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  • स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर प्रदेशवासियों को सम्बोधित करेंगे राज्यपाल व मुख्यमंत्री
  • राज्यपाल व मुख्यमंत्री की स्वतन्त्रता दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई
  • केन्द्र ने कांगड़ा जिले के लिए स्वीकृत किया कृषि संसाधन क्लस्टर
  • मुख्यमंत्री ने सम्पर्क से समर्थन कार्यक्रम के अन्तर्गत की विशिष्ट व्यक्तियों से मुलाकात
  • राज्यपाल ने बलराम दास टण्डन के निधन पर किया शोक व्यक्त
  • मुख्यमंत्री ने किया छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के निधन पर शोक व्यक्त
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  • मुख्यमंत्री ने सम्पर्क से समर्थन कार्यक्रम के अन्तर्गत की विशिष्ट व्यक्तियों से मुलाकात

    मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज शिमला में सम्पर्क से समर्थनकार्यक्रम के अन्तर्गत विशिष्ट व्यक्तियों से मुलाकात की।

    वह आईजीएमसी शिमला के सेवानिवृत प्राचार्य डॉ. डी.जे.दास गुप्ता, सेवानिवृत न्यायाधीश आर.के. महाजन तथा सेवानिवृत पुलिस महानिदेशक टी.आर. महाजन से उनके निवास स्थानों में जाकर मिले।

    मुख्यमंत्री ने उन्हें केन्द्र सरकार की चार वर्ष की उपलब्धियों की पुस्तिका भी भेंट की।

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  • मुख्यमंत्री राहत कोष में एसीसी ने किया 25 लाख का अंशदान
        
    मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर को आज यहां एसोसिएट सीमेंट कम्पनी सीमित (एसीसी) के वरिष्ठ महाप्रबन्धक संजीव कुमार ने 25 लाख रुपये का चेक मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए भेंट किया। 
    मुख्यमंत्री ने एसीसी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह योगदान दुःख के समय पात्र तथा जरूरतमंद लोगों को राहत प्रदान करने में कारगर साबित होगा। उन्होंने समाज के संभ्रान्त वर्ग से मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए उदारतापूर्वक योगदान करने की अपील की है ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता की जा सके। 
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  • हिमाचल प्रदेश मंत्रिमण्डल के निर्णय
     
    मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में राज्य में 224 करोड़ रुपये की ‘सौर सिचांई योजना’ को कार्यान्वित करने का निर्णय लिया गया। योजना के अन्तर्गत लघु एवं सीमान्त किसानों को निजी तौर पर 90 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी और मध्यम एवं बड़े किसानों को 80 प्रतिशत उपदान प्रदान किया जाएगा। इसी प्रकार, लघु एवं सीमान्त श्रेणी के किसानों/किसान विकास संघ/कृषक विकास संघ/किसानों की पंजीकृत संस्था इत्यादि को 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के अंतर्गत 5850 कृषि सौर पम्पिग सैट किसानों को उपलब्ध करवाएं जाएंगे।
    मंत्रिमण्डल ने मुख्यमंत्री के बजट आश्वासन के अनुरूप 174.50 करोड़ रुपये की बहाव सिंचाई योजना शुरू करने को मंजूरी प्रदान की। कृषि विभाग द्वारा कार्यान्वित की जाने वाली इस योजना के अन्तर्गत 7152.30 हैक्टेयर क्षेत्र को सुनिश्चित सिंचाई के अन्तर्गत लाकर राज्य के 9580 से अधिक किसानों को लाभान्वित किया जाएगा। 
    मंत्रिमण्डल ने किसानों को खेती के मशीनीकरण के लिए राज्य में 20 करोड़ रुपये का ‘राज्य कृषि यांत्रिकरण कार्यक्रम शुरू करने का भी निर्णय लिया। इस योजना के अन्तर्गत लघु एवं सीमान्त किसानों, महिला, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति से सम्बन्धित पात्र लाभार्थियों को छोटे टै्रक्टर, पॉवर टिल्लर्ज, विडर्ज तथा अन्य आवश्यकता आधारित/अनुमोदित मशीनरी खरीदने के लिए 50 प्रतिशत उपदान प्रदान किया जाएगा।
    बैठक में विद्यार्थियों को वनों के महत्व तथा पर्यावरण संरक्षण में उनकी भूमिका के बारे में शिक्षित तथा जागरूक करने के लिए ‘विद्यार्थी वन मित्र योजना’ शुरू करने का निर्णय लिया गया। योजना का उद्देश्य प्रकृति के संरक्षण की दिशा में लगाव की भावना उत्पन्न करना है। योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता के साथ पौधरोपण करके वन आवरण में वृद्धि करना भी है।     
    मंत्रिमण्डल ने विभिन्न विभागों/निगमों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गृह सुरक्षा तथा नागरिक सुरक्षा विभाग में मानदेय आधार पर गृह रक्षा वॉलन्टियर चालकों के 103 रिक्त पद भरने को अपनी मंजूरी प्रदान की। 
    बैठक में पुलिस विभाग में सीधी भर्ती के माध्यम से उप निरीक्षकों (कार्यकारी पुलिस) के 41 पद भरने को सहमति प्र्रदान की गई। 
    मंत्रिमण्डल ने चम्बा जिले के सलूणी में आवश्यक पदों के सृजन सहित नई अग्निशमन पोस्ट खोलने की स्वीकृति प्रदान की। 
    बैठक में कुल्लू जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पतलीकूहल को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में स्तरोन्नत करने तथा इस केन्द्र के संचालन के लिए विभिन्न श्रेणियों के सात पदों के सृजन को मंजूरी प्रदान की गई। 
    मंत्रिमण्डल ने नर्सिंग पाठयक्रमों का संचालन करने के लिए राज्य के 14 निजी नर्सिंग संस्थानों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने की स्वीकृति प्रदान की। 
    मंत्रिमण्डल ने सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग में सीधी भर्ती के माध्यम से अनुबन्ध आधार पर जूनियर केमरामैन के 11 पदों के सृजन तथा इन्हें भरने और सहायक लोक सम्पर्क अधिकारी के पांच रिक्त पदों को भरने का निर्णय लिया। 
    बैठक में सफाई/स्वच्छता तथा लोक सेवाओं के मानकों के आधार पर सर्वश्रेष्ठ नगर परिषदों तथा नगर पंचायतों के चयन के लिए श्रेष्ठ शहर योजना के लिए दिशा-निर्देशों को स्वीकृति प्रदान की गई। योजना का उद्देश्य सफाई/स्वच्छता, आय में वृद्धि, लोक सेवाएं प्रदान करना, निर्माण विनियमन, निधि की उपयोगिता, सार्वजनिक अधोसंरचना तथा कार्यालय कार्यों के मानदण्डों के आधार पर श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली शहरी स्थानीय निकायों को पुरस्कृत करना तथा प्रोत्साहन प्रदान करना है।
    मंत्रिमण्डल की बैठक में शिमला/धर्मशाला स्मार्ट सिटी पर शहरी विकास विभाग द्वारा प्रस्तुति भी दी गई।
    मंत्रिमण्डल ने 2.50 मेगावाट की बुरूआ जल विद्युत परियोजना को मै. जुनिपर इनफ्राकॉन (पी) लिमिटेड मनाली जिला कुल्लू को तथा 0.80 मेगावाट की ग्रामन परियोजना को मै. सुभाष चन्द लोअर समखेतर जिला मण्डी को आवंटित करने का निर्णय लिया।
    बैठक में राज्य में निर्मित की जा रही थर्माकोल कटलरी की राज्य के बाहर बिक्री करने की स्वीकृति प्रदान की गई, क्योंकि राज्य में थर्माकोल कटलरी पर पूर्ण प्रतिबन्ध है। 
    मंत्रिमण्डल ने बिलासपुर जिले के बन्दला में कॉलेज की स्थापना के लिए 62.06 बीघा सरकारी भूमि को हाईड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज समिति बन्दला के नाम एक रुपये प्रति बीघा की दर से 99 सालों के लिए पट्टे पर हस्तांतरण करने की मंजूरी प्रदान की। मंत्रिमण्डल ने इसका पुनः नामकरण करते हुए राजकीय हाईड्रो इंजीनिरिंग कॉलेज बन्दला, बिलासपुर नाम रखने को भी स्वीकृति प्रदान की।
    मंत्रिमण्डल ने हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया दल की एक बटालियन स्वीकृत करने के लिये केन्द्र सरकार का धन्यवाद किया। 
    मंत्रिमण्डल ने कृषि विभाग में अनुबंध आधार पर कनिष्ठ अभियंताओं के 17 पदों को भरने की स्वीकृति प्रदान की।
    मंत्रिमण्डल ने सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध आधार पर सहायक अभियंता (सिविल) के 11 पद भरने की स्वीकृति प्रदान की।
     
     
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  • फार्मा उद्योग की रोज़गार प्रदान करने तथा राज्य की आर्थिकी सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री
    नियामकों को दवाईयों की गुणवत्ता एवं क्षमता की दृष्टि से समाशोधन करते समय बहुत सावधान रहना चाहिए और अच्छी तरह से सुसज्जित परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना कर गुणवत्ता मानकों पर पूर्ण नियंत्रण रखने के लिए विनियामक ढांचा मजबूत होना चाहिए। यह बात मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां हिमाचल प्रदेश के दवा निर्माताओं और कॉस्मेटिक उद्योग के साथ परिसंवाद के दौरान कही।
    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नशीली दवाओं के रूप में दुरूपयोग की जा रही दवाओं के खतरे पर अंकुश के लिए प्रशासनिक, विधायिका तथा नियामक स्तर पर कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का मूल्य किसी और चीज से अधिक महत्वपूर्ण है और इस प्रकार गुणवत्ता और क्षमता से समझौता करने वालों को भागने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में फार्मा तथा कॉस्मेटिक सेक्टर न केवल राज्य के युवाओं को पर्याप्त रोजगार के अवसर प्रदान करने बल्कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को सुविधा प्रदान करने के लिए बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ में सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा जलापूर्ति इत्यादि जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। 
    उन्होंने कहा कि सरकार फार्मा उद्योग के प्रतिनिधियों द्वारा उन्हें बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के सम्बन्ध में उठाए गए मुददों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
    जय राम ठाकुर ने कहा कि उद्यमियों को सुविधा प्रदान करने के लिए औद्योगिक उद्देश्य के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन के मुददे पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योगपतियों को यथासम्भव सहयोग प्रदान करेगी ताकि वे राज्य में अपनी इकाईयां स्थापित कर सकें। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों को देश के विभिन्न भागों में सुचारू रूप से अपने उत्पादों के परिवहन के लिए सर्वोत्तम परिवहन सुविधाएं प्रदान करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि फार्मा उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार की और अधिक संवाद बैठकें की जाएगी ताकि बेहतर समझ और तालमेल विकसित किया जा सके। 
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री को विभिन्न औद्योगिक घरानों ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 1.44 करोड़ रुपये का चेक भेंट किया। मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों का इस पुनीत कार्य के लिए अंशदान करने पर आभार व्यक्त किया और कहा कि यह राशि गरीब व जरूरतमंद लोगों को दुःख व बीमारी के समय सहायता प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।
    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि वर्ष 2003 में राज्य के लिए विशेष औद्योगिक पैकेज की घोषणा के कारण प्रदेश में औषधीय उद्योग लगातार उन्नति की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि उपयोग में लाई जाने वाली हर तीसरी औषधी प्रदेश के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में तैयार की जाती है। उन्होंने कहा कि दवाइयों का निर्माण वहन करने योग्य और गरीबों की पहुंच में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं उपलब्ध करवाने के प्रति वचनबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के फार्मा उद्योगों को हर संभव सहायता सुनिश्चित बनाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार घटिया दवाइयों के उत्पादन में संलिप्त दवा निर्माताओं के विरूद्ध सख्त कार्रवाही अमल में लाएगी।
    अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य बी.के. अग्रवाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का सबसे बड़ा फार्मा हब के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के औषधीय उद्योगों द्वारा सालाना 40 हजार करोड़ रुपये की दवाइयों का उत्पादन किया जाता है, जिसमें से 10 हजार करोड़ रुपये की दवाइयों का निर्यात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि औषधीय व्यसनों पर प्रभावी नज़र रखने के लिए विशेष बल दिया जा रहा है और दवाईयों का नशे के रूप में दुरूपयोग पर नज़र रखने के लिए 186 निरीक्षण किए गए। उन्होंने कहा कि सोलन ज़िला के बद्दी में शीघ्र ही जांच प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी।
    निदेशक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन डॉ. नरेश कुमार लट्ठ ने मुख्यमंत्री तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।
           मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव विनय सिंह, मुख्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाह, निदेशक सूचना एवं जन सम्पर्क अनुपम कश्यप, फार्मा उद्योग के प्रतिनिधि व अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।  
     
     
     
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  • किसान समुदाय और कृषि वैज्ञानिक खुले मन से प्राकृतिक खेती को अपनाएंः राज्यपाल
    प्राकृतिक खेती में किसानों को खुशहाल बनाने की क्षमता :मुख्यमंत्री
    राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसान समुदाय तथा कृषि वैज्ञानिकों को अपनी सोच में बदलाव लाकर खुले मन से शून्य लागत प्राकृतिक खेती के आदर्श को अपनाने का आग्रह किया, जो रासायनिक खेती की मौजूदा प्रणाली को बदलने में मददगार होगा। 
    राज्यपाल आज यहा पीटरहॉफ में कृषि विभाग द्वारा शून्य लागत प्राकृतिक खेती पर आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। सम्मेलन में कृषि विभाग के 430 से अधिक अधिकारियों तथा सभी जिलों के किसानों ने भाग लिया। 
    आचार्य देवव्रत ने कहा कि उन्होंने हाल ही में नीति आयोग के साथ बैठक की थी और यह संतोष का विषय है कि उन्होंने स्वीकार किया कि केवल शून्य लागत प्राकृतिक खेती ही किसानों की आय को दोगुना कर सकती है और इसके बिना हम अपने किसान समुदाय को बचाने के बारे में नहीं सोच सकते। उन्होंने राज्य में प्राकृतिक खेती को लागू करने की पहल तथा पहले ही वर्ष में 25 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान करने के लिए मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की सोच तथा दृढ़ निश्चिय की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने वास्तविकता को स्वीकार किया है और राज्य में प्राकृतिक कृषि की क्रियान्वयन में हर सम्भव सहायता प्रदान करने में रूची दिखाई है। 
     
    उन्होंने कहा कि हमें अपनी मानसिकता में बदलाव लाने तथा बैठकें करने के बजाय ज़मीनी स्तर पर शून्य लागत प्राकृतिक खेती को क्रियान्वित करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के दौरान राज्य के विभिन्न भागों में प्राकृतिक कृषि पर छः बड़े शिविरों का आयोजन किया जा चुका है और इनमें बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया, जो यह दर्शाता है कि किसान समुदाय खेती की इस प्रणाली को लेकर उत्साहित है। उन्होंने राज्य में इस प्रकार के और अधिक शिविरों का आयोजन करने तथा प्रत्येक पंचायत को इससे जोड़ने का आग्रह किया ताकि वे लाभान्वित हो सके। 
    राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप किसानों की आय को दोगुना करने के लिए देश में अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन दुर्भाग्यवश हमारे वैज्ञानिक जो रसायनिक खेती की सिफारिश करते हैं, वे इस दिशा में समाधान प्रदान करने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि आन्ध्र प्रदेश तथा हमारे गुरूकुल के लाखों किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद आश्चर्यजनक वृद्धि और तीन गुणा आय दर्शाई है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव का एकमात्र कारण यह है कि उन्होंने इस मॉडल को ईमानदारी से अपनाया है। 
    राज्यपाल ने कहा कि मौजूदा परिपेक्ष्य में रसायनिक खेती तथा जैविक खेती की पुरानी परम्परा सहज नहीं है। जहां तक रसायनिक खेती का सम्बन्ध है, इसके उत्पाद नुकसानदायी और जहरीले हैं और साथ ही महंगे भी है। इसी प्रकार, जैविक खेती में उत्पादन की लागत काफी अधिक है और यह मिट्टी से काफी अधिक आवश्यक तत्वों को अवशोषित करती है। इसलिए शून्य लागत प्राकृतिक खेती ही कृषि का सर्वश्रेष्ठ विकल्प है। उन्होंने कहा कि रसायनिक खेती के विपरित प्रभावों को प्राकृतिक खेती से हल किया जा सकता है। उन्होंने प्राकृतिक कृषि अपनाने के विभिन्न कारणों तथा फायदों के बारे में जानकारी के अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं कृषि विश्वविद्यालय हिसार की हाल ही की रिपोर्ट की भी जानकारी दी, जो प्राकृतिक खेती को हितकारी दर्शाति है। उन्होंने गुरूकुल, कुरूक्षेत्र भूमि पर कृषि विश्वविद्यालय हिसार की रिपोर्ट और आंकड़ों का भी ब्योरा दिया और कहा कि रिपोर्ट के अनुसार कुछ भागों में ऑगेर्निक कार्बन 1.12 तक पहुंच गया है और इसमें एक वर्ष के दौरान 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इस उपाय के परिणाम प्रोत्साहित करने वाले है और खेतों में आश्चर्यजनक बदलाव आया है। 
    राज्यपाल ने कहा कि शून्य लागत प्राकृतिक खेती किसानों को सुरक्षित करने तथा उनकी आय को दोगुना करने का एकमात्र समाधान है। इस प्रणाली के अन्तर्गत किसानों को एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ता है, बल्कि बंजर भूमि के पुनरूत्थान, पानी का न्यूनतम उपयोग, स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित उत्पादन, पर्यावरण के लिए सुरक्षित इत्यादि अनेक लाभ हैं। उन्होंने प्राकृतिक कृषि अपनाने के लिए किसानों से भारतीय नस्ल की गाय पालने का आग्रह किया। उन्होंने राज्य नीति में साहिवाल, लाल सिन्धी तथा धरपरकार जैसी स्वदेशी नस्ल की गायों को शामिल करने का आग्रह किया। 
    राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कृषि विभाग द्वारा प्रकाशित ‘हिमाचल प्रदेश विजन-2022’ का विमोचन किया।  
    इस अवसर पर सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों को खुशहाल बनाने की क्षमता रखती है और राज्य सरकार इसे बढ़ावा देने के लिये हर संभव समर्थन प्रदान करेगी। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और खेती-बाड़ी उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय से किसानों ने अपने फसल उत्पादन में वृद्धि के लिए अनेक तरीके और तकनीकें अपनाई हैं, लेकिन उत्पादन बढ़ाने की इस आकांक्षा के चलते किसानों ने रासायनिक खादों तथा कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग करना शुरू कर दिया। 
    जय राम ठाकुर ने कहा कि रसायनों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता समाप्त होने के कारण भूमि बंजर हो गई। उन्होंने कहा कि इससे लोगों के स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव पड़ रहा है, क्योंकि अधिकांश फलों, सब्जियों तथा अनाज में नुकसानदायी रसायनों की काफी अधिक मात्रा विद्यमान है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब प्राकृतिक खेती को प्रभावी ढंग से प्रोत्साहित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि राज्य में शून्य लागत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बजट में 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को देश का प्राकृतिक कृषि राज्य बनाने के लिए सांझे प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शून्य लागत प्राकृतिक खेती न केवल लोगों को स्वस्थ भोजन और फल सुनिश्चित करेगी, बल्कि किसानों की आर्थिकी को भी मजबूत करेगी। उन्होंने प्रभावी शून्य लागत प्राकृतिक खेती सुनिश्चित करने के लिए देसी नस्ल की गायों के प्रोत्साहन पर बल दिया। 
    पदमश्री डॉ. सुभाष पालेकर, जो शून्य लागत प्राकृतिक खेती के जन्मदाता है, ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने किसान समुदाय तथा बड़ी संख्या में लोगों की सुरक्षा के लिए राज्य में प्राकृतिक कृषि को क्रियान्वित करने के लिए सही समय में सही फैसला लिया है। उन्होंने इस दिशा में अपना सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया और कहा कि पशुपालन, बागवानी जैसे अन्य सम्बद्ध विभागों को भी इसके साथ जोड़ना चाहिए। 
    उन्होंने शून्य लागत प्राकृतिक खेती पर चर्चा की और कहा कि रसायनिक कृषि महज़ एक तकनीक है, न कि प्राकृतिक प्रक्रिया, जबकि प्राकृतिक खेती एक विज्ञान है और इसे किसी बाह्य समर्थन की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता है तो केवल इसे अपनाने की।
    कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकण्डा ने इस अवसर पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि गतिविधियों में विविधता लाने के भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को प्राकृतिक कृषि अपनाने के लिये प्रेरित करने के उद्देश्य से शिविरों का आयोजन किया जा रहा है और बहुत से किसान इसे अपना रहे हैं। 
    प्रधान सचिव कृषि ओंकार शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
    इसके उपरान्त, इस अवसर पर परस्पर संवाद सत्र का भी आयोजन किया गया।  
    मुख्य सचिव विनीत चौधरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. श्रीकान्त बाल्दी, प्रधान सचिव उद्योग आर.डी. धीमान, निदेशक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राकेश कवंर, निदेशक सूचना एवं जन सम्पर्क अनुपम कश्यप, राज्यपाल के सलाहकार डॉ. शशी कान्त, विभिन्न महाविद्यालयों के कुलपति, राज्य के विभिन्न भागों के प्रगतिशील किसान और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
     
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  • चम्बा में स्थापित किया जाएगा सीमेंट प्लांट : मुख्यमंत्री
     
    मुख्यमंत्री ने की अन्तरराष्ट्रीय मिंजर मेले के समापन की अध्यक्षता
    मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज चम्बा के ऐतिहासिक चोगान में अन्तरराष्ट्रीय मिंजर मेले के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मेले व त्यौहारों प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के सरंक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और कोई भी समाज अपनी संस्कृति को उचित सम्मान दिए बिना प्रगति नहीं कर सकता। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि चम्बा का मिंजर मेला साम्प्रदायिक सौहार्द, शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व और भाइचारे का अनूठा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि चम्बा के एक मुस्लिम मिर्जा परिवार का इस उत्सव से ताल्लुक होना यह दर्शाता है कि चम्बा के लोग प्राचीन काल से साम्प्रदायिक सौहार्द और शान्तिपूर्वक रहते हैं। उन्होंने कहा कि मेला न केवल राज्य की विविध संस्कृति का एक उदाहरण है, बल्कि क्षेत्र के लोगों के स्वस्थ मनोरंजन का एक मुख्य स्त्रोत भी है। 
    जय राम ठाकुर ने कहा कि मिंजर मेला चम्बा का सवार्धिक लोकप्रिय मेला है जिसमें जिले के हर भाग से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। उन्होंने कहा कि मेले के दौरान आयोजित की जाने वाली खेल स्पर्धाएं ग्रामीण खिलाड़ियों को अपना कौशल और प्रतिभा दिखाने में मदद करती हैं। उन्होंने मिंजर मेले का उचित ढंग से आयोजन करने के लिए जिला प्रशासन को बधाई दी। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार के सात महीने के कार्यकाल के दौरान सरकार का एकमात्र लक्ष्य राज्य के हर क्षेत्र तथा समाज के प्रत्येक वर्ग का समान विकास सुनिश्चित करना रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के जन मंच कार्यक्रम का लक्ष्य लोगों की समस्याओं का उनके घरद्वार पर त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। 
    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केन्द्र सरकार भारतवर्ष को विश्व शक्ति बनाने के लिए तैयार है। उन्होंने लोगों से केन्द्र सरकार को सहृदय समर्थन देने का आग्रह किया ताकि आने वाले वर्षों में भी निर्बाधित विकास सुनिश्चित बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा करके चम्बा में सीमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा, जो न केवल स्थानीय लोगों को रोज़गार एवं स्वरोज़गार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां भी सुनिश्चित करेगा। 
    जय राम ठाकुर ने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय चम्बा में शीघ्र ही सिटी स्कैन मशीन प्रदान की जाएगी। उन्होंने बाड़ी गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा गेट गांव में पशु औषद्यालय खोलने की घोषणा की। उन्होंने राजकीय प्राथमिक पाठशाला दावेरी को माध्यमिक पाठशाला में स्त्तरोन्नत करने की घोषणा की। 
    मुख्यमंत्री को इस अवसर पर उपायुक्त ने जिला प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 10 लाख रुपये का चेक भेंट किया। 
    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर पुरस्कार भी वितरित किए। 
    चम्बा के उपायुक्त एवं अध्यक्ष मेला समिति हरिकेश मीणा ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री तथा अन्यों का स्वागत किया। उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय मिंजर मेले के दौरान आयोजित की गई विभिन्न गतिविधियों का ब्योरा भी दिया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने केवल मेले को उचित ढंग से व बड़े पैमाने पर आयोजित करना सुनिश्चित बनाया बल्कि यह भी सुनिश्चित बनाया कि मेले में प्रदूषण कम से कम हो। 
    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री किशन कपूर, चम्बा के विधायक पवन नेय्यर, भरमौर के विधायक जिया लाल, भटियात के विधायक विक्रम जरयाल, नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया, बैजनाथ के विधायक मुलकराज प्रेमी, भाजपा जिला अध्यक्ष डी. ठाकुर, पुलिस अधीक्षक डॉ. मोनिका व अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।
     
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