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  • राज्यपाल ने हिमाचल डेंटल कॉलेज सुंदरनगर के वार्षिक समारोह की अध्यक्षता की
  • राज्यपाल ने सरदार पटेल विश्वविद्यालय मण्डी के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की
  • मुख्यमंत्री ने एचपीएमसी को सेब खरीद के लिए समुचित व्यवस्था करने के दिए निर्देश
  • राज्यपाल ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य को नमन किया
  • अटल टनल ने लाहौल-स्पीति को विकास और पर्यटन की नई पहचान दी: राज्यपाल
  • मुख्यमंत्री सुख आश्रय कोष के लिए 73.92 लाख रुपये का अंशदान
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  • मुख्यमंत्री सुख आश्रय कोष के लिए 73.92 लाख रुपये का अंशदान
     
     
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू को मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने मशोबरा रिज़ॉर्ट लिमिटेड की ओर से मुख्यमंत्री सुख आश्रय कोष के लिए निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत आज यहां 73.92 लाख रुपये का चेक भेंट किया। मशोबरा रिज़ॉर्ट लिमिटेड एक सरकारी उपक्रम कंपनी है, जिसे वाइल्डफ्लावर हॉल के संचालन की जिम्मेदारी प्रदान की गई है। 
    मुख्यमंत्री ने अंशदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के योगदान से समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों की सहायता में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में सफल कानूनी लड़ाई के उपरांत राज्य सरकार ने मशोबरा रिज़ॉर्ट लिमिटेड को सशक्त किया है, जिसके परिणामस्वरूप यह एक लाभकारी संस्थान के रूप में सकारात्मक परिणाम दे रही है।
    लगभग 120 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक वाइल्डफ्लावर हॉल लग्ज़री होटल संपत्ति लगभग तीन दशकों तक कानूनी विवादों में घिरी रही। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार ने प्रभावी तरीके से मुकदमा लड़ने के लिए कानूनी विशेषज्ञों की सेवाएं लीं, जिसके परिणामस्वरूप इस मामले में बड़ी सफलता प्राप्त हुई। सर्वोच्च न्यायालय ने 20 फरवरी, 2024 को इस संपत्ति का कानूनी अधिकार राज्य सरकार को सौंप दिया तथा 31 मार्च, 2025 को इसका भौतिक कब्जा भी राज्य सरकार को मिल गया।
    इस अवसर पर प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार तथा मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी उपस्थित थे।
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  • अटल टनल ने लाहौल-स्पीति को विकास और पर्यटन की नई पहचान दी: राज्यपाल
     
     
     
    पहली बार लाहौल-स्पीति एवं मनाली पहुंचे राज्यपाल का स्थानीय लोगों ने किया भव्य स्वागत
     
    हिडिंबा मंदिर और सिस्सू का दौरा किया 
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने गुरुवार को लाहौल-स्पीति एवं मनाली प्रवास के दौरान विश्व प्रसिद्ध अटल टनल, रोहतांग, का दौरा कर इसकी तकनीकी विशेषताओं, सामरिक महत्त्व तथा क्षेत्रीय विकास में इसकी भूमिका की सराहना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अटल टनल सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित आधुनिक इंजीनियरिंग और अत्याधुनिक तकनीक का अद्भुत उदाहरण है। इससे हिमालयी क्षेत्र में विकास और सम्पर्क के नए आयाम स्थापित हुए हैं।
        राज्यपाल ने साउथ पोर्टल से नॉर्थ पोर्टल तक टनल का अवलोकन किया तथा बीआरओ अधिकारियों से इसके निर्माण, सुरक्षा प्रबंधन और संचालन संबंधी विस्तृत जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने उन्हें वर्षभर यातायात सुचारू बनाए रखने के लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं की भी जानकारी दी। राज्यपाल ने कहा कि यह परियोजना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की दृढ़ इच्छाशक्ति और दूरदर्शी सोच का साकार रूप है। उन्होंने कहा कि अटल टनल केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि देश की सामरिक मजबूती, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और जनसुविधा का प्रतीक है।
       उन्होंने कहा कि इस सुरंग के निर्माण से जिला लाहौल-स्पीति अब वर्षभर देश से जुड़ा रहता है, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आवश्यक सेवाओं में बड़ी सुविधा प्राप्त हुई है। राज्यपाल ने कहा कि अटल टनल के निर्माण के बाद क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिली है और देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। इससे स्थानीय रोजगार एवं अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
          राज्यपाल ने सिस्सू झील एवं वॉटरफॉल का भी दौरा किया। उन्होंने लाहौल घाटी की मनोरम प्राकृतिक छटा की सराहना करते हुए कहा कि सिस्सू आज प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी विशेष पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि अटल टनल बनने के बाद पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन एवं स्थानीय लोगों को व्यापक लाभ हुआ है।
    राज्यपाल ने लाहौल के आराध्य देवता राजा घेपन मंदिर में दर्शन कर प्रदेश एवं देशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। लाहौल-स्पीति पहुंचने पर जिला प्रशासन की ओर से उपायुक्त किरण भड़ाना और वरिष्ठ अधिकारियों ने नॉर्थ पोर्टल पर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर राज्यपाल का लाहौल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्मान भी किया गया।
         इसके उपरांत, राज्यपाल ने मनाली स्थित हिडिंबा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से भी मुलाकात की तथा प्रदेश की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की सराहना की।
        राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि के रूप में विश्वभर में अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां देवी-देवताओं के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और आस्था प्रदेश की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं, जिससे प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को नई पहचान मिली है।
    उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और समृद्ध भविष्य की कामना करते हुए कहा कि हिमाचल की धार्मिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता देश की अमूल्य धरोहर है, जिसे संरक्षित एवं संवर्धित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
         इस अवसर पर कुल्लू के उपायुक्त अनुराग चन्द्र शर्मा, पुलिस अधीक्षक कुल्लू मदन लाल और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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  • मुख्यमंत्री ने एचपीएमसी को सेब खरीद के लिए समुचित व्यवस्था करने के दिए निर्देश


    खरीद प्रक्रिया में पूर्ण डिजिटलीकरण पर दिया बल

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बुधवार सायं हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करते हुए निगम को आगामी सीजन के लिए मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत सेब खरीद की तैयारियों के लिए समुचित प्रबंध करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सेब उत्पादकों, विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है और इसके लिए निगम को किसानों तक उनके उत्पादों का अधिकतम लाभ पहुंचाने की दिशा में कार्य करने के लिए कहा गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले सीजन में सेब की खरीद शुरू होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए तथा प्रदेश के बागवानों की सुविधा के लिए खरीद केंद्रों की अग्रिम सूचना जारी की जाए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि एचपीएमसी ने वर्ष 2025 में एमआईएस के तहत रिकॉर्ड 98,540 मीट्रिक टन सेब की खरीद सुनिश्चित की थी। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष एचपीएमसी ने ही पूर्ण रूप से एमआईएस के तहत सेब खरीद सुनिश्चित की थी जबकि इससे पूर्व हिमफेड भी खरीद प्रक्रिया में शामिल रहता था। राज्य सरकार ने पिछले वर्ष से यह दायित्व केवल एचपीएमसी को सौंपा है और भविष्य में भी यही व्यवस्था जारी रहेगी।
    उन्होंने बागवानों की सुविधा के लिए एचपीएमसी की कार्यप्रणाली के डिजिटलीकरण पर भी बल देते हुए कहा कि अगले खरीद सीजन से पूरी खरीद प्रक्रिया और डेटा का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और बागवान लाभान्वित होंगे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सेब उत्पादकों के हितों को सर्वोपरि रखकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यूनिवर्सल कार्टन प्रणाली लागू करने सहित अनेक बागवान हितैषी कदम उठाए हैं। सरकार के इन कदमों से बागवानों को उनकी मेहनत के बेहतर दाम मिल रहे है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने एमआईएस के तहत बागवानों के बकाया भुगतान को चुकाने के लिए अब तक की सबसे बड़ी राशि जारी की है।
    बैठक में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी, प्रधान सचिव देवेश कुमार, सचिव बागवानी सी. पॉलरासु, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, विशेष सचिव डी.सी. राणा, निदेशक डिजिटल टेक्नोलॉजी एंड गवर्नेंस डॉ. निपुण जिंदल और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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  • राज्यपाल ने सरदार पटेल विश्वविद्यालय मण्डी के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की



    स्नातकों से ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का किया आह्वान
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने बुधवार को सरदार पटेल विश्वविद्यालय मण्डी के द्वितीय दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने इसे मात्र डिग्री वितरण कार्यक्रम न बताते हुए ‘ज्ञान, संस्कृति और जिम्मेदारी के संगम का उत्सव’ बताया। उन्होंने स्नातक छात्रों से आह्वान किया कि वे केवल व्यक्तिगत करियर तक सीमित न रहें बल्कि अपने ज्ञान, नवाचार और नैतिक मूल्यों को ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण में समर्पित करें।
    उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता का उनका आदर्श आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना स्वतंत्रता के समय था। विश्वविद्यालय परिसर में सरदार पटेल की प्रतिमा स्थापित करने के निर्णय की सराहना करते हुए उन्होंने ‘भारत वल्लभ’ की अवधारणा को राष्ट्रीय दृष्टि का प्रतीक बताया।
    राज्यपाल ने छात्रों से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की कम समय में हुई उल्लेखनीय प्रगति की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के चरणबद्ध क्रियान्वयन, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की स्थापना, पहले दीक्षांत समारोह का पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में आयोजन तथा विभिन्न शैक्षणिक समितियों के गठन को सराहनीय कदम बताया।
    उन्होंने मंडी के 500 वर्षों के ऐतिहासिक सफर को स्मरण करने के लिए आयोजित बहुआयामी शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए इसे ‘गहरी ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक जिम्मेदारी की अभिव्यक्ति’ कहा।
    श्री गुप्ता ने स्नातकों को भारत के व्यापक विकास परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और विकसित भारत 2047 जैसे लक्ष्य केवल व्यक्तिगत सफलता से नहीं, बल्कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही पूर्ण हो पाएंगे।
    उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि नवाचार, नैतिकता और मानवीय संवेदनशीलता भी अत्यंत आवश्यक हैं। तकनीकी दक्षता के साथ एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सोच और दृष्टिकोण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
    राज्यपाल ने छात्रों से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने, नशामुक्त जीवन अपनाने, पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने तथा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोने का आग्रह किया।
    राज्यपाल ने एक दार्शनिक संदर्भ ‘दीक्षांत’ और ‘शिक्षांत’ के संस्कृत अर्थों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा कभी समाप्त नहीं होती, बल्कि यह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है।
    दीक्षांत समारोह के दौरान विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के 575 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जबकि 40 छात्रों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया।
    राज्यपाल ने सभी स्वर्ण पदक विजेताओं, डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता में परिवार और गुरुजनों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एसपीयू मंडी भविष्य में न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे देश में ज्ञान का प्रमुख केंद्र बनेगा।
    कुलपति प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने वर्ष 2022 में स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने 2.30 करोड़ रुपये की शोध परियोजनाएं प्राप्त कीं, 60 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए तथा दो पेटेंट के लिए स्वीकृति हासिल की। उन्होंने कहा कि विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ 22 समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
    उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने बहुविषयक शिक्षा, कौशल आधारित पाठ्यक्रम, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट प्रणाली और बहु-प्रवेश एवं निकास व्यवस्था को लागू किया है। विश्वविद्यालय ने आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ, अनुसंधान परिषद तथा अनुसंधान नीति ढांचा भी स्थापित किया है।
    रजिस्ट्रार शशि पाल नेगी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
    इस अवसर पर धर्मपुर के विधायक चन्द्र शेखर, उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन, पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार, सहायक आयुक्त सुनैना शर्मा, संकाय सदस्य, विद्यार्थी, उनके अभिभावक, विश्वविद्यालय स्टाफ तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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  • राज्यपाल ने हिमाचल डेंटल कॉलेज सुंदरनगर के वार्षिक समारोह की अध्यक्षता की


    दंत चिकित्सा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक खोल रही नए अवसरः राज्यपाल

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता आज हिमाचल डेंटल कॉलेज, सुंदरनगर के वार्षिक दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत को एक विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं को ज्ञान, कौशल और नवाचार के साथ आगे बढ़ना होगा। युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है और यदि युवा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं तो भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र बनाया जा सकता है।
    राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल डेंटल कॉलेज, सुंदरनगर प्रदेश का अग्रणी दंत चिकित्सा संस्थान है, जिसने शिक्षा, शोध, सामुदायिक सेवा और स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि दंत स्वास्थ्य समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण आधार है और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े युवाओं की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने पेशे में उत्कृष्टता के साथ-साथ सेवा, संवेदनशीलता और नैतिकता को भी जीवन का हिस्सा बनाएं।
    श्री गुप्ता ने कहा कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से दंत चिकित्सा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। उन्होंने संस्थान द्वारा ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों में लगाए जा रहे निःशुल्क दंत चिकित्सा शिविरों, नो-टोबैको जागरूकता अभियानों और सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों की सराहना भी की।
    उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहचान केवल उसकी अकादमिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज के प्रति उसके योगदान से भी होती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हिमाचल डेंटल कॉलेज भविष्य में भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में निरंतर कार्य करता रहेगा।
    इस अवसर पर राज्यपाल ने शैक्षणिक और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। बीडीएस एवं एमडीएस पाठ्यक्रमों में विश्वविद्यालय स्तर पर उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए।
    इस अवसर पर शैक्षणिक उपलब्धियों में बीडीएस प्रथम वर्ष की अधारिका गुप्ता (विश्वविद्यालय प्रथम), सुहानी कश्यप (विश्वविद्यालय तृतीय), बीडीएस द्वितीय वर्ष की निशिता गुप्ता (कॉलेज प्रथम एवं विश्वविद्यालय तृतीय), तृतीय वर्ष की अक्षिता जोशी (विश्वविद्यालय द्वितीय), वसुंधरा (विश्वविद्यालय चतुर्थ), अक्षत (विश्वविद्यालय पंचम स्थान), अंतिम वर्ष के प्रशांत (विश्वविद्यालय प्रथम), जागीशा (विश्वविद्यालय द्वितीय) तथा सारा पुरी (विश्वविद्यालय चतुर्थ) सहित अनेक विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। एमडीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा में डॉ. नित्या सहगल (ऑर्थाेडोंटिक्स), डॉ. नियति (पेडोडोंटिक्स), डॉ. हरनूर (एंडोडोंटिक्स) एवं डॉ. अनन्या (पेरिओडोन्टिक्स) ने विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर संस्थान का गौरव बढ़ाया। एमडीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा में डॉ. भूमिका (पेरिओडोन्टिक्स) एवं डॉ. उर्वशी सोलंकी (ऑर्थाेडोंटिक्स) ने विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
    इसके अतिरिक्त खेल उपलब्धियों में डॉ. सुशांत कौशल, अंजिका ठाकुर, वंशीता, आकाश परमार, देवांश तथा बैडमिंटन युगल विजेता डॉ. साहिल ठाकुर और अनुराग सहित कई विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए।
    कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
    राज्यपाल ने महाविद्यालय की आधुनिक नई डेंटल वैन सेवा का शुभारंभ भी किया, जो ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों में दंत स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
    संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ. बलजीत सिंह ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि कॉलेज वर्ष 1993 से दंत उपचार, आपके द्वार योजना के तहत सामुदायिक आउटरीच शिविरों का आयोजन कर रहा है। पिछले वर्ष संस्थान द्वारा 46 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 6000 से अधिक लोगों की जांच की गई तथा 800 से अधिक मरीजों का उपचार आधुनिक डेंटल वैन में किया गया।
    उन्होंने बताया कि संस्थान को सामुदायिक सेवा एवं आउटरीच गतिविधियों के लिए वर्ष 2025 में इंडियन डेंटल एसोसिएशन द्वारा ‘कम्युनिटी सर्विस एंड आउटरीच’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा ‘इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ डेंटिस्ट्स’ द्वारा भी संस्थान को सामुदायिक एवं मानवतावादी सेवाओं के लिए प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।
    निदेशक डॉ. अनिल सिंगला ने राज्यपाल और गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. विकास जिंदल ने आभार प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
    इस अवसर पर विधायक राकेश जम्वाल, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर, उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन, पुलिस अधीक्षक मंडी विनोद कुमार, हिमाचल डेंटल कॉलेज की चेयरपर्सन संतोष गुप्ता, निदेशक डॉ. अनिल सिंगला, डॉ. विकास जिंदल, प्रधानाचार्य डॉ. बलजीत सिंह और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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  • नव-पदोन्नत प्रधानाचार्यों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की भेंट



    हिमाचल प्रदेश हेडमास्टर्स कैडर ऑफिसर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भेंट की और उन्हें सम्मानित किया। प्रतिनिधिमण्डल ने हाल ही में 834 प्रधानाचार्यों की पदोन्नति के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया, इनमें 539 हेडमास्टर और 295 प्रधानाचार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा विभाग में एक साथ की गई अब तक की सबसे बड़ी पदोन्नति है।
    उन्होंने इस वर्ष 151 स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की भी सराहना की और इन स्कूलों के लिए शिक्षकों की पारदर्शी तरीके से तैनाती करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से सभी शिक्षकों को एक समान अवसर सुनिश्चित हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया अत्यंत उत्साहजनक रही है, जिसका प्रमाण इन स्कूलों में विद्यार्थियों के बढ़ते नामांकन से स्पष्ट हो रहा है।
    प्रतिनिधिमण्डल के राज्य अध्यक्ष डॉ. रत्तन सिंह, महासचिव मुल्ख राज धीमान और वित्त सचिव बहादुर सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
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