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  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता, गांव में खोले जा रहे हैं सीबीएसई स्कूलः मुख्यमंत्री
  • एनएलयू के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने में सहयोग करेगी प्रदेश सरकारः मुख्यमंत्री
  • श्री पेजावर मठ भारत की आध्यात्मिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण में निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका: राज्यपाल
  • नशा तस्करों की कमाई अब जनता की होगीः मुख्यमंत्री
  • प्रदेश के युवाओं को जापान की तकनीकी दक्षता, कौशल विकास और नवाचार से जोड़ने की अपार संभावनाएः राजेश धर्माणी
  • राज्यपाल ने मां ज्वालामुखी मंदिर में माथा टेका
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  • राज्यपाल ने मां ज्वालामुखी मंदिर में माथा टेका
     
    हिमाचल की धार्मिक परंपराओं एवं विरासत के संरक्षण पर दिया बल
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज कांगड़ा जिला के प्रसिद्ध मां ज्वालामुखी मंदिर में माथा टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया।
    राज्यपाल ने मंदिर में पूजा-अर्चना की तथा हिमाचल प्रदेश और राष्ट्र के लोगों की समृद्धि एवं कल्याण की प्रार्थना की।
    उन्होंने कहा कि हिमाचल के पवित्र मंदिर और तीर्थ स्थल केवल आस्था एवं श्रद्धा के केंद्र ही नहीं हैं बल्कि प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा भी हैं। उन्होंने प्रदेश की धार्मिक परंपराओं, प्राचीन विरासत और आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।
    राज्यपाल ने मंदिर में की गई व्यवस्थाओं की सराहना की तथा श्रद्धालुओं और प्रदेश की जनता को अपनी शुभकामनाएं दीं।
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  • प्रदेश के युवाओं को जापान की तकनीकी दक्षता, कौशल विकास और नवाचार से जोड़ने की अपार संभावनाएः राजेश धर्माणी
     
     
     
    तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश के एक प्रतिनिधिमंडल ने जापान के टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में उप-मिशन प्रमुख आर. मधु सूदन से भेंट की।
    इस दौरान प्रदेश से जुड़े विभिन्न विषयों, विशेष रूप से राज्य के विद्यार्थियों एवं युवाओं के लिए जापान में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, प्रशिक्षण तथा वैश्विक अवसरों की संभावनाओं पर सार्थक चर्चा हुई। आर. मधु सूदन ने हिमाचल से जुड़े विषयों के संदर्भ में भारतीय दूतावास की भूमिका एवं कार्य प्रणाली की जानकारी भी दी।
    राजेश धर्माणी ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को जापान की तकनीकी दक्षता, कौशल विकास और नवाचार से जोड़ने की अपार संभावनाएं हैं। इससे विद्यार्थियों एवं युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
    तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान में एआई सहित नई प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा देना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एआई में क्षमताओं को बढ़ाने और विश्वसनीय और लचीले डिजिटल अवसंरचना के निर्माण में जापान उल्लेखनीय सहयोग प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के समावेशी विकास से नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खुलेंगे। 
    बैठक में हिमाचल प्रदेश के पर्यटन को जापान में बढ़ावा देने के विषय पर भी विशेष रूप से चर्चा हुई। राजेश धर्माणी ने कहा कि हिमाचल अपने नैसर्गिक सौन्दर्य, समृद्ध संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और शांत वातावरण के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। धर्मशाला में परम पावन दलाई लामा की उपस्थिति ने प्रदेश को वैश्विक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
    उन्होंने कहा कि जापान में हिमाचल प्रदेश की पर्यटन क्षमता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर अधिक से अधिक जापानी पर्यटकों को हिमाचल की ओर आकर्षित करने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। 
    राजेश धर्माणी ने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक संबंधों और समृद्ध पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। हिमाचल प्रदेश अपने बौद्ध एवं अध्यात्मिक विरासत स्थलों के लिए विश्व प्रसिद्ध है और इन स्थलों को जापानी पर्यटकों के मध्य बढ़ावा देने की आवश्यकता है। प्रदेश सरकार प्रतिबद्धता के साथ बेहतर पर्यटन व्यवस्था प्रणाली विकसित कर रही है, जिससे भारत और जापान के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ेगा। 
    राजेश धर्माणी ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य हिमाचल के युवाओं, शिक्षा, कौशल और पर्यटन की संभावनाओं को वैश्विक मंच से जोड़ना है ताकि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, प्रशिक्षण एवं विकास के नए अवसर सृजित हो सकंे। 
    इस दौरान ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण तथा कौशल विकास में जापानी कार्य-पद्धतियों एवं श्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित स्किल अकादमी जैसी पहलों में जापानी उद्योगों एवं संस्थानों की भागीदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
    आर. मधुसूदन ने भारत और जापान के विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग एवं संपर्क स्थापित करने में भारतीय दूतावास की भूमिका के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
    प्रतिनिधिमंडल ने उनके बहुमूल्य सुझावों के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बैठक में हुई चर्चा को संबंधित जापानी संस्थानों एवं संगठनों के साथ आगे बढ़ाया जाएगा ताकि कौशल विकास, प्रौद्योगिकी एवं रोजगार के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग स्थापित किया जा सके।
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  • श्री पेजावर मठ भारत की आध्यात्मिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण में निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका: राज्यपाल
     
     
    मठों द्वारा सामाजिक समरसता और सार्वभौमिक भाईचारे को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की
    युवा पीढ़ी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का किया आहवान
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज नई दिल्ली के वसंत कुंज स्थित श्री पेजावर मठ का दौरा किया। यह मठ उडुपी मठ की एक इकाई है। इस दौरान उन्होंने श्री पेजावर अधोक्षज मठ, उडुपी के 33वें पीठाधिपति श्री श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामीजी से भेंट की।
    राज्यपाल का मठ पहुंचने पर गुरुकुल के विद्यार्थियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्वागत किया गया।
    श्री श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामीजी ने राज्यपाल को पेजावर मठ द्वारा शिक्षा, आध्यात्मिकता, सामाजिक सेवा और सामुदायिक कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मठ द्वारा वसंत कुंज में भी एक गुरुकुल का संचालन किया जा रहा है, जहां विद्यार्थियों को समग्र वातावरण में पारंपरिक भारतीय एवं मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान की जा रही है।
    राज्यपाल ने देशभर में मठों और आध्यात्मिक संस्थानों द्वारा सामाजिक समरसता, सार्वभौमिक भाईचारे तथा भारत के महान दार्शनिक संतों की शिक्षाओं को बढ़ावा देने में निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने सामाजिक सेवा, शिक्षा, आध्यात्मिकता और सामुदायिक कल्याण के क्षेत्र में इन संस्थानों के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ये संस्थान भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं तथा सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी मजबूत कर रहे हैं।
    राज्यपाल ने पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण और मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करने के लिए मठ के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गुरुकुल परंपरा भारत की स्वदेशी शैक्षणिक विरासत का एक महत्वपूर्ण आयाम है, जहां शिक्षा को अनुशासन, चरित्र निर्माण, आध्यात्मिकता, सेवा और समाज के प्रति सम्मान के साथ जोड़ा जाता है।
    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि भारत के महान संतों और दार्शनिकों की शिक्षा में सदैव सद्भाव, करुणा, सेवा और सार्वभौमिक भाईचारे के आदर्शों पर बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि मठों और अन्य आध्यात्मिक संस्थानों ने इन मूल्यों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आज के समाज में भी इनकी प्रासंगिकता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
    राज्यपाल ने युवा पीढ़ी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान से अवगत कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में तीव्र तकनीकी और सामाजिक बदलाव समाज को निरंतर प्रभावित कर रहे हैं, ऐसे में युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
    राज्यपाल ने श्री श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामीजी से प्रदेशवासियों के लिए आशीर्वाद की कामना करते हुए समाज के कल्याण तथा भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के लिए मठ द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना की।
    इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद, दिल्ली के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड ब्रदरहुड ऑर्गनाइजेशन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष कपिल खन्ना तथा इंडियन यूथ पार्लियामेंट के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष जोशी भी उपस्थित थे।
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  • एनएलयू के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने में सहयोग करेगी प्रदेश सरकारः मुख्यमंत्री
     
     
     
    मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न विषयों की समीक्षा की
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय  (एनएलयू), शिमला के मौजूदा बुनियादी ढांचे के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण में सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री ने वीरवार देर सायं विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न विषयों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे को और सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा उन्होंने विश्वविद्यालय को अपने संसाधन स्वयं सृजित करने पर भी बल दिया।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार छात्राओं और छात्रों के लिए छात्रावासों के निर्माण में सहयोग करेगी। उन्होंने छात्राओं के छात्रावास की सीमा के साथ कंटीले तारों की बाड़ लगाने के निर्देश भी दिए ताकि सुरक्षा को बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि परिसर में कम वोल्टेज की समस्या के समाधान के लिए नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाएगा तथा छात्रावास के ऊपर से गुजर रही एचटी लाइन को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यार्थियों और अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिसर के भीतर ओवरहेड विद्युत तारों को भूमिगत करने के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाने का भी आश्वासन दिया।
    मुख्यमंत्री ने जल शक्ति विभाग को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थल चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल की कमी की समस्या के समाधान के लिए प्रदेश सरकार पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाएगी।
    हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, शिमला की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने विश्वविद्यालय की लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए विशेष ध्यान देने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
    बैठक में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया, महाधिवक्ता अनूप रतन, मुख्य सचिव के.के. पंत, प्रधान सचिव देवेश कुमार, सचिव शिक्षा राकेश कंवर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता, गांव में खोले जा रहे हैं सीबीएसई स्कूलः मुख्यमंत्री
     
    दूध पर समर्थन मूल्य के रूप में इस वर्ष देंगे 200 करोड़ रुपयेः सीएम
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज दैनिक समाचार पत्र हिमाचल दस्तक के ‘नारी तू नारायणी’ कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी दिशा में गांवों में सीबीएसई स्कूल खोले जा रहे हैं, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। किसानों और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि की गई है। वर्तमान में प्रदेश सरकार द्वारा गाय का दूध 61 रुपये और भैंस का दूध 71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राज्य सरकार दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में करीब 200 करोड़ रुपये प्रदान करने जा रही है।
    श्री सुक्खू ने कहा कि कांगड़ा जिले के ढगवार में डेढ़ लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट इस वर्ष अक्तूबर तक तैयार हो जाएगा। इससे किसानों और पशुपालकों की अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती के माध्यम से उगाई जाने वाली गेहूं, मक्की और हल्दी जैसी फसलों के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान कर रही है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हर स्तर पर नीतिगत बदलाव किए जा रहे हैं और स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में हिमाचल प्रदेश, देश में 21वें स्थान पर था, लेकिन वर्तमान सरकार द्वारा किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप प्रदेश अब पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 150 सीबीएसई स्कूल खोले हैं और 30 सितंबर, 2026 तक इन स्कूलों में सभी अध्यापकों की नियुक्ति कर दी जाएगी। अध्यापकों का चयन पूरी तरह मेरिट के आधार पर किया जा रहा है। इन स्कूलों में भी मौजूदा फीस संरचना के अनुसार ही फीस ली जाएगी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विद्यार्थियों को विदेशों में एक्सपोजर विजिट पर भेज रही है, ताकि वे दुनिया में हो रहे बेहतर कार्यों और आधुनिक व्यवस्थाओं को करीब से देख सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश का पहला साइंस कॉलेज करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा हमीरपुर जिले में एलाइड एंड हेल्थकेयर कॉलेज भी खोला जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल छात्रों के लिए भी विदेशों में एक्सपोजर विजिट की व्यवस्था कर रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र में डायग्नोस्टिक सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के विभिन्न विभागों को सुदृढ़ किया जा रहा है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ रही है और बीबीएमबी से हिमाचल को मिलने वाले एरियर के मामले में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2027 तक हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगा।
    मुख्यमंत्री ने नशे के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि नशे को रोकने के लिए प्रदेश में पीआईटी-एनडीपीएस कानून लागू किया गया है। पिछले तीन वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में नशा तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया है और उनकी संपत्तियां भी जब्त की गई हैं, ताकि अपराधियों में कानून का भय पैदा हो सके। उन्होंने कहा कि चिट्टे के खिलाफ अभियान का दूसरा चरण 16 सितंबर से ऊना जिले से शुरू किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने हिमाचल दस्तक को ‘नारी तू नारायणी’ कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, नगर निगम शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान, हिमाचल प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्षा विद्या नेगी, हिमकॉन के अध्यक्ष विकेश चौहान, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा, हिमाचल दस्तक के चेयरमैन के.डी. श्रीधर, सम्पादक हेमंत कुमार, राज्य प्रमुख मस्तराम डलैल तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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  • सीबीएसई स्कूलों के लिए ड्रेस कोड, यूनिफॉर्म और भवन रंग योजना तय
    विद्यार्थियों को घर के नजदीक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां शिक्षा विभाग की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सीबीएसई स्कूलों के शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड, विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म तथा स्कूल भवनों के लिए रंग योजना को अंतिम रूप देने के संबंध में चर्चा की गई।
    बैठक में निर्णय लिया गया कि सीबीएसई स्कूलों के विद्यार्थियों की विशिष्ट यूनिफॉर्म हरे रंग की थीम पर आधारित होगी। इन स्कूलों की महिला शिक्षिकाएं हल्के लाइलैक (बैंगनी) रंग की पोशाक पहनेंगी, जबकि पुरुष शिक्षक हल्के नीले रंग की पैंट और शर्ट पहनेंगे। इन स्कूलों के भवनों को ऑलिव ग्रीन और सैंड बेज रंगों से रंगा जाएगा। शिक्षकों का ड्रेस कोड साफ-सुथरा, औपचारिक, शालीन और पेशेवर होगा तथा इसमें न्यूनतम सहायक वस्तुओं का प्रयोग किया जाएगा। डयूटी के दौरान शिक्षकों को अपना पहचान पत्र पहनना भी अनिवार्य होगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को उनके घरों के नजदीक गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने सीबीएसई स्कूलों में आवश्यक आधारभूत ढांचे के विकास तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 80 करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों के लिए अतिरिक्त 5 करोड़ रुपये भी जारी कर दिए जाएंगे। 
    बैठक में विधायक सुरेश कुमार, चंद्र शेखर और नीरज नैय्यर, हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के सदस्य विजय पाल सिंह, सचिव शिक्षा राकेश कंवर, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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