News Flash: समाचार फ़्लैश:
  • आईजीएमसी शिमला में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन के शुभारंभ से मरीजों को मिलेगी बेहतर चिकित्सा सुविधा
  • नशा तस्करी के विरूद्ध हिमाचल पुलिस का व्यापक अभियान
  • वन भूमि पर अतिक्रमण के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप बनेगी नीति
  • हिमाचल हरित ऊर्जा राज्य के लक्ष्य की ओर अग्रसरः राजेश धर्माणी
  • प्रदेशवासियों को राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री द्वारा होली उत्सव की बधाई
  • उप-मुख्यमंत्री की प्रदेशवासियों को होली की शुभकामनाएं
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  • वन भूमि पर अतिक्रमण के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप बनेगी नीति
    एक सप्ताह के भीतर नीति का प्रारूप सौंपेगी सब-कमेटी
    राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में वन और विधि विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक
     
    राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आज यहां वन भूमि पर अतिक्रमण के संबंध में नीति प्रारूप तैयार करने पर गहन विचार-विमर्श हुआ। सर्वोच्च न्यायालय ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए है। बैठक में राजस्व, वन और विधि विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा की गई। 
    जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा कल्याणकारी राज्य की अवधारण के अनुरूप एक नीति प्रारूप तैयार करने पर गहराई से विचार-विमर्श किया गया।
    बैठक में अतिरिक्त सचिव राजस्व अनिल चौहान की अध्यक्षता में एक सब-कमेटी बनाने का निर्णय लिया गया। सब-कमेटी में वन और विधि विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे। यह कमेटी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप एक सप्ताह के भीतर नीति का प्रारूप सौंपेगी।
    बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल (वन बल प्रमुख) संजय सूद, अतिरिक्त सचिव राजस्व बलवान चंद, अतिरिक्त सचिव राजस्व सुनील वर्मा, संयुक्त सचिव विधि डॉ. विवेक ज्योति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 
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  • अगले 8 महीनों में सभी मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध होगी हाई-एंड तकनीक: मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री ने किया राज्य स्तरीय एचपीवी टीकाकरण का शुभारम्भ
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज आईजीएमसी शिमला से सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए राज्य स्तरीय एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारम्भ करते हुए कहा कि अगले 90 दिनों में 14 वर्ष की आयु की 65000 लड़कियों को यह टीका लगाया जाएगा। उन्होंने अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कर्मियों से इस कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील करते हुए जन जागरूकता पर बल दिया।
    मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश में बढ़ते कैंसर के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस बीमारी से लड़ने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 40 वर्षों से सरकारें एक ही ढर्रे पर चलती रहीं। इस व्यवस्था को बदलने के लिए राज्य सरकार ने व्यवस्था परिवर्तन का नारा दिया। अगर हमारी सरकार भी पांच वर्षों तक ऐसी ही चलती तो हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी पीछे चला जाता। उन्होंने कहा कि आज कैंसर जैसी बीमारी का इलाज संभव है, अगर सही समय पर सही इलाज मिले। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 300 करोड़ रुपये की लागत से हमीरपुर में स्टेट ऑफ दी आर्ट कैंसर अस्पताल बनाने जा रही है ताकि रोगियों को प्रदेश में ही सस्ता और सुलभ इलाज उपलब्ध हो सके।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार अगले लगभग आठ महीनों में आईजीएमसी समेत प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में विश्व स्तरीय तकनीक से लैस उपकरण और मशीनें स्थापित करने जा रही है। आने वाले तीन वर्षों में प्रदेश के सभी जोनल अस्पतालों, आदर्श स्वास्थ्य  संस्थानों, पीएचसी, सीएचसी में भी एम्स की तर्ज पर आधुनिक तकनीक उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में हेल्थ टूरिज्म को विकसित करने का लक्ष्य रखा है, जिसका लाभ प्रदेश के लोगों के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र से जुड़े डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ और तकनीशियन को होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हाई-एंड मशीनें और उपकरण लगाने के लिए 3000 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई रिफॉर्म किए। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सों और टैक्निकल स्टाफ जैसे आप्रेशन थियेटर असिसटेंट, रेडियोग्राफर आदि के पद स्वीकृत किए हैं, जिन्हें भरा जा रहा है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को आईजीएमसी में आधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का शुभारम्भ किया गया है क्योंकि यहां पर 19 साल पुरानी मशीन काम कर रही थी। उन्होंने कहा, ‘‘आम आदमी की पीड़ा को समझकर उसके कल्याण के लिए फैसले करना ही व्यवस्था परिवर्तन है।’’ उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पांचों मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत करने जा रही है। चमियाणा अस्पताल और टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी शुरूआत करने के बाद 10 मार्च को आईजीएमसी में भी यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र पर विशेष ध्यान दे रहे हैंे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया जा रहा है जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। हाई-एंड मशीनें लगाने पर राज्य सरकार 3000 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है।
    एचपीवी टीकाकरण अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इसे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा और बच्चियों को टीके निःशुल्क उपलब्ध करवाये जाएंगे। उन्होंने कहा कि टीकाकरण अभियान मेडिकल अधिकारियों की देखरेख में चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व और दूरगामी सोच का परिणाम है।
    कार्यक्रम में विधायक हरीश जनारथा एवं सुरेश कुमार, सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा राकेश शर्मा, मिशन निदेशक, एनएचएम प्रदीप ठाकुर और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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  • रोहित ठाकुर ने शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार लाने तथा जवाबदेही तय करने के दिए निर्देश
    विलय किए गए विद्यालयों के रिक्त भवनों को जनहित में उपयोग करने कि दिए निर्देश 
    सभी बोर्ड परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य करने के निर्देश
     
    शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज यहां विद्यालय शिक्षा (माध्यमिक, प्रारंभिक एवं गुणवत्ता प्रकोष्ठ) के उप-निदेशकों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का उद्देश्य राज्य भर में शैक्षणिक स्तर, प्रशासनिक कार्यकुशलता तथा विद्यालयों के समग्र प्रदर्शन का आकलन करना था। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और शिक्षण परिणामों में सुधार सुनिश्चित करने की सीधी जिम्मेदारी उप-निदेशकों की है।
    उन्होंने समग्र शिक्षा के अंतर्गत जारी धनराशि का समयबद्ध एवं परिणामोन्मुख उपयोग करने के निर्देश दिए तथा 31 मार्च, 2026 तक पूर्ण व्यय सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसाधनों का उपयोग सीधे तौर पर कक्षा स्तर पर दिखाई देने वाले सुधारों में परिलक्षित होना चाहिए और इसके लिए उप-निदेशक स्तर पर जवाबदेही तय की गई है। उन्होंने उप-निदेशकों से निरंतर तौर पर फील्ड विजिट कर विद्यालयों में किए जा रहे पठन-पाठन से संबंधित कार्यों और सुधारों के बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। 
    बैठक में विशेषकर विलय किए गए विद्यालयों में युक्तिकरण की भी विस्तृत समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि विलय के बाद खाली हुए भवनों को निष्क्रिय न छोड़ा जाए, बल्कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार उन्होंने विलय किए गए विद्यालयों के भवनों का व्यापक जनहित में प्रभावी एवं सुव्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इन परिसरों का पंचायतों के साथ समन्वय स्थापित कर सामुदायिक उपयोग में लाया जाए अथवा आवश्यकता अनुसार आंगनवाड़ी केंद्रों एवं अन्य शासकीय विभागों को हस्तांतरित किया जाए। इस व्यवस्था से सार्वजनिक संपत्तियों का सर्वोत्तम एवं सार्थक उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के बीच प्रशासनिक बाधाओं को समाप्त करने पर बल दिया, ताकि उपलब्ध प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, खेल मैदानों एवं शिक्षण स्टाफ का साझा उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। 
    राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान और वाणिज्य संकाय के युक्तिकरण की भी समीक्षा की गई। राज्य के 1,970 विद्यालयों में से 818 में विज्ञान तथा 799 में वाणिज्य संकाय संचालित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से उपलब्ध संकाय और आधारभूत संरचना का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
    शिक्षा मंत्री ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत परीक्षाओं की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि विलय किए गए सरकारी विद्यालय बोर्ड परीक्षा केंद्र के रूप में कार्य करेंगे तथा प्रधानाचार्यों को केंद्र समन्वयक नियुक्त कर परीक्षा संचालन की निष्पक्षता और सुचारु व्यवस्था के लिए उत्तरदायी बनाया जाएगा। सभी परीक्षा कक्षों में लाइव मॉनिटरिंग सहित सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य किए गए हैं तथा पूर्व में चिन्हित संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही विभागीय आंकड़ों की रियल-टाइम निगरानी के लिए एक सशक्त डिजिटल प्रणाली विकसित करने के निर्देश भी दिए।
    उन्होंने कहा कि कुछ निजी विद्यालयों द्वारा सीबीएसई संबद्ध संस्थानों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को समय पर स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) जारी न करने का मामला अत्यंत गंभीर है। उन्होंने ऐसे मामलों का निर्धारित समयसीमा में समाधान करने के निर्देश दिए ताकि किसी भी विद्यार्थी का भविष्य प्रभावित न हो। इस संबंध में उन्होंने उप-निदेशकों को आवश्यक हस्तक्षेप कर उचित कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सीबीएसई संबद्धता के उपरांत की प्रक्रियाओं, उप-श्रेणी पात्रता तथा लंबित भर्तियों से संबंधित मामलों की भी समीक्षा कर शीघ्र समाधान के निर्देश दिए।
    बैठक के दौरान अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक के निरीक्षण कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने समय पर पूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। एमआईएस रिपोर्टिंग, विद्यार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण, आयरन फोलिक एसिड एवं डीवॉर्मिंग गोलियों के वितरण तथा पीएम पोषण योजना के अंतर्गत मध्यान्ह भोजन की स्वचालित निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ बनाने पर भी बल दिया गया, ताकि जमीनी स्तर पर जवाबदेही बढ़ाई जा सके।
    विद्यार्थियों के समग्र विकास पर बल देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार खेल एवं सह-पाठयक्रम गतिविधियांे पर विशेष बल दे रही है। वर्ष 2025-26 में राज्य ने ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त करते हुए 121 खिलाड़ियों ने 48 राष्ट्रीय पदक जीते, जिनमें अंडर-14 वर्ग में भी 14 पदक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा खिलाड़ियों के लिए 1,22,85,000 रुपये की डाइट मनी स्वीकृत की गई है जिसे शीघ्र ही जारी कर दिया जाएगा और खिलाड़ियों को पौष्टिक भोजन सुनिश्चित होगा। उन्होंने चरणबद्ध तरीके से खेल छात्रावासों के विस्तार और संचालन के लिए चरणबद्ध तरीके से सुदृढ़ निगरानी तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यालयों में सांस्कृतिक गतिविधियों, वाद-विवाद, विज्ञान प्रदर्शनियों तथा अन्य सह-पाठयक्रम कार्यक्रमों को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने को कहा।
    उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा विकसित समग्र प्रगति कार्ड रूपरेखा का पायलट आधार पर विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि व्यापक मूल्यांकन प्रणाली को अपनाते हुए शिक्षकों के कार्यभार को कम किया जा सके। उन्होंने पदोन्नत प्रधानाचार्यों की नेतृत्व एवं प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए इंडक्शन प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश भी दिए।
    शिक्षा मंत्री ने विद्या समीक्षा केंद्रों की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल निगरानी के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने बेहतर शैक्षणिक परिणामों के लिए डेटा विश्लेषण को और सुदृढ़ करने तथा बोर्ड परीक्षाओं के लिए ‘अभ्यास’ मॉड्यूल में जिलों की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने चंबा जिले में लागू की गई सफल परीक्षा तैयारी पहलों को अन्य जिलों में भी अपनाने का आह्वान किया।
    बैठक के दौरान पीएम श्री विद्यालय, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की डिजिटल उपस्थिति तथा निःशुल्क जेईई एवं नीट कोचिंग कार्यक्रम पर प्रस्तुतियां दी गईं। 
    शिक्षा सचिव राकेश कंवर, समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, सभी जिलों के उप-निदेशक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
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  • नए मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करने से पहले देंगे सभी आधुनिक मशीनेंः मुख्यमंत्री
    हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से साथ किया संवाद
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज हमीरपुर जिला के नादौन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर के डॉक्टरों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज आप सभी की बात सुनने आया हूं ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि वे चिकित्सकों के साथ इसी तरह से संवाद पहले आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज में भी कर चुके हैं, ताकि चिकित्सकों के सुझावों को नीति में शामिल किया जा सके और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज सिर्फ रैफरल स्वास्थ्य संस्थान बने हैं लेकिन इनमें सुधार करके प्रदेश में ही लोगों को बेहतर सेवाएं प्रदान की जाएंगी। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल सुविधाओं में सुधार के लिए हाई-एंड मेडिकल टेक्नोलॉजी ला रही है। उन्होंने कहा कि समय बदल रहा है और हमें जमाने के साथ चलना होगा। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ रुपये की लागत से हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के लिए ऑटोमेटेड लैब भी स्वीकृत की गई है। राज्य सरकार डायग्नोस्टिक सेवाओं को मजबूत कर रही है। भविष्य में हमीरपुर कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक और डेंटल कॉलेज भी शुरू किया जाएगा।
    उन्होंने कहा कि हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में जल्द ही रोबोटिक सर्जरी की सुविधा भी शुरू की जाएगी। मेडिकल कॉलेज को नए भवन में शिफ्ट करने से पहले सभी आधुनिक मशीनें वहां उपलब्ध करवा दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ के पदों को भर रही है और आवश्यकतानुसार अन्य पद भी सृजित किए जा रहे हैं।
    इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार व कै. रणजीत सिंह, पूर्व विधायक अनीता वर्मा, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के चेयरमैन रामचंद्र पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, एपीएमसी हमीरपुर के चेयरमैन अजय शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमन भारती, कांग्रेस नेता डॉ. पुष्पिंदर वर्मा, सुभाष ढटवालिया, रूबल ठाकुर, सचिव एम सुधा देवी और आशीष सिंघमार, उपायुक्त गंधर्व राठौर, पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।  
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  • मुख्यमंत्री ने किया निर्माणाधीन जसकोट हेलीपोर्ट और बस अड्डा हमीरपुर का निरीक्षण
    हेलीपोर्ट का निर्माण कार्य इस वर्ष मई माह तक पूरा करने के दिए निर्देश
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज हमीरपुर जिला के जसकोट में 18 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन हेलीपोर्ट का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस हेलीपोर्ट के निर्माण कार्य में तेजी लाकर इस वर्ष मई महीने तक इसका निर्माण कार्य पूरा करें। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा दे रही है और पर्यटकों की सुविधा के लिए कनेक्टिविटी व अधोसंरचना के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पर्यटन विकास से राज्य की आर्थिकी सुदृढ़ होगी तथा प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। 
    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जिला मुख्यालय तथा अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है तथा हाल ही में संजौली हेलीपोर्ट से चंडीगढ़ और रिकांगपिओ के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की गई हैं, जिससे पर्यटक राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सुगमता से पहुंच सकेंगे। इसके अतिरिक्त संजौली-रामपुर-रिकांगपिओ तथा संजौली-मनाली (सासे हेलीपैड) के लिए भी शीघ्र हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की जाएंगी।
    मुख्यमंत्री ने 123 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे हमीरपुर बस अड्डे का निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि दोनों परियोजनाओं पर कार्य तेजी से चल रहा है तथा इनका निर्माण कार्य तय समय के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, जिससे जिला के लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
    इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार व कै. रणजीत सिंह, पूर्व विधायक अनीता वर्मा, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के चेयरमैन रामचंद्र पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, एपीएमसी हमीरपुर के चेयरमैन अजय शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमन भारती, कांग्रेस नेता डॉ. पुष्पिंदर वर्मा, सुभाष ढटवालिया, रूबल ठाकुर, सचिव एम सुधा देवी और आशीष सिंघमार, उपायुक्त गंधर्व राठौर, पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह और अन्य गणमान्य उपस्थित थे। 
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  • राज्यपाल ने एचपीएनएलयू में कर सुधारों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ किया
    राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय शिमला में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘भारत में कर सुधारः चुनौतियां और संभावनाएं’ विषय पर आयोजित सम्मेलन का शुभारम्भ किया। 
    इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात विशेषकर उदारीकरण के बाद भारत की कर प्रणाली में व्यापक सुधार किए गए है जिससे कर ढांचा अधिक सरल, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बना है। हाल ही के वर्षों में प्रशासन के डिजिटलीकरण, फेसलेस असेसमेंट, ऑनलाइन अपील, सरल रिटर्न प्रक्रिया तथा कर दाता चार्टर जैसी पहलों से पारदर्शिता बढ़ी है और कर दाताओं का विश्वास सुदृढ़ हुआ है। ‘विवाद से विश्वास’ जैसी योजनाएं संग्रह के प्रति सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाती है। 
    राज्यपाल ने कहा कि उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद कर आधार का विस्तार, कर चोरी पर नियंत्रण, डिजिटल अर्थव्यवस्था से उत्पन्न जटिलताओं का समाधान तथा वैश्विक कर प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाए रखना जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। उन्होंने बल देते हुए कहा कि कर सुधार केवल विधिक विषय नहीं है बल्कि यह अर्थशास्त्र, लोक वित्त, प्रशासन और नीति-निर्माण से गहराई से जुड़ा हुआ है।
    राज्यपाल ने आचार्य चाणक्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख करते हुए कहा कि कर व्यवस्था न्यायसंगत, संतुलित एवं लोक-कल्याणकारी होनी चाहिए ताकि नागरिकों पर अनावश्यक बोझ न बने बल्कि उत्पादन और समृद्धि को प्रोत्साहित करे।
    इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा सम्मेलन की मुख्य विषय वस्तु पर प्रकाश डाला।
    मुख्य वक्ता प्रो. निगम नुग्गेहल्ली, प्रो. एवं रजिस्ट्रार, एनएलएसआईयू बेंगलुरु ने लोक वित्त और शासन की वास्तविक जटिलताओं पर विचार वयक्त करते हुए कहा कि जीएसटी जैसे बड़े सुधारों को बदलती आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप निरंतर विकसित होना चाहिए।
    सम्मेलन संयोजक प्रो. गिरिजेश शुक्ला ने कर प्रणाली के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण के प्रयासों, जैसे फेसलेस असेसमेंट और एआई आधारित विश्लेषण पर प्रकाश डालते हुए मध्यम तथा निम्न आय वर्ग पर बोझ डाले बिना कर आधार का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
    रजिस्ट्रार प्रो. आलोक कुमार, ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
    इससे पूर्व, राज्यपाल ने नव-डिजाइन एचपीएनएलयू लिटिगेशन लैब का उद्घाटन किया तथा विश्वविद्यालय के यूथ रेड क्रॉस द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर का भी शुभारंभ किया।
     
    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष कैप्टन रामेश्वर सिंह ठाकुर, राज्यपाल के सचिव चंद्र प्रकाश वर्मा, शिक्षाविद, प्रतिनिधि, छात्र एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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