपुर जिला के सुजानपुर में पूर्व सैनिक लीग सुजानपुर और सर्व कल्याणकारी ट्रस्ट द्वारा आयोजित सेना दिवस एवं वार्षिक समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया।
    सेना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि 15 जनवरी भारतीय सेना के अदम्य साहस, अनुशासन और देशभक्ति की याद दिलाता है। देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाले वीरों और परिजनों को कृतज्ञ राष्ट्र नमन करता है। भारतीय सेना केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की प्रहरी है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विषम हालात में देश सेवा करते हुए सैनिक राष्ट्रीय गौरव को बनाए रखते हैं और उनका बलिदान व समर्पण पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
    राज्यपाल ने पूर्व सैनिक लीग जैसे संगठनों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के संगठन सैनिकों के मूल्यों और अनुभवों को समाज से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। सर्व कल्याणकारी ट्रस्ट की निरंतर समाज सेवा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ट्रस्ट द्वारा गरीबों व जरूरतमंदों के कल्याण के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर, दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं, महिला सशक्तिकरण, वंचित परिवारों को सहायता तथा आपदा की स्थिति में निःस्वार्थ सेवा जैसे सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेना दिवस पर हर वर्ष भारतीय सेना, पूर्व सैनिकों, शहीदों के परिवारों और वीर नारियों को सम्मानित करने वाले कार्यक्रम राष्ट्र के कृतज्ञ भाव को सुदृढ़ करते हैं। 
    सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने वन रैंक वन पेंशन लागू करने, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के निर्माण, रक्षा पेंशन प्रणाली के सरलीकरण, पूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा वीर नारियों और आश्रितों के लिए कल्याणकारी योजनाओं जैसे कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत सेना ही सुरक्षित भारत की नींव है।
    आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में बढ़ते स्वदेशीकरण से सशस्त्र बल सशक्त हो रहे हैं और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य अभियानों ने सशस्त्र बलों के प्रति जनविश्वास को और मजबूत किया है तथा शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुरक्षा और गरिमा से समझौता किए बिना दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने युवाओं से सैनिकों के अनुशासित जीवन और सपर्मण भाव से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। 
    पूर्व सैनिकों द्वारा प्रभावशाली मार्च-पास्ट की राज्यपाल ने सलामी ली। जिले से पूर्व सैनिकों की आठ टुकड़ियों ने परेड में भाग लिया। इस अवसर पर राजस्थान से आए कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।
    राज्यपाल ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले व्यक्तियों को ‘शाने हिमाचल’ पुरस्कार से सम्मानित किया तथा ‘शाने हिंद’ पुरस्कार भी प्रदान किए।
    इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह तथा लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) बी.एस. जसवाल ने भी संबोधित किया।
    ट्रस्ट के अध्यक्ष अभिषेक राणा ने राज्यपाल का स्वागत किया और संगठन की गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
    इस अवसर पर विधायकगण, राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा, पूर्व विधायकगण तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। 
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  • प्रदेश सरकार स्टेट न्यूट्रिशन पॉलिसी बनायेगी: मुख्यमंत्री
    कंपोजिट टेस्टिंग लैब कंडाघाट को विश्वस्तरीय तकनीक से सुसज्जित किया जाएगा
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में स्टेट न्यूट्रिशन पॉलिसी बनायेगी। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री माताओं सहित सभी संवेदनशील वर्गों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने के लिए समयबद्ध और प्रभावी कदम उठाना है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की कण्डाघाट स्थित कम्पोजिट टेस्टिंग लैब को विश्व स्तरीय हाई-ऐंड टेक्नोलॉजी से लैस किया जाएगा, ताकि सूक्ष्म और सटीक विश्लेषण और दक्षता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रथम चरण में बद्दी, मण्डी, कांगड़ा और शिमला शहर में भी क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। द्वितीय चरण में सभी जिलों में इस तरह की प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य में न्यूट्रिशनल सरविलेंस को और सघन किया जाएगा। खाद्य पदार्थों की जांच सुनिश्चित कर उनमें उपलब्ध पोषक तत्वों की प्रोफाइलिंग और मैपिंग की जाएगी। उन्होंने विभाग को सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आंगनवाड़ी और मिड-डे-मील सहित अन्य योजनाओं में प्रदान किये जाने वाले खाद्यानांे की भी समय समय पर जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा जांच, जागरूकता क्षमता विकास और प्रशिक्षण के लिए मोबाइल वैन का उपयोग किया जाएगा, ताकि सभी जिलों में विभाग की कार्यप्रणाली को और सुदृढ़ किया जा सके।
    उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली को सुगम एवं समयबद्ध बनाने के लिए नवीनतम सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित करने और सारी प्रक्रियाओं का डिजिटाइजेशन करने के निर्देश भी दिए। विभाग द्वारा खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने तथा इसकी जांच के नतीजों सहित सभी प्रक्रियाओं के डिजिटल निष्पादन के लिए स्टेट पोर्टल विकसित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्टेट न्यूट्रिशन डेटाबेस भी तैयार करने को कहा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की कमी तथा कीटनाशकों के कारण लोगों में बीमारियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। प्रदेश सरकार इन दोनों विषयों पर गम्भीरता से विचार कर समाधान के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी के दृष्टिगत प्रदेश सरकार राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है और इससे जुड़े किसानों को प्रोत्साहित कर विभिन्न योजनाओं के तहत लाभान्वित किया जा रहा है।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को निरन्तर सुदुढ़ कर रही है। स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में विश्व स्तरीय मापदण्डों को अपनाया जा रहा है। हर चिकित्सा महाविद्यालय में आईसीयू स्थापित किये जा रहे हैं तथा अस्पतालों में विश्वस्तरीय डॉक्टर-पेशेंट अनुपात दर को अपनाया जा रहा है।
    बैठक में निदेशक डीडीटीजी डॉ. निपुण जिंदल, विशेष सचिव स्वास्थ्य अश्वनी शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन जितेन्द्र सांजटा एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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  • मुख्यमंत्री ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत कामगारों को हिमकेयर योजना का लाभ प्रदान करने के दिए निर्देश
    कहा कामगारों का ई-केवाईसी शीघ्र किया जाए पूर्ण
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत सभी कामगारों का हिमकेयर कार्ड बनाकर उन्हें योजना का लाभ प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। आज यहां आयोजित बोर्ड की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि कामगार, समाज का अभिन्न अंग हैं और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान अतुलनीय है।
    मुख्यमंत्री ने बोर्ड को निर्देश दिए कि कामगारों को विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ प्रदान करने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण से प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कामगारों का ई-केवाईसी हिम परिवार पोर्टल के माध्यम से करने के निर्देश देते हुए इस प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने को भी कहा।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि बोर्ड में पंजीकृत कामगारों के बच्चों को उच्च शिक्षा जैसे पी.एचडी, एमबीबीएस, इंजीनियरिंग इत्यादि के लिए प्रदान की जाने वाली सहायता राशि उसी दर पर प्रदान की जाए, जितनी सरकारी संस्थानों में उस विषय की फीस है।
    उन्होंने कहा कि बोर्ड में पंजीकृत कामगारों के दिव्यांग बच्चों को मुख्यमंत्री सहारा योजना से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि बोर्ड द्वारा आयोजित विभिन्न जागरूकता शिविरों में एंटी चिट्टा अभियान के तहत चिट्टा के दुष्प्रभावों के बारे में भी जागरूकता लाई जानी चाहिए।
    प्रदेश सरकार द्वारा मजदूरों के समग्र कल्याण के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं और कार्यक्रम लागू किये जा रहे हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में बोर्ड द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर 20.70 करोड़ रुपये, 2024-25 में 33.27 करोड़ रुपये और वर्ष 2025-26 में अभी तक 26.23 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं, जो सराहनीय है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में बोर्ड की पेंशन योजना के तहत 1606 लाभार्थियों को 31.06 लाख रुपये की पेंशन प्रदान की गई है।
    बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर ने कहा कि बोर्ड द्वारा पंजीकृत कामगार के विवाह के लिए 51 हजार रुपये की वित्तीय सहायता तथा कामगार के दो बच्चों के लिए भी विवाह के लिए 51-51 हजार रुपये प्रदान किये जाते हैं। उन्होंने बोर्ड द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत प्रदान की जाने वाली सहायता राशि की विस्तार से जानकारी दी।
    बोर्ड के सदस्य सचिव व मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव कुमार ने बोर्ड की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी देते हुए अवगत करवाया कि विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत कामगारों को लाभ प्रदान करने के लिए अभी तक लगभग 500 करोड़ रुपये व्यय किये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बोर्ड के तहत 4,76,052 कामगार पंजीकृत हैं।
    बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव प्रियंका बासु इंगटी और आशीष सिंहमार, निदेशक डीडीटीजी डॉ. निपुण जिंदल, श्रम आयुक्त वीरेन्द्र शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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  • हिम परिवार पोर्टल से जोड़ें प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों का डेटा: मुख्यमंत्री
    प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों से हमीरपुर में आयोजित सम्मेलन में संवाद करेंगे मुख्यमंत्री
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कृषि विभाग को प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों का पूरा डेटा 20 जनवरी, 2026 तक हिम परिवार पोर्टल से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। डेटा में प्राकृतिक खेती से सम्बन्धित सम्पूर्ण विवरण का समावेश किया जाएगा। प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों का ब्लॉक आधार डेटा तैयार कर उसकी मैपिंग की जाएगी।
    मुख्यमंत्री ने आज यहां कृषि विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए युवाआंे को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। उन्होंने प्रदेश में इस पद्धति से खेती करने पर बल दिया ताकि किसान अधिक से अधिक आय अर्जित कर सके। हम प्राकृतिक खेती आधारित व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों से इस माह हमीरपुर में आयोजित होने वाले सम्मेलन में संवाद करेंगे।  
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं, मक्की और कच्ची हल्दी से सम्बन्धित विभिन्न विषयों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं के आटे को ‘हिम चक्की आटा’, मक्की के आटे को ‘हिम भोग मक्की’ आटा और कच्ची हल्दी को ‘हिम हल्दी’ के ब्रांड के साथ बाजार में उतारा गया है। उन्होंने आटे की पैकिंग के पैकेट में एक्सपायरी डेट से सम्बन्धित जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों में पौष्टिकता के सम्बन्ध में भी उचित जानकारी होनी चाहिए। इसका आकलन करने के लिए एक विशेष इकाई के गठन करने के भी निर्देश दिए।
    उन्होंने कहा कि प्राकृतिक विधि से उगाई गई 606.8 मीट्रिक टन मक्की की खरीद की गई है और 2.31 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में डाले गए हैं। प्राकृतिक खेती से उत्पादित 2123 क्विंटल गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद की गई और किसानों के खातों में एक करोड़ 31 लाख 57 हजार रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित किये गए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से उगाई कच्ची हल्दी पर 90 रुपये समर्थन मूल्य प्रदान करने के उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। इस वर्ष 1629 किसानों से लगभग 2422 क्विंटल हल्दी के प्रापण का अनुमान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा अपने 25 फार्मों में प्राकृतिक खेती पद्धति से विभिन्न फसलों का उत्पादन किया जा रहा है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती के उत्पादांे का बेहतर विपणन सुनिश्चित किया जाए।
    कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने बैठक में बहुमूल्य सुझाव दिए।
    बैठक में  मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव सी. पालरासु और अशीष सिंहमार, निदेशक डीडीटीजी डा. निपुण जिंदल, निदेशक कृषि डॉ. रविन्द्र सिंह जसरोटिया, निदेशक बागवानी विनय सिंह और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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