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  • मछली पकड़ने की प्रतिबंध अवधि में जलाशय मछुआरों को संबल प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने शुरू की ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना’
  • मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस से पहले नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली पर निर्णय का दिया आश्वासन
  • कारगिल विजय दिवस के 27 वर्ष, सेना प्रशिक्षण कमान ने ऑपरेशन विजय के अमर वीरों के अदम्य शौर्य को किया नमन
  • राज्यपाल ने अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का किया शुभारंभ
  • बोह क्षेत्र के बेघर परिवारों को गृह निर्माण और अन्य सामान के लिए 8.50 लाख की आर्थिक सहायता: मुख्यमंत्री
  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में बढेंगी चिकित्सकों की 100 पीजी सीटेंः मुख्यमंत्री
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  • बोह क्षेत्र के बेघर परिवारों को गृह निर्माण और अन्य सामान के लिए 8.50 लाख की आर्थिक सहायता: मुख्यमंत्री
    प्रभावित परिवारों को गृह निर्माण के लिए सरकारी भूमि भी करवाई जाएगी उपलब्ध
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बोह पहुंचकर आपदा प्रभावित परिवारों का जाना हाल
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के बोह में बादल फटने की घटना से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बोह में स्थापित राहत शिविर का निरीक्षण किया तथा वहां ठहराए गए प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों के घर इस आपदा में पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें मकान निर्माण के लिए 7.50 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, कपड़े, बर्तन एवं अन्य आवश्यक घरेलू सामान की खरीद के लिए एक लाख की सहायता भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन प्रभावित परिवारों के पास रहने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है, उन्हें सरकार आवश्यकतानुसार सरकारी भूमि भी उपलब्ध करवाएगी।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जिन परिवारों की गाय या भैंस आपदा में मर गई है, उन्हें 55 हजार प्रति पशु तथा जिनकी बकरियां मरी हैं, उन्हें 15 हजार प्रति बकरी की सहायता राशि दी जाएगी। जिन घरों में बाढ़ या आपदा के पानी से नुकसान हुआ है, उन्हें एक लाख की राहत प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार, क्षतिग्रस्त दुकानों के लिए नुकसान के आधार पर 50 हजार से एक लाख तक की सहायता दी जाएगी।
    उन्होंने कहा कि जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें 5 हजार  प्रति कनाल के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। जिन परिवारों को अस्थायी रूप से किराए के मकान में रहना पड़ेगा, उन्हें 5 हजार प्रतिमाह किराया सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रभावित परिवारों को छह माह का राशन भी निःशुल्क उपलब्ध करवाया जाएगा।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रिडकमार  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्तरोन्नत करने की घोषणा भी की।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023-24 की आपदा के दौरान प्रदेश में 23 हजार से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए थे और लगभग 500 बहुमूल्य जीवन गवांए थे। प्रदेश सरकार ने 75 हजार से अधिक लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू किया था, जिसकी सराहना नीति आयोग और विश्व बैंक ने भी की थी।
    उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में 21वें स्थान से पांचवें स्थान पर पहुंचा है।
    मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं और आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना तथा उन्हें आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार आपदा की इस घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रभावित परिवार को स्वयं को अकेला महसूस करने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं हिमाचल प्रदेश के लिए लगातार गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। ऐसे में राज्य सरकार केवल राहत कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर भी कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत से आपदा-रोधी आधारभूत ढांचे के विकास का निर्णय लिया गया है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करते हुए जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार राज्य सरकार ने आपदा राहत नियमों में संशोधन करते हुए प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली सहायता राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इसके अतिरिक्त संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष आपदा राहत कोष का भी गठन किया गया है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करते हुए 25 परिवारों को 25-25 हजार रुपये तथा 16 अन्य परिवारों को 10-10 हजार रुपये की अंतरिम सहायता राशि जारी की गई है। अब तक 13 राजस्व प्रमाण-पत्र तैयार किए जा चुके हैं तथा प्रभावित परिवारों कोे बोनाफाइड प्रमाण-पत्र जारी किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के पुनःनिर्माण की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने का कार्य भी युद्धस्तर पर जारी है।
    मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों में लगे जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा स्थानीय लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सभी के सामूहिक सहयोग से राहत कार्यों को गति मिली है। 
    इस अपादा में घुड़घुं, भंगार और सपेड़ा गांवों के कुल 25 परिवार प्रभावित हुए हैं। इनमें घुड़घुं गांव के 11 मकानों में रह रहे 18 परिवारों के 52 सदस्य, भंगार गांव के एक मकान में रह रहे 3 परिवारों के 16 सदस्य तथा सपेड़ा गांव के 4 मकानों में रह रहे 4 परिवारों के 16 सदस्य प्रभावित हुए हैं। सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सपेड़ा गांव के 13 मकानों को डेंजर जोन घोषित किया गया है।
    इस अवसर पर शाहपुर के विधायक एवं उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर, वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार, स्थानीय पंचायत प्रधान नीलम कुमारी, उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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  • राज्यपाल ने अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का किया शुभारंभ
    सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और नशामुक्त समाज के निर्माण का किया आह्वान
    कारगिल विजय दिवस पर कारगिल के वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज चंबा के ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का शुभारंभ किया। उन्होंने इस अवसर पर चंबा और हिमाचल प्रदेश की जनता को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सदियों पुराना यह मेला प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सांप्रदायिक सौहार्द और जीवंत लोक परंपराओं का प्रतीक है।
    राज्यपाल ने ऐतिहासिक चौगान में जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अपनी समृद्ध परंपराओं, लोक-कलाओं, मेलों और त्योहारों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजोकर रखा है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने तथा भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का आह्वान किया।
    राज्यपाल ने कहा कि मिंजर जैसे मेले हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ-साथ एकता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की भावना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए समाज से नशे के खिलाफ जनजागरूकता अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशे के विरूद्ध हमें मिलकर अपने युवाओं की रक्षा करनी होगी और नशामुक्त हिमाचल का निर्माण करना होगा। उन्होंने इस दिशा में चंबा पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।
    राज्यपाल ने चंबा की विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक हस्तकलाओं, जिनमें चंबा रूमाल, चंबा चप्पल और चंबा थाल शामिल हैं, का उल्लेख करते हुए उन शिल्पकारों की प्रशंसा की जो जिले की समृद्ध कलात्मक विरासत को संरक्षित रखने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
    इससे पूर्व, कारगिल विजय दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने चंबा के कारगिल शहीदों आशीष थापा, खेम राज और ओम प्रकाश को पुष्पांजलि अर्पित की तथा उपस्थित जनसमूह को राष्ट्र के वीर सैनिकों के आदर्शों और बलिदान को सदैव स्मरण रखने एवं उनका सम्मान करने की शपथ दिलाई।
    उन्होंने कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों तथा वीरता पुरस्कार प्राप्त सैन्य कर्मियों के परिजनों को भी सम्मानित किया। इनमें सेवानिवृत्त कर्नल रवि वैद्य, विद्या देवी, मुशरबू देवी, सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर अशोक कुमार, हवलदार मिलाप सिंह, हेम राज, हवलदार सुशील कुमार, हवलदार करण सिंह, अश्वनी कुमार तथा हवलदार धर्मपाल शामिल थे।
    राज्यपाल ने मिंजर ध्वज फहराकर मेले का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर अजीत भट्ट एवं उनकी मंडली ने पारंपरिक कुंजड़ी-मल्हार की प्रस्तुति दी। यह मंडली पिछले 32 वर्षों से इस विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा का निर्वहन कर रही है।
    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, विधायक नीरज नैयर एवं डी.एस. ठाकुर, एपीएमसी अध्यक्ष ललित ठाकुर, जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष सुरजीत भरमौरी, नगर परिषद चंबा की अध्यक्षा भुवनेश्वरी गुलाटी, जिला परिषद के उपाध्यक्ष लियाकत अली, प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव यशवंत खन्ना, अतिरिक्त उपायुक्त अमित मेहरा, पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।
     
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  • मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस से पहले नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली पर निर्णय का दिया आश्वासन
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्राथमिक शिक्षकों को आश्वस्त किया है कि राज्य सरकार शिक्षक दिवस से पहले नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली पर उचित निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस व्यवस्था की सहानुभूतिपूर्वक समीक्षा करेगी और यह तय करेगी कि इसमें सुधार की आवश्यकता है या इसे पूरी तरह वापस लिया जाए।
    आज शिमला के चौड़ा मैदान में आयोजित प्राथमिक शिक्षक संघ की आम सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और शिक्षक संघ के बीच होने वाली आगामी बैठक में इस विषय पर निष्पक्ष एवं सहानुभूतिपूर्ण निर्णय लिया जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि प्राथमिक शिक्षकों के विरुद्ध की गई निलंबन की कार्रवाइयों, विभागीय जांचों तथा दर्ज एफआईआर को वापस लिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्य अध्यापकों, केंद्र मुख्य अध्यापकों तथा खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों के अधिकारों की शक्तियों में कमी नहीं की जाएगी। साथ ही, प्राथमिक विद्यालयों में खेल गतिविधियों को भी पुनः शुरू किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जेबीटी शिक्षकों को टीजीटी पदों पर पदोन्नति प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षक संघ की मांगों पर शनिवार को सचिवालय में संघ के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में विस्तार से चर्चा की गई है।
    मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि उनके हितों की पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार लागू कर रही है और शिक्षकों के सहयोग से प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों को राज्य के सर्वश्रेष्ठ विद्यालय बनाया जाएगा।
    उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा पहले ही शुरू की जा चुकी है। उन्होंने इस दिशा में प्राथमिक शिक्षकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि सीबीएसई विद्यालयों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति लगभग पूरी हो चुकी है और शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी जारी है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मंत्रिमंडल की पहली बैठक में 1.36 लाख कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल की थी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी राजनीतिक कारण से नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान और कल्याण को ध्यान में रखकर लिया गया। उन्होंने कहा, मैं स्वयं एक सरकारी कर्मचारी का बेटा हूं। हमने ओपीएस इसलिए बहाल की क्योंकि नई पेंशन योजना के तहत कई कर्मचारियों को मात्र 3,000 रुपये तक पेंशन मिल रही थी, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा और सम्मान प्रभावित हो रहा था। ओपीएस लागू होने के बाद अनेक सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अब लगभग 30,000 रुपये मासिक पेंशन मिल रही है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और संसाधनों की सुरक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसने राज्य के हितों की रक्षा नहीं की। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से हुए आर्थिक नुकसान तथा लगभग 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियां वर्तमान सरकार के लिए छोड़ दी गईं। उन्होंने प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए सभी से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
     
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  • राहुल गांधी बने न्याय की आवाजः मुख्यमंत्री
    नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर शिमला में सर्वदलीय कैंडल मार्च
    मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिलाई संविधान की प्रस्तावना की शपथ
     
    नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर आज शिमला में विभिन्न दलों और आम जनता की ओर से सर्वदलीय कैंडल मार्च निकाला गया। मार्च का नेतृत्व मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने किया। कैंडल मार्च इंदिरा गांधी राज्य खेल परिसर से शुरू होकर स्कैंडल प्वाइंट होते हुए रिज स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा तक पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की। मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को संविधान की प्रस्तावना की शपथ भी दिलाई।
    पत्रकारों से बातचीत करते हुए ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि यह मार्च विभिन्न दलों के सहयोग से निकाला गया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे बच्चों को न्याय दिलाने की यह एक कोशिश है। हिमाचल प्रदेश की जनता न्याय की इस लड़ाई में संघर्ष कर रहे सभी युवाओं के साथ खड़ी है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि युवाओं को उनकी मेहनत का उचित फल मिल सके। उन्होंने नीट परीक्षा विवाद के कारण आत्महत्या करने वाले युवाओं के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की। भाजपा पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां-जहां भाजपा की सरकारें होती हैं, वहां पेपर लीक के मामले सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पिछली भाजपा सरकार के दौरान पुलिस भर्ती का पेपर लीक हुआ था। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन आयोग से जुड़े भर्ती परीक्षाओं के पेपर भी लीक हुए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही आयोग को भंग कर उसके स्थान पर राज्य चयन आयोग का गठन किया गया और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया गया।
    श्री सुक्खू ने कहा कि लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बच्चों की न्याय की लड़ाई को अपनी आवाज दी है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
    मुख्यमंत्री ने इस सफल आयोजन के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) और आम जनता का धन्यवाद किया।
    इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, विधायक कुलदीप राठौर और संजय रतन, कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार, महासचिव विनोद जिंटा, पूर्व विधायक राकेश सिंघा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, पार्षद, कांग्रेस तथा सीपीआईएम के नेताओं सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
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  • मुख्यमंत्री ने विदेश से एमबीबीएस करने वाले स्नातकों की इंटर्नशिप अवधि एक वर्ष करने के निर्देश दिए
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पात्र विदेशी चिकित्सा महाविद्यालयों से एमबीबीएस कर चुके और कोविड-19 महामारी में उत्पन्न अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से अध्ययन करने वाले स्नातकों को एक वर्ष की इंटर्नशिप की अनुमति प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
    मुख्यमंत्री ने आज यहां विद्यार्थियों और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रभावित विद्यार्थियों की चिंताओं का समाधान निष्पक्ष, व्यावहारिक और छात्र हितैषी दृष्टिकोण के साथ करेगी। प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कोविड-19 महामारी के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों के कारण प्रभावित योग्य विद्यार्थियों को किसी प्रकार की हानि न उठानी पड़े।
    श्री सुक्खू ने कहा कि विदेश से चिकित्सा स्नातक करने वाले विद्यार्थियों की इंटर्नशिप अवधि को लेकर अनिश्चितता उत्पन्न हो गई थी, क्योंकि एक ही शैक्षणिक बैच के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग अवधि निर्धारित की गई थी। कुछ विद्यार्थियों को एक वर्ष की इंटर्नशिप करने की अनुमति दी गई, जबकि समान परिस्थितियों में कोविड-19 के दौरान पढ़ाई करने वाले अन्य छात्रों को दो वर्ष की इंटर्नशिप करने के निर्देश दिए गए।
    उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने महामारी के दौरान ऑनलाइन माध्यम से पढ़ने वाले विदेशी चिकित्सा स्नातकों के लिए प्रतिपूरक प्रशिक्षण अवधि की उपयुक्तता का आकलन करने का अधिकार राज्य सरकारों को सौंपा है। एनएमसी के प्रावधानों तथा विद्यार्थियों द्वारा झेली गई वास्तविक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पात्र अभ्यर्थियों के लिए इंटर्नशिप अवधि एक वर्ष निर्धारित करने का निर्णय लिया है।
    मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर आवश्यक आदेश जल्द जारी किए जाएं, ताकि प्रभावित छात्र अविलंब अपनी इंटर्नशिप शुरू या पूरी कर सकें। इस निर्णय से प्रभावित चिकित्सा स्नातकों को बड़ी राहत मिलेगी और वे अनावश्यक बाधाओं के बिना अपने चिकित्सा करियर को आगे बढ़ा सकेंगे। इससे राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बनी रहेगी।
    बैठक में प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार तथा चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. गोपाल बेरी भी उपस्थित थे। 
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  • 51 शक्तिपीठ भारत की आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय एकता के सशक्त प्रतीकः राज्यपाल
    शक्ति परम्परा के वैज्ञानिक अध्ययन, डिजिटल प्रलेखन और वैश्विक प्रचार-प्रसार पर दिया बल
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि 51 शक्तिपीठ केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय एकता के सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने शक्तिपीठों के इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक परम्पराओं के वैज्ञानिक अध्ययन, व्यवस्थित दस्तावेजीकरण तथा वैश्विक स्तर पर उनके प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।
    राज्यपाल ने आज श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, कटरा में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री महाराजा रणबीर सिंह परिसर, जम्मू तथा श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘शक्तिमीमांसा’ के शुभारम्भ सत्र को संबोधित किया। संगोष्ठी का विषय ‘51 शक्तिपीठ भारतीय विरासत के आध्यात्मिक स्तंभ’ था।
    राज्यपाल ने कहा कि शक्ति केवल आराधना का विषय नहीं, बल्कि सृजन, ज्ञान, करुणा, साहस और राष्ट्रचेतना की शाश्वत ऊर्जा है। भारतीय दर्शन में शक्ति सम्पूर्ण सृष्टि की मूल प्रेरक शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित है।
    उन्होंने कहा कि शक्तिपीठ सदियों से भारत की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करते आए हैं और ये केवल पूजा-अर्चना के स्थल नहीं, बल्कि भारतीय कला, स्थापत्य, साहित्य, संगीत और लोक परम्पराओं के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं।
    श्री गुप्ता ने कहा कि हमारी विरासत केवल स्मारकों के संरक्षण से सुरक्षित नहीं होती, बल्कि उससे जुड़ी परम्पराओं, ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखने से सुरक्षित रहती है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से शक्तिपीठों का डिजिटल दस्तावेजीकरण समय की आवश्यकता है।
    उन्होंने कहा कि वर्तमान में विश्व भारतीय ज्ञान परम्परा, योग, आयुर्वेद और अध्यात्म की ओर आकर्षित हो रहा है। ऐसे में भारतीय शक्ति साधना विश्व को नारी सम्मान, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, आध्यात्मिक संतुलन और सार्वभौमिक कल्याण का संदेश देती है।
    युवा शोधार्थियों का आह्वान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे संस्कृत साहित्य, शक्ति परम्परा, तंत्र दर्शन और भारतीय ज्ञान प्रणाली पर गहन शोध करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल कर संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं।
    राज्यपाल ने कहा कि भारत का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा जब हमारी युवा पीढ़ी आधुनिक ज्ञान के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और भारतीय ज्ञान परम्परा से भी जुड़ी रहेगी।
    राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि संगोष्ठी में होने वाले विचार-विमर्श और शोध भारतीय शक्ति परम्परा के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रतिष्ठा को नई दिशा देंगे। उन्होंने इस आयोजन के लिए सभी आयोजकों, विद्वानों और प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
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