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   No.308/2026-PUB 22th March 2026

नागपुर में राज्यपाल ने भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय सत्र को किया संबोधित

नागपुर में राज्यपाल ने भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय सत्र को किया संबोधित

 
 
 
कहा - भाषा राष्ट्र की आत्मा है, युवाओं से मातृभाषा पर गर्व करने का आह्वान
2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर दिया बल
 
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज नागपुर स्थित महर्षि व्यास सभागार में आयोजित भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय सत्र को संबोधित किया। इस सत्र का आयोजन भारतीय युवा संसद-मीडिया फाउंडेशन और केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में देशभर से लगभग 600 युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सार्थक लोकतांत्रिक विचार-विमर्श किया।
युवाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि किसी राष्ट्र की भाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं होती, बल्कि वे उसकी आत्मा, स्मृति और जीवंत पहचान होती है। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी में मातृभाषा में संवाद को लेकर बढ़ती झिझक पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे गंभीर सांस्कृतिक चेतावनी बताया। उन्होंने कहा, ‘‘अंग्रेजी सीखना स्वागत योग्य है, लेकिन अपनी भाषा की कीमत पर नहीं।’’ उन्होंने कहा कि जो बच्चा अपनी मातृभाषा में सोचता है, वह अधिक रचनात्मक, आत्मविश्वासी और अपनी संस्कृति से गहराई से जुड़ा होता है।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र, जी-20 सम्मेलनों तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी के प्रयोग को सांस्कृतिक आत्म सम्मान का प्रेरक उदाहरण बताया। उन्होंने हाल ही में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट - 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने वहां भी हिंदी में संबोधन देकर यह संदेश दिया कि भारत अपनी भाषा में ही अत्याधुनिक विषयों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर सोच, बोल और नेतृत्व कर सकता है।
उन्होंने भारत की समृद्ध भाषाई विविधता कश्मीरी, डोगरी, पहाड़ी, तमिल, तेलुगु, बांग्ला, मराठी, गुजराती और संस्कृत पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि सत्र में बहुभाषीय सहभागिता ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सजीव अभिव्यक्ति है।
राज्यपाल ने युवाओं से ‘पंच परिवर्तन स्वबोध (आत्म-जागरूकता एवं स्वदेशी भावना), कुटुंब प्रबोधन (परिवार संस्था को सुदृढ़ करना), सामाजिक समरसता (सभी वर्गों में सद्भाव), पर्यावरण संरक्षण तथा नागरिक कर्तव्य (कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन) को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत का स्वरूप, आज के युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और प्रतिबद्धता से निर्धारित होगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं को केवल प्रगति के लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के सक्रिय भागीदार के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तब साकार होगा, जब युवा ज्ञान, कौशल और राष्ट्रीय जिम्मेदारी की भावना का समन्वय करेंगे।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री की युवा सशक्तिकरण संबंधी पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया की सराहना करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि एक समृद्ध, सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण, सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी और मूल्यों पर आधारित भारत का निर्माण है।
उन्होंने भारतीय युवा संसद-मीडिया फाउंडेशन और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को इस उत्कृष्ट पहल के लिए बधाई दी, जो भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और युवाओं की आकांक्षाओं के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य कर रही है।
इससे पूर्व, राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने नागपुर स्थित स्मृति भूमि में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार तथा द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर को उनकी समाधियों पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, अधिष्ठाता (शैक्षणिक एवं छात्र कल्याण) प्रो. मदन मोहन झा, रजिस्ट्रार प्रो. आर.जी. मुरली कृष्णा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे और उन्होंने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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